आरजेआईटी के स्टूडेंट का आइडिया

आरजेआईटी के स्टूडेंट का आइडिया

Harish kushwah | Publish: May, 17 2019 08:21:51 PM (IST) Gwalior, Gwalior, Madhya Pradesh, India

बच्चों के बीच यूज होने वाली पेंसिल को बनाने के लिए हर साल देश में 80 हजार से अधिक पेड़ काटे जाते हैं। इससे इन्वॉयर्नमेंट अनबैलेंस हो रहा है। आज जरूरत है पेड़ लगाने की, जबकि पेंसिल पेड़ काटने का कारण बन रही हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए शहर के एंटरप्रेन्योर ने एक ऐसी पेंसिल बनाई है, जिसमे लकड़ी का इस्तेमाल नही होता।

ग्वालियर. बच्चों के बीच यूज होने वाली पेंसिल को बनाने के लिए हर साल देश में 80 हजार से अधिक पेड़ काटे जाते हैं। इससे इन्वॉयर्नमेंट अनबैलेंस हो रहा है। आज जरूरत है पेड़ लगाने की, जबकि पेंसिल पेड़ काटने का कारण बन रही हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए शहर के एंटरप्रेन्योर ने एक ऐसी पेंसिल बनाई है, जिसमे लकड़ी का इस्तेमाल नही होता। ये पेंसिल अखबार से बनाई जाती है। इसके लिए उन्होंने कर इसके फायदे नुकसान के बारे में जाना। इसके बाद ही इन पेंसिल को तैयार किया। यह पेंसिल तैयार करने वाले आरजेआईटी से पढ़ाई कर रहे फलित गोयल हैं, जो सिटी सेंटर में रहते हैं।

पेपर पहले से होते हैं रीसाइकल्ड

आप एक बार यह जरूर सोचेंगे कि पेपर भी तो पेड़ से ही बनते हैं। परंतु अखबार में इस्तेमाल हुआ पेपर पहले से ही रीसाइकल्ड होता है और इसे अपसाइकल कर पेंसिल में बदला जा रहा है। इससे पेड़ों के साथ-साथ कई गैलन पानी की भी बचत होती है। जो कि उस पेपर को रीसायकल करने में इस्तेमाल होता है।

ये रहता है प्रोसेस

सबसे पहले पेपर को गीला करते हैं। दूसरी तरफ पेंसिल लीड को सावधानी से पेपर के बीच रखकर उसे कुछ खास बाइंडर से पेपर के साथ मजबूती से जोड़ा जाता है और फि र पेपर को बारीकी से इस पर रोल किया जाता है। तैयार पेंसिल साधारण लकड़ी वाली पेंसिल से हल्की होती है, जिससे बच्चों को लिखने में आसानी होती है। इसके साथ-साथ यह पेंसिल लकड़ी वाली पेंसिल जितनी ही मजबूत होती है।

बच्चों को दे रहे सेव ट्री का मैसेज

तूलिका रीसाइकल्ड न्यूजपेपर पेंसिल्स के माध्यम से फ लित बच्चों में पर्यावरण की रक्षा का संदेश देना चाहते हैं। उनका मानना है कि केवल बच्चे ही हमारे एन्वॉयर्नमेंट को बचा सकते है। फलित के इस स्टार्टअप की गिनती ग्वालियर के सक्सेसफुल स्टार्टअप्स में हो रही है।

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