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इंटरनेट बंद था पर जुड़े थे इंसानियत के तार,तड़के 5 बजे पहुंच बचाई जान

14 अप्रैल को आंबेडकर जयंती होने के चलते शहर में जिला प्रशासन ने इंटरनेट बंद कर रखा था।
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ग्वालियर

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monu sahu

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Updated: 17 Apr 2018, 2:20 PM IST

Blood Donation

ग्वालियर। रक्तदान जीवनदान है। इस बात का अहसास हमें तब होता है जब हमारा कोई अपना खून के लिए जिंदगी और मौत के बीच जूझता है। हमारे द्वारा किया गया रक्तदान कई जिंदगियों को बचाता है। सबसे अच्छी बात यह है कि रक्त देने से जरूरत मंद लोगों को जीवन दान मिलता है, बल्कि रक्तदाता को स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त होते हैं। ऐसी ही एक नेक काम किया है हमारे शहर के एक युवक ने। जिसने तमाम समस्यओं के चलते भी एक किशोरी की जान बचाई है।

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निजी अस्पताल में भर्ती 17 वर्षीय किशोरी को तत्काल प्लेटलेट्स की जरूरत थी। इंटरनेट बंद होने से रक्तदाताओं से संपर्क मुश्किल हो रहा था। संदीप प्रधान को सुबह 5 बजे इसकी सूचना मिली तो वह तुरंत सक्रिय हुए और अस्पताल पहुंचकर प्लेटलेट्स दान की। संदीप अब तक 24 बार रक्तदान और तीन बार प्लेटलेट्स दे चुके हैं।

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छतरपुर निवासी अशोक भट्ट की १७ वर्षीय बेटी को बुखार आने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लगातार प्लेटलेट्स कम होती जा रही थीं। प्लेटलेट्स १.५० लाख से २० हजार पर पहुंच गई। पिता और रिश्तेदारों का ब्लड ग्रुप नहीं मिला,इस पर परिजनों की चिंता बढ़ गई। एेसे में संदीप प्रधान ने ऐन वक्त पर पहुंचकर प्लेटलेट्स देकर किशोरी की जान बचाई।

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किसी डोनर से नहीं हो पा रहा था संपर्क
14 अप्रैल को आंबेडकर जयंती होने के चलते शहर में जिला प्रशासन ने इंटरनेट बंद कर रखा था। इस कारण रक्तदान करने वाले डोनरों से संपर्क नहीं हो पा रहा था। रक्तदान महादान समिति से संदीप के पास फोन आया, जिस पर संदीप देरी किए बिना निजी अस्पताल के ब्लड बैंक पहुंच गए।