मोबाइल पर 12 से बढ़कर 18 फीसदी हो गया जीएसटी, बिल की आड़ में की जा रही धोखाधड़ी

विनय नगर निवासी शुभम माहेश्वरी को ऑनलाइन क्लास के लिए मोबाइल की जरूरत थी। 21 मई को उन्होंने एक ब्रांडेड कंपनी का मोबाइल खरीदा। मोबाइल के बॉक्स पर 7999 रुपए प्रिंट रेट थे

ग्वालियर. विनय नगर निवासी शुभम माहेश्वरी को ऑनलाइन क्लास के लिए मोबाइल की जरूरत थी। 21 मई को उन्होंने एक ब्रांडेड कंपनी का मोबाइल खरीदा। मोबाइल के बॉक्स पर 7999 रुपए प्रिंट रेट थे, जबकि दुकानदार ने उन्हें 8400 रुपए का बिल बनाकर दे दिया। मजे की बात ये थी कि इस बिल पर कहीं भी जीएसटी की दर भी अंकित नहीं थी।
ऐसा सिर्फ शुभम के साथ ही नहीं हुआ बल्कि लॉकडाउन और कोविड-19 की आड़ में ऐसा कई मोबाइल कारोबारी कर रहे हैं। मोबाइल खरीदने जा रहे ग्राहकों को खरीदारी के दौरान बताया जा रहा है कि एक अप्रेल से जीएसटी की दरें 12 से बढ़कर 18 फीसदी हो गई है, इसलिए दाम बढ़ गए हैं। वहीं मोबाइल का नया माल तो बाजार में आ ही नहीं रहा है, पुराने माल को ही ग्राहकों को बेचा जा रहा है।


बिलों पर नहीं दर्शाई जा रही जीएसटी
मोबाइल के साथ दिए जाने वाले बिल पर जीएसटी नहीं दशाई जा रही है। कंपोजिशन डीलर को छोड़कर बाकी सभी रजिस्टर्ड डीलरों को बिल पर जीएसटी की दर और जीएसटी की राशि अंकित करना अनिवार्य है। यदि कंपोजिशन डीलर है तो उसे बिल पर यह दर्शाना भी जरूरी है कि वह कंपोजिशन डीलर है।


एमआरपी से अधिक की वसूली
मोबाइल या किसी अन्य उत्पाद के डिब्बे पर दर्शाई गई एमआरपी (मेक्सिमम रिटेल प्राइज) से अधिक तो कोई भी दुकानदार या कारोबारी ग्राहक से रुपए वसूल नहीं कर सकता, जबकि कोविड-19 के चलते ऐसा ही किया जा रहा है और एमआरपी से अधिक दाम लेकर ग्राहकों को लूटा जा रहा है।


एक्सपर्ट व्यू
कोई भी रजिस्टर्ड व्यापारी (कंपोजिशन डीलर को छोड़कर) जो भी बिल जारी करता है उस बिल पर यदि अपने राज्य में माल बेच रहा है तो सीजीएसटी और एसजीएसटी वहीं अन्य राज्यों में बिक्री कर रहा है तो आईजीएसटी दर्शाना अनिवार्य है। साथ ही उसे जीएसटी की दर भी दर्शाना जरूरी है कि किस दर से जीएसटी ग्राहक से वसूला गया है। ऐसा न करने पर पेनल्टी के प्रावधान हैं।
अनिल अग्रवाल, जीएसटी सलाहकार

रिज़वान खान Desk
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