खतरे के पेट्रोल पम्पों पर नियमों का पालन नहीं

पेट्रोल पंपों पर नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। करीब दो दर्जन से अधिक पेट्रोल पंप डेंजर जोन में संचालित हो रहे हैं। ऐसे पेट्रोल पंपों के सामने और कुछ ही दूरी पर बिजली के ट्रांसफार्मर लगे हुए हैं, साथ ही कई पेट्रोल पंपों के ऊपर से हाईटेंशन लाइन निकली हुई है, जिस कारण हर समय हादसों की आंशका बनी रहती है।

ग्वालियर. शहर में पेट्रोल पंपों पर नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। करीब दो दर्जन से अधिक पेट्रोल पंप डेंजर जोन में संचालित हो रहे हैं। ऐसे पेट्रोल पंपों के सामने और कुछ ही दूरी पर बिजली के ट्रांसफार्मर लगे हुए हैं, साथ ही कई पेट्रोल पंपों के ऊपर से हाईटेंशन लाइन निकली हुई है, जिस कारण हर समय हादसों की आंशका बनी रहती है। अहम बात यह है कि मुख्य मार्गों पर लगे बिजली के ट्रांसफार्मरों और ऊपर से निकली हाईटेंशन लाइन के बावजूद पेट्रोल पंप संचालित करने की परमिशन संबंधित विभाग द्वारा किस आधार पर दे दी जाती है। इसके अलावा इन पेट्रोल पंपों पर आगजनी जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के भी पर्याप्त इंतजाम नहीं मिलते हैं, इससे शहर के लोगों की सुरक्षा को खतरा बना हुआ है। ऐसे पेट्रोल पंप शहर के लिए हॉट इश्यू बनते जा रहे हैं।

इस संबंध में जब एक्सपोज रिपोर्टर द्वारा पेट्रोल पंपों की पड़ताल की गई तो पता चला कि शिंदे की छावनी क्षेत्र स्थित पेट्रोल पंप के समीप ही बिजली का ट्रांसफार्मर लगा हुआ है, जिसमें अक्सर लोड बढऩे पर आगजनी की घटना होने से चिंगारी निकलती रहती है। उधर हुरावली क्षेत्र में स्थित पेट्रोल पंप के ऊपर से हाईटेंशन लाइन निकली है, जिसके चलते इन पेट्रोल पंपों पर हर समय खतरा मंडराता रहता है। रेसकोर्स रोड स्थित पेट्रोल पंप के समीप लगे बिजली के ट्रांसफार्मर की दूरी महज 25 कदम है, इसके बावजूद यहां पर पेट्रोल पंप संचालित किया जा रहा है। इसके अलावा पेट्रोल पंप से कुछ दूरी पर ही वाहनों की रिपेयरिंग का भी काम किया जाता है।

इसी क्रम में भिण्ड रोड स्थित पेट्रोल पंप के हालात भी ऐसे ही हैं। ऐसे में भीड़ भरे इलाके में पेट्रोल पंप के संचालित होने के कारण हर समय हादसों की आशंका बनी रहती है। इस ओर न तो स्थानीय प्रशासन द्वारा ध्यान दिया जा रहा है, न ही संबंधित विभाग द्वारा इन पेट्रोल पंपों के संचालकों को नियमों का पालन करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

पेट्रोल पंपों पर जब भी भंडारण में ईंधन भरा जाता है तो उस दौरान सबसे अधिक खतरा होने की संभावना बनी रहती है, जिसको लेकर उक्त पेट्रोल पंपों पर वाहनों की आवाजाही तो बंद करा दी जाती है। क्योंकि ईंधन भरने के दौरान हवा में ईंधन के सूक्ष्म कण मिल जाते हैं, जो एक मामूली चिंगारी के कारण खतरा पैदा कर सकते हैं। इसी दौरान पेट्रोल पंपों के आस-पास लगे बिजली के असुरक्षित तार भी खतरे का कारण बन सकते हैं। क्योंकि बिजली के खंभों पर लगे एसएलडी बॉक्सों में आए दिन आगजनी की घटनाएं होने से चिंगारियां निकलकर सड़क पर आ जाती हंै।

शहर के कुछ मात्र ही पेट्रोप पंपों को छोड़कर अन्य पेट्रोल पंपों पर सुरक्षा संबंधी पुख्ता इंतजाम नहीं रहते हैं, यहां पर दिखावे के लिए फायर सिस्टम तो लगवाए जाते हैं, लेकिन इनकी एक्सपायरी निकलने के बाद उन्हें कई माह तक नहीं बदला जाता है। इसी के साथ ही पेट्रोल पंपों पर बजरी से भरकर रखी जाने वाली बाल्टियां भी खाली पड़ी रहती हैं। ऐसे में अगर भविष्य में आगजनी की घटना घटित हो जाए तो इस पर काबू पाने के लिए कोई इंतजाम नहीं मिलते हैं।

पेट्रोल पंपों के पास लगे ट्रांसफार्मरों के कारण रोजना ही परेशानी होती है। इस संबंध में बिजली कंपनी के अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन को भी अवगत करा दिया गया है। जहां तक सुरक्षा व्यवस्था की बात है तो हमें अपने स्तर पर ही करनी पड़ती है।
उदयवीर सिंह गुर्जर, अध्यक्ष, ग्वालियर पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन

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राजेश श्रीवास्तव Desk
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