भाजपा से गठबंधन कर निषाद पार्टी एनडीए के कुनबे में शामिल

Lok sabha election 2019

आखिरकार निषाद पार्टी अब भारतीय जनता पार्टी के अगुवाई वाले एनडीए का हिस्सा बन गई। महागठबंधन से अलग होने के बाद निषाद पार्टी लगातार भाजपा के संपर्क में थी। भाजपा निषाद पार्टी को अपने कुनबे में शामिल कर राहत की सांस ली है। कयास लगाया जा रहा है कि गोरखपुर की हारी सीट को बीजेपी प्रवीण निषाद के सहारे फिर पाने की कोशिश करेगी। फिलहाल, निषाद पार्टी के साथ छोड़ने से महागठबंधन को एक झटका जरूर लगा है।

 

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भाजपा ने हमारे सिद्धांतों व नीतियों को माना इसलिए साथः डाॅ.संजय

‘पत्रिका’ से बातचीत में डाॅ.संजय निषाद ने निषाद पार्टी के भाजपा से गठबंधन की बात स्वीकार की। उन्होंने यह भी बताया कि सदर सांसद प्रवीण निषाद ने भाजपा की सदस्यता ले ली है। सीटों के बंटवारे पर अभी बातचीत चल रही है। डाॅ.संजय ने भाजपा के साथ होने की वजहों को बताते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने निषाद पार्टी की नीतियों व मांगों को पूरी तरह से मान लिया है। चुनाव बाद उनकी मांगों का असर दिखने लगेगा।

 

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कई महीना से लिखी जा रही थी पटकथा, पटाक्षेप कुछ दिन पहले

गोरखपुर सदर सीट को पाने के साथ नाराज निषादों को मनाने के लिए भाजपा महीनों से कवायद कर रही थी। भाजपा के कई बड़े चेहरे इसके लिए निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ.संजय निषाद के संपर्क में थे। यहां तक कि कांग्रेस भी निषाद पार्टी को अपने साथ जोड़ना चाहती थी। लेकिन कांग्रेस निषाद पार्टी की कुछ मांगों पर सहमत नहीं हुई और बात आगे नहीं बन सकी। उधर, भाजपा भी निषाद पार्टी को अपने पाले में करने की लगातार कोशिश में थी। इसी बीच डाॅ.संजय निषाद की महागठबंधन से कुछ अनबन की बात सामने आई। भाजपा ने इस अवसर को झटकने में देरी नहीं की। यूपी सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने निषाद पार्टी के अध्यक्ष डाॅ.संजय निषाद से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुलाकात कराई। सबकुछ तय होने के बाद डाॅ.संजय ने महागठबंधन से अलग होने का निर्णय सार्वजनिक कर दिया।
गुरुवार को दिल्ली में सपा सांसद व डाॅ.संजय निषाद के पुत्र प्रवीण निषाद भाजपा की सदस्यता ली। साथ ही निषाद पार्टी को एनडीए में शामिल किया गया।

 

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महागठबंधन को लगा बड़ा झटका, रामभुआल को उतार डेमेज कंट्रोल

उपचुनाव में सपा के सिंबल पर निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ.संजय निषाद के पुत्र प्रवीण निषाद चुनाव लड़ा था। यह सीट सदर सांसद योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद रिक्त हुई थी। संयुक्त विपक्ष के प्रत्याशी के रूप में प्रवीण निषाद ने इस सीट पर जीत हासिल की थी। कांटे के इस मुकाबले में भाजपा के तत्कालीन क्षेत्रीय अध्यक्ष उपेंद्र दत्त शुक्ल को हार का सामना करना पड़ा था। यह सीट भाजपा करीब तीन दशक के बाद हारी थी। उपचुनाव के बाद से सपा-बसपा दशकों बाद एक मंच पर आई थी। छोटे दलों को शामिल कर महागठबंधन की नींव पड़ी थी। यूपी में इस महागठबंधन को मात देने के लिए भाजपा तमाम कवायद कर रही थी। लेकिन सफलता नहीं मिल रही थी। निषाद पार्टी के रूप में भाजपा के पास एक बड़ा मौका मिल गया है। उधर, महागठबंधन ने निषाद पार्टी के झटके से उबरने के लिए आनन फानन में उम्मीदवार का ऐलान कर दिया। निषाद समाज के बड़े नेताओं में शुमार पूर्व मंत्री रामभुआल निषाद को सपा ने गोरखपुर सदर से उम्मीदवार बनाया है। रामभुआल निषाद की गोरखपुर और आसपास के क्षेत्र में सजातीय वोटरों में खासी पकड़ है।

 

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निषाद वोटरों को पाने के लिए सभी चल रहे चाल

गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र समेत करीब आधा दर्जन क्षेत्रों में निषाद वोटरों की संख्या निर्णायक भूमिका में रहती है। महागठबंधन में निषाद पार्टी को शामिल कराकर सपा ने यूपी की राजनीति में खलबली मचा दी थी। भाजपा लगातार इन वोटरों को अपने पाले में करने को प्रयासरत थी। लेकिन सफलता हासिल नहीं हो रही थी। अब निषाद पार्टी को शामिल कराकर वह राहत महसूस कर रही है। आंकड़ों के अनुसार यूपी में करीब 17 फीसदी मछुआरा समाज की आबादी है। यह वोटर एकमुश्त वोटिंग करता है। इन वोटों को लुभााने के लिए भाजपा-कांग्रेस व महागठबंधन काफी प्रयासरत है।

 

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धीरेन्द्र विक्रमादित्य
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