चंबल से पानी लाने सीएम पेयजल योजना में शामिल कराने भेजा प्रस्ताव

चंबल से पानी लाने सीएम पेयजल योजना में शामिल कराने भेजा प्रस्ताव

Rizwan Khan | Publish: Sep, 03 2018 06:53:49 PM (IST) Gwalior, Madhya Pradesh, India

चंबल से पानी लाने की योजना को मुख्यमंत्री पेयजल योजना में शामिल कराने के लिए नगर निगम ने राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा है, इस पर

ग्वालियर. चंबल से पानी लाने की योजना को मुख्यमंत्री पेयजल योजना में शामिल कराने के लिए नगर निगम ने राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा है, इस पर कैबिनेट की बैठक में निर्णय होगा। अगर प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है तो योजना के लिए एनसीआर बोर्ड से लिया जाने वाला लोन सरकार चुकाएगी, जिससे नगर निगम कर्ज के बोझ से बच जाएगा और शहर की जनता पर भी अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा। अफसरों की मानें तो मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा इस पर सकारात्मक राय व्यक्त की गई है।
2050 तक शहर को जलापूर्ति के लिए चंबल से 150 एमएलडी पानी लाने के लिए चंबल टू तिघरा पाइप लाइन डालने की योजना तैयार की गई है, जिसका खर्च करीब 398.45 करोड़ रुपए आएगा। इसके लिए एनसीआर बोर्ड ने 75 प्रतिशत राशि करीब 298.84 करोड़ रुपए नगर निगम को कर्ज के रूप में देने की स्वीकृति प्रदान की है,लेकिन नगर निगम की खुद की माली हालत ठीक नहीं है, ऐसे में उक्त कर्ज को चुका पाना निगम के लिए काफी मुश्किल होगा, इसलिए उक्त राशि की पूर्ति के लिए शहर की जनता को महंगा पानी बेचने की योजना बना दी गई। अब निगम ने अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं और राज्य शासन से उक्त कर्ज की पूर्ति करने की मांग की है।

पानी बिल 500 रुपए प्रतिमाह करने की बना रहा था योजना
शहर पर भारी भरकम कर्ज लादकर चंबल से पानी लाने की योजना के लिए भाजपा नेताओं ने कर्ज दिलाने पर ही श्रेय लेना शुरू कर दिया था। इस मामले पर पत्रिका द्वारा 14 और 15 जुलाई को प्रमुखता से खबरें प्रकाशित की गई थीं, जिसमें बताया गया था कि निगम कैसे कर्ज की पूर्ति के लिए पानी के बिल को 150 रुपए प्रतिमाह से 500 रुपए प्रतिमाह करने की योजना बना रही है। पत्रिका की खबर से जहां सत्ताधारी नेता हरकत में आए, वहीं निगम अफसरों ने भी उक्त लोन को राज्य शासन से चुकाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए। अधीक्षण यंत्री आरएलएस मौर्य ने 24 अगस्त को भोपाल में अफसरों से इसके लिए बात की।


पैसों का हिसाब
योजना- 398.45 करोड़ रुपए की है।
एनसीआर का कर्ज- 298.84 करोड़ रुपए, योजना की ७५ प्रतिशत राशि।
कुल 25 प्रतिशत राशि करीब 99.61 करोड़ रुपए राज्य शासन मुहैया कराएगा।
298.84 करोड़ रुपए निगम को करीब 7 प्रतिशत की ब्याज दर से चुकाने होंगे

अब क्या
निगम ने राज्य शासन को पत्र भेजकर मांग की है कि चंबल टू तिघरा वाटर लाइन योजना को मुख्यमंत्री शहर पेयजल योजना में शामिल किया जाए।
प्रस्ताव को कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। इसे पास कराने नगरीय प्रशासन मंत्री माया सिंह, उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया, ऊर्जा मंत्री नारायण सिंह कुशवाह के साथ केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर प्रयास करें तो शहर को कर्ज से बचाया जा सकता है।

पानी की जरूरत है
2050 तक शहर की पूर्ति के लिए 150 एमएलडी पानी की अतिरिक्त आवश्यकता है, इसके लिए शासन को योजना बनाकर भेजी गई है। अगर निगम को कर्ज चुकाना पड़ा तो हमें इसकी पूर्ति पानी के बिलों में वृद्धि करके करना होगी।
आरएलएस मौर्य, अधीक्षण यंत्री पीएचई नगर निगम

निगम पर पहले से ही कर्ज
निगम पर पहले से ही काफी कर्ज है। ऐसे में चंबल योजना के लिए कर्ज की पूर्ति करना आसान नहीं होगा, इसके लिए निगम की सेवाओं पर टैक्स बढ़ाने पड़ेंगे। शासन से मांग की है कि योजना को मुख्यमंत्री पेयजल योजना में शामिल किया जाए।
विनोद शर्मा, आयुक्त नगर निगम

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