यात्रियों को नसीब नहीं ठंडा पानी, सभी सीसीटीवी कैमरे भी बंद

यात्रियों को नसीब नहीं ठंडा पानी, सभी सीसीटीवी कैमरे भी बंद

Amit Mishra | Updated: 10 Jun 2019, 03:44:51 PM (IST) Guna, Guna, Madhya Pradesh, India

रेलवे स्टेशन पर यात्री हो रहे परेशान

गुना। अरे बाबूजी।मुझे भोपाल का एक टिकट दे दो, मेरी ट्रेन प्लेटफार्म पर खड़ी है। लाइन में आओ, बगैर उसके टिकट नहीं मिलेगा। इतनी लंबी लाइन लगी है, मैं उसमें लगूंगा तब तक ट्रेन ही निकल जाए। हमें इससे क्या लेना-देना, आप लाइन में आइए तभी आपको टिकट मिल पाएगा। इस तरह के सवाल-जवाब शनिवार को ही नहीं बल्कि कुछ समय से गुना रेलवे स्टेशन पर सुनने को मिल रहे हैं। इसकी वजह ये है कि कहने को यहां रेलवे ने तीन टिकट काउंटर खोल रखे हैं, लेकिन एक ही काउन्टर खुलता है, जिस पर टिकट के लिए इतनी भीड़ हो जाती है कि उनमें धक्का-मुक्की के अलावा मारपीट जैसी घटनाएं भी होना आम बात हो गई है।

 


पुलिस चिन्हित नहीं कर पा रही है
इसके साथ-साथा गुना रेलवे स्टेशन पर हजारों यात्री प्रतिदिन आ रहे हैं लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए रेलवे स्टेशन पर तीसरी आंख लगी हुई है, लेकिन वह लंबे समय से बंद पड़ी हुई है।

इससे सामान चोरी हो जाने के बाद उठाईगिरों को पुलिस चिन्हित नहीं कर पा रही है। कुल मिलाकर ये है कि गुना का रेलवे स्टेशन आजकल सुविधा की जगह परेशानी का मुख्य केन्द्र बन कर रह गया है। जबकि यहां से प्रतिदिन रेल यात्रियों से टिकट के रूप में पांच से छह लाख का राजस्व रेलवे को मिल रहा है।

ट्रेनों की कोई जानकारी नही मिलती
आर्किटेक्ट अपूर्वा दीक्षित, समाजसेवी लक्ष्मी देवी शर्मा, कांग्रेस नेत्री वंदना मांडरे, अभिभाषक आशीष शिंदे,चे बर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष अमित सौगानी जैसे कई लोगों का कहना था रेलवे स्टेशन पर पूछताछ केन्द्र बना हुआ है, लेकिन उस पर भी ट्रेनों की कोई जानकारी नही मिलती।


कोई ट्रेन नहीं हैं
कई बार तो वहां जानकारी देने वाला भी कोई नही रहता है। इन लोगों का कहना था कि भोपाल से गुना समेत कई ऐसे रूट हैं जहां देर शाम को आने और जाने के लिए कोई ट्रेन नहीं हैं। इसकी आवाज तो गुना के लोगों को बुलन्द करना चाहिए।

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अफसरों की सांठगांठ से वाटर कूलर भी बंद
रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को ठंडा पानी मिले, इसके लिए वाटर कूलर का इंतजाम हर रेलवे स्टेशन पर है। कहने को तो यहां दो वाटर कूलर लगे हैं लेकिन दोनों ही बंद हैं। इसमें एक रेलवे अधिकारी से पूछा गया तो उन्होंंने अपना नाम न बताने की शर्त पर बताया कि हम लोग क्या करें वाटर कूलर तो चालू हैं लेकिन स्टेशन पर जो कैंटीन आदि का ठेका है, उसके कहने पर वाटर कूलर बंद किए जाते हैं जिससे उस कैंटीन से अधिक से अधिक पानी की बिक्री हो सके।


कई बार शिकायत की
रेलवे स्टेशनों के नलों का आलम ये है कि वे काफी धीमी गति से गरम पानी उगल रहे हैं। यात्रियों का आरोप है कि रेलवे कैंटीन पर खान-पान की सामग्री पर प्रिन्ट रेट से अधिक पैसा वसूला जा रहा है, कई बार शिकायत की, इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

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पैसे लेते हैं पूरे, वाहन की सुरक्षा तक नहीं
रेलवे स्टेशन पर वाहन स्टेण्ड तो बना हुआ है, लेकिन उस पर टीन शैड तक नही हैं। जिससे स्टेण्ड पर खड़े होने वाले वाहनों की सुरक्षा जहां एक ओर खतरे में हैं, वहीं दूसरी ओर वाहनों को इस भीषण गर्मी में धूप से बचाने के लिए टीनशेड तक नहीं हैं। धूप की वजह से वाहनों का एक ओर जहां कलर उड़ रहा है वहीं वे पंचर भी अधिक हो रही हैं। इसके साथ ही किसी का वाहन चोरी चला जाए तो इसकी वापसी कराने के लिए न तो रेलवे तैयार है और न ही वाहन ठेकेदार।


ये है हाल तीसरी आंख का
केन्द्र सरकार की मंशा है कि हर रेलवे स्टेशन पर तीसरी आंख के रूप में सीसीटीवी कैमरे लगे हों, इसके लिए लगभग दो-ढाई साल पहले रेलवे ने गुना रेलवे स्टेशन पर लगभग 18 सीसीटीवी कैमरे लाखों रुपए की लागत से लगवाए गए थे। इसके पीछे उद्देश्य ये था कि रेलवे स्टेशन पर किसी भी तरह की घटना हो तो उससे जुड़े लोगों और आरोपियों को सीसीटीवी कैमरों की मदद से पुलिस उनको जल्द से जल्द चिन्हित कर सके।

क्वालिटी भी ठीक नहीं
इसी क्रम में जीआरपी पुलिस ने भी 8 कैमरे अलग से लगवाए थे। मजेदार बात ये है कि दो-ढाई साल के कार्यकाल में रेलवे स्टेशन पर लगी ये तीसरी आंख दो माह भी अपना काम नहीं कर पाई। कुल मिलाकर सीसीटीवी कैमरों की क्वालिटी भी ठीक नहीं है। बीते दो माह से यह कैमरे पूरी तरह बंद हो चुके हैं। इस बीच गुना रेलवे स्टेशन पर चोरी जैसी कुछ घटनाएं हुईं उनके आरोपी तीसरी आंख के बंद होने से पुलिस की पकड़ में आज तक नहीं आ पाए।


नाम की तीन खिड़की, काम होता है एक पर
रेलवे स्टेशन पर टिकट के लिए तीन खिड़की बनी हुई हैं, पूर्व में इन तीनों से टिकट मिलने की व्यवस्था थी, जिससे टिकट खिड़कियों पर भीड़ कम होती थी। मगर अब केवल एक ही खिड़की से टिकट मिल रहे हैं। जिससे यह स्थिति रहती है कि टिकट के लिए लगने वाली लाइन में लगे लोगों को जहां एक ओर टिकट भी नहीं मिल पाता है, इसी बीच उनकी ट्रेन भी निकल जाती है।

महिलाएं और पुरुषों की एक ही लाइन होने से महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। सबसे बड़ी परेशानी ये है कि टिकट खिड़की के पास कोई भी सुरक्षा बतौर पुलिस कर्मी मौजूद नहीं रहता है।

 

टिकट वेंडिंग मशीन भी बंद
गुना रेलवे स्टेशन पर टिकट के लिए होने वाली भीड़ को देखते हुए यहां दो टिकट वेङ्क्षडग मशीन लगाई गई थीं, उन पर भी टिकट मिलने की व्यवस्था भंग पड़ी हुई है। ये मशीन केवल रेलवे स्टेशन की शोभा बढ़ा रही हैं। इनके बंद होने की वजह पुन: ठेके पर प्रक्रिया न होना बताया जा रहा है।


स्टेशन पर सुरक्षा भी भगवान भरोसे
जीआरपी के एक अधिकारी के अनुसार हमारे पास सुरक्षा के लिए पूर्व से ही स्टॉफ कम है, इसके साथ-साथ सीसीटीवी कैमरे भी बंद हैं। इसका परिणाम ये है कि रात के समय बाहर से आने वाले असामाजिक तत्व रेलवे स्टेशन पर अपना डेरा डालते हैं और रात में छेडख़ानी, चोरी, या लूट जैसी घटनाओं को अंजाम देकर आरोपी भाग जाते हैं। उनकी शिनाख्त कैमरों के काम न करने की वजह से नहीं हो पा रही है।

सफाई व्यवस्था भी चरमराई
रेलवे स्टेशन पर सफाई व्यवस्था का आलम ये है कि प्लेटफार्म पर एक तो सफाई दिखाई देगी, लेकिन दो और तीन प्लेटफार्म पर सफाई नजर नही आती है। सफाई के लिए मशीन तो रेलवे स्टेशन के पास है लेकिन उससे सफाई केवल रेलवे अफसरों के आने पर ही होती है।


रेलवे स्टेशन पर सुविधाओं का विस्तार होना चाहिए। टिकट खिड़की एक होने से परेशानी बहुत हो रही है। यात्रियों को कम से कम यात्रियों को नि:शुल्क ठंडा पानी तो मिले।
अजय मोहन गर्ग, व्यापारी

 

स्टेशन पर सुरक्षा के लिए जो कैमरे लगाए गए थे, वे तत्काल चालू होना चाहिए। आरोपी घटनाएं कर भाग जाते हैं जो पुलिस को नहीं मिलते हैं। पूछताछ केंद्र पर जानकारी नहीं दी जाती।
पुष्पेन्द्र रघुवंशी, युवा

रेलवे स्टेशन पर महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग टिकट बिण्डो होना चाहिए। सुरक्षा और सुविधाओं का भी व्यापक इंतजाम हो। सफाई व्यवस्था में सुधार होना चाहिए।
संगीता श्रीवास्तव, गृहिणी

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