48 हजार रुपए से भरा पर्स मिला, घर जाकर लौटाया

- आज भी जिंदा है ईमानदारी और मानवीयता

ग्वालियर. मानवीयता और ईमानदारी आज भी जिंदा है। इस बात का उदाहरण दिया है शहर में पढ़ाई कर रही पांच छात्राओं ने। इन छात्राओं को सडक़ पर हजारों रुपयों से भरा हुआ बटुआ (वॉलेट) मिला लेकिन फिर भी उनके मन किसी भी तरह का लालच नहीं आया और जिसका ये बटुआ था उसे ढूंढकर वापस कर दिया।
ये था मामला
कंपू स्थित निम्बालकर की गोठ नंबर दो पर बने आदित्यम गल्र्स हॉस्टल में रहने वालीं शैलजा मिश्रा, कविता, नैंसी, मानसी और दीपशिखा नेहरू पार्क में शाम के समय घूमने जाती हैं। 22 फरवरी को भी रोजाना की तरह घूमने गई थीं, घूमने के बाद यहां से निकलते समय एक लडक़ा मोटर साइकिल से जाता दिखाई दिया और उसकी जेब से एक बटुआ गिरा। इन पांचों स्टूडेंंट्स ने उस व्यक्ति को आवाज भी दी पर उसने नहीं सुना। बाद में बटुए को उठाने पर उसमें करीब 49 हजार रुपए, आधार कार्ड और अन्य जरूरी कागजात मिले। इसके बाद इन छात्राओं ने अपनी हॉस्टल वॉर्डन जान्हवी रोहिरा को फोन लगाकर इस पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद छात्राओं ने बटुए में मिले आधार कार्ड पर लिखे पते पर जाकर बटुए को दिया तो संबंधित परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। ये परिवार कंपू तिलक नगर निवासी अतेन्द्र सिंह भदौरिया का था और इनके बेटे राघवेन्द्र सिंह भदौरिया से ये बटुआ गिर गया था। अतेन्द्र के दूसरे बेटे जीतेन्द्र सिंह भदौरिया बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती हैं और ये रुपए उन्हीं के इलाज के लिए इकट्ठे किए गए थे। परिवार के सभी लोगों ने इन छात्राओं का शुक्रिया अदा किया।
27 को इन स्टूडेंट्स का सम्मान करूंगा
मेरे इलाज के लिए भाई ये 49 हजार रुपए लेकर जा रहा था और उसका बटुआ सडक़ पर कहीं गिर गया था। भला हो इन सभी छात्राओं का भला हो जिन्होंने ये बटुआ वापस करके हमारी मदद की। वाकई में आज भी ईमानदारी और इंसानियत दोनों ही जिंदा है। मैं 27 फरवरी को अस्पताल से घर जाउंगा और इन छात्राओं को सम्मानित करूंगा।
- जीतेन्द्र सिंह भदौरिया, निवासी तिलक नगर, कंपू

Narendra Kuiya Reporting
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