सूरत कोचिंग हादसे से सीखा सबक, ग्वालियर में आधा दर्जन कोचिंग सेंटर सील, सुरक्षा के इंतजाम नहीं

सूरत कोचिंग हादसे से सीखा सबक, ग्वालियर में आधा दर्जन कोचिंग सेंटर सील, सुरक्षा के इंतजाम नहीं

Gaurav Sen | Updated: 27 May 2019, 12:50:52 PM (IST) Gwalior, Gwalior, Madhya Pradesh, India

बिना फायर सिस्टम और सुरक्षा व्यवस्था के बच्चों का जीवन दांव पर......

ग्वालियर. सूरत में हुए हादसे के बाद प्रशासनिक टीम ने लगातार दूसरे दिन रविवार को निरीक्षण के बाद दो कोचिंग सेंटर सील कर दिए। दोनों जगह अग्निशमन यंत्र नहीं थे। बच्चों के लिए सामान्य सुरक्षा प्रबंध भी नहीं थे। प्रशासन ने शनिवार को इंदरगंज व अन्य क्षेत्रों की 6 कोचिंग को सील किया था।

लश्कर एसडीएम सीबी प्रसाद अपनी टीम के साथ चिटनिस की गोठ में पंजवानी बिल्डिंग में संचालित दो कोचिंग सेंटर- बादाम सर और मनीष सर पर पहुंचे। बेहद संकरी सीढिय़ों से जैसे-तैसे ऊपर पहुंच पाए। सीढिय़ों पर इतनी जगह नहीं थी कि आकस्मिक स्थिति में जल्दी-जल्दी उतरा जा सके। कोङ्क्षचग में अग्निशमन यंत्र नहीं मिले। किसी भी खतरे से बचाव के इंतजाम रखने में लापरवाही बरती जा रही थी। बच्चों को क्लास में बैठाने की व्यवस्था इस तरह थी कि अगर अचानक भगदड़ हो जाए तो बच्चों का घायल होना तय है। इस बदइंतजामी को लेकर एसडीएम ने सवाल जवाब किए तो कोचिंग संचालक संतोष जनक उत्तर नहीं दे सके। इसके बाद दोनों कोचिंग्स को सील कर दिया गया। इसके साथ ही तीन मंजिला भवन में दुर्घटना से बचाव के इंतजाम करने की चेतावनी भी सभी को दी है।

पिंजरा बन जाएगी कोचिंग
क्षेत्र के हजारों बच्चों को हर साल ज्ञान देने वाले इन शिक्षकों ने खुद अपने मेकओवर पर ध्यान नहीं दिया है। सिर्फ अपनी कमाई की खातिर बच्चों के जीवन पर दांव पर लगाकर क्लास चला रहे हैं। स्थिति यह है कि अगर कभी कोई आकस्मिक घटना हो जाए तो बिल्डिंग में चल रहीं कोचिंग बच्चों के लिए पिंजरा बनकर रह जाएंगी।

अभिभावक भी नहीं देखते इंतजाम
कार्रवाई के दौरान मौजूद अधिकारियों का कहना था कि कोचिंग दे रहे शिक्षक के नाम को देखकर अभिभावक अपने बच्चों को वहीं पढ़ाना चाहते हैं, जहां ज्यादा भीड़ दिख रही हो। जिस तरह के इंतजाम मिल रहे हैं, उसके हिसाब से लगता है कि कोई अभिभावक बच्चों की फीस जमा करने से पहले कोचिंग संचालक से यह नहीं पूछता है कि उनके यहां लाइफ सपोर्ट सिस्टम बेहतर है या नहीं।

शहर में कितने सेंटर, न निगम को पता, न प्रशासन को

सूरत में हादसे के बाद पूरे देश का ध्यान कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा इंतजामों पर है। सीएम के निर्देश पर सक्रिय हुए प्रशासनिक तंत्र ने शनिवार से ही निरीक्षण शुरू कर कोचिंग को सील करना शुरू किया है। फिर भी प्रशासन को बच्चों की सुरक्षा की कितनी चिंता है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर में कुल कितने कोचिंग सेंटर हैं और उनमें क्या सुरक्षा व्यवस्था है, इसकी कोई जानकारी निगम के पास नहीं है। अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर बचने की कोशिश कर रहे हैं।

एक चिंगारी से मच सकता है कोहराम

शहर में 1500 से अधिक छोटे-बड़े सेंटर हैं। इनमें से कुछ सेंटरों को छोड़ दें तो अधिकांश पर फायर सेफ्टी सिस्टम तो छोडि़ए अग्निशमन यंत्र तक नहीं हैं। कई सेंटर ऐसे हैं जिन्हें लकड़ी के जरिए पूरा कवर्ड किया गया है। यहां एक छोटी सी चिंगारी कोहराम मचा सकती है। फायर ब्रिगेड के नोडल अधिकारी केशव सिंह चौहान ने बताया कि कोचिंग सेंटरों को फायर एनओसी लेना अनिवार्य है। 2016 से एनओसी ऑनलाइन जारी की जाती है, इसलिए हमारे पास कोई रिकॉर्ड नहीं रहता है। दो साल पहले हमने एनओसी नहीं होने पर लोगों को नोटिस दिए थे।

ऑनलाइन लेनी होती है एनओसी

निगम सीमा में संचालित संस्थानों को फायर एनओसी लेना अनिवार्य है। अगर आग से निपटने के मानक पूरे नहीं होते तो फायर एनओसी नहीं मिल सकती है। 2016 तक निगम द्वारा परमिशन दी जाती थी, उसके बाद इसे ऑनलाइन कर दिया गया। अब भोपाल से ही एनओसी जारी की जाती है। ऐसे में लोग इसका फायदा उठाते हैं। यही कारण है कि शहर में संचालित अधिकांश कोचिंग सेंटरों ने फायर एनओसी नहीं ली है। दरअसल, फायर एनओसी के लिए भवन में फायर सेफ्टी सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट आदि का होना जरूरी है।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर हो रही कार्रवाई
बच्चों की सुरक्षा को लेकर हम कार्रवाई कर रहे हैं, रविवार को चिटनिस की गोठ क्षेत्र में स्थित तीन मंजिला पंजवानी बिल्डिंग में चेकिंग के लिए गए थे। काफी संख्या में यहां बच्चे पढऩे आते हैं, इसके बाद भी न तो फायर फायटिंग सिस्टम था, न ही सुरक्षा के लिए सावधानी बरती जा रही थी। कमियां सामने आने पर बादाम सर और मनीष सर के नाम से चल रही दो कोचिंग सील की गई हैं।
सीबी प्रसाद, एसडीएम-लश्कर

coaching center sealed by administration gwalior

कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा के इंतजाम नहीं

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कोचिंग आने जाने के संकरे रास्ते

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