आयकर विभाग ने पुराने मामलों को लेकर करदाताओं को थमाए नोटिस

- 28 मार्च से नोटिस देने की हुई शुरूआत, इस महीने भी जारी रहेगी
- आयकर विभाग के तीन कर निर्धारण वर्ष 2015-16, 2016-17 के मामलों में करदाताओं को भेजे गए हैं नोटिस, एक महीने में करदाता को प्रस्तुत करना है जवाब

By: Narendra Kuiya

Published: 05 Apr 2021, 09:49 AM IST

ग्वालियर. आयकर विभाग ने करीब एक हजार से अधिक पुराने कर निर्धारण केस की फाइल फिर से खोल दी है। आयकर विभाग की ओर से 28 मार्च से ग्वालियर कमिश्नरेट के करीब एक हजार से अधिक करदाताओं को इस तरह के नोटिस थमाना शुरू किया गया है। ये नोटिस पुराने रिटर्न के आधार पर दिए गए हैं। यानी वित्त वर्ष 2013-14 से वित्त वर्ष 2017-18 में घोषित आय कर संदेहास्पद मानते हुए करदाताओं से जवाब मांगा गया है। मार्च माह के आखरी समय में आयकर विभाग की ओर से नोटिस तो जारी कर दिए गए लेकिन विभाग का पोर्टल ठप होने के कारण अधिकांश करदाता इसका जवाब प्रस्तुत नहीं कर सके हैं। नोटिस का जवाब 30 दिन के भीतर पेश करना अनिवार्य है। वरना आयकर विभाग एक पक्षीय कार्रवाई कर सकता है। अप्रैल माह में भी करदाताओं को इस तरह के नोटिस दिए जाएंगे।

ऐसे करें निपटारा
ऐसे करदाताजो रिवाइज रिटर्न और आय का मिलान ठीक से नहीं कर पाए हैं तो उन्हें ऑनलाइन पोर्टल को खोलकर अपने लॉगइन में जाकर कंपलाइंस पोर्टल पर लॉगइन करना होगा। इसमें इ-कैंपेन पर क्लिक करें। इसमें करदाता की आय की पूरी जानकारी मिल जाएगी, इसे अपनी जानकारी से मिलान करके अतिरिक्त टैक्स जमा कर दें। इसे मिलान करके ऑनलाइन जवाब दाखिल कर दें, जिससे आयकर की ओर से करदाता पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।

इन्हें दिए हैं नोटिस
आयकर अधिनियम की धारा 148 के तहत ऐसे सभी मामलों में विभाग ने करदाताओं को नोटिस जारी किए हैं। विभाग ने ये नोटिस ऐसे सभी करदाताओं को जारी किए हैं जिन पर संदेह है उन्होंने अपनी वास्तविक आय छुपाते हुए कम आय घोषित की है। या कर चोरी की है। जारी किए नोटिस ऐसे लोगों को पहुंचाए गए हैं, जिनके खातों में 10 लाख रुपए या ज्यादा जमा है और या तो उन्होंने रिटर्न दाखिल नहीं किया या फिर रिटर्न में इस पैसे को घोषित नहीं किया।

समय रहते जवाब प्रस्तुत करें
आयकर विभाग की ओर से 28 मार्च से शहर के करदाताओं को इस तरह के नोटिस जारी किए गए हैं। आखरी दिनों में पोर्टल रूक-रूककर चलने के कारण कई लोग अभी अपना जवाब प्रस्तुत नहीं कर पाए हैं। ऐसे करदाताओं को समय रहते अपने रिटर्न रिवाइज करके जवाब प्रस्तुत कर देना चाहिए। यदि करदाता जवाब नहीं देता है तो आयकर विभाग करदाता पर आयकर जमा करने की रिकवरी जितनी पेनल्टी लगा सकता है और ब्याज भी आरोपित कर सकता है।
- अभिषेक गुप्ता, सीए

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