भू और शिक्षा माफिया पर शिकंजा... अब प्रशासन बड़ी कार्रवाई की तैयारी में

आवासीय क्षेत्र विकसित करने के लिए पंजीयन कराने वाली 305 गृह निर्माण संस्थाओं में से 165 सक्रिय संस्थाओं ने प्लॉट आवंटन किए हैं। 15 दिन से चल रही इनकी जांच के बाद 35 बड़ी संस्थाओं में ज्यादा गड़बड़ी होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इस पर प्रशासन ने जल्द बड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं...

ग्वालियर. आवासीय क्षेत्र विकसित करने के लिए पंजीयन कराने वाली 305 गृह निर्माण संस्थाओं में से 165 सक्रिय संस्थाओं ने प्लॉट आवंटन किए हैं। 15 दिन से चल रही इनकी जांच के बाद 35 बड़ी संस्थाओं में ज्यादा गड़बड़ी होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इस पर प्रशासन ने जल्द बड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। अपर कलेक्टर रिंकेश वैश्य ने बताया कि जिन समितियों की जांच में कमियां सामने आ रही हैं, उन पर एफआइआर कराई जा रही है। वर्तमान में 35 समितियों के दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं।
इनकी जांच पूरी
- सहकारिता विभाग ने कुंदन गृह निर्माण समिति, यश विहार गृह निर्माण समिति, उन्नति गृह निर्माण समिति, राजस्व कर्मचारी गृह निर्माण समिति, अशोक गृह निर्माण समिति, राष्ट्रीय आदर्श गृह निर्माण समिति, विद्युत गृह निर्माण समिति की जांच पूरी कर ली है। इनके प्रकरण सहकारिता अधिनियम की धारा 72 डी के अंतर्गत सहकारिता न्यायालय में जाएंगे।
- अभी तक 11 संस्थाओं पर एफआइआर कराई जा चुकी है।

खंगाले जा रहे दस्तावेज
सहकारिता विभाग में पंजीकृत 35 गृह निर्माण समितियों के दस्तावेज और ऑडिट आदि में कमियांं सामने आई हैं। इन समितियों द्वारा किए गए प्लॉट आवंटन, सदस्यों के चयन और आवंटन की प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। अब इनके दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जमीनों को लेकर कुछ बड़ी समितियों का गोलमाल सामने आ सकता है।


एडीएम ने लिखा पत्र
श्यामा गृह निर्माण समिति, नवग्रह गृह निर्माण समिति और कुंदन गृह निर्माण समिति पर कार्रवाई के लिए जीडीए सीईओ को अपर कलेक्टर रिंकेश वैश्य ने पत्र लिखा है।

26 को शिविर, प्लॉट आवंटन के साथ निपटेंगी शिकायतें
मुहिम से आमजन को जोडऩे के लिए 26 फरवरी को कलेक्ट्रेट के जनसुनवाई हॉल में सुबह 11 बजे शिविर का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें समितियों के माध्यम से सदस्यों को ईडब्ल्यूएस भूखंडों का वितरण भी कराया जाएगा। प्लॉट आवंटन के साथ खरीदने के लिए बैंक लोन और राजस्व संबंधित प्रकरणों का निराकरण भी किया जाएगा। शिविर में जीडीए, गृह निर्माण समितियां और किसान संबंधी त्रिपक्षीय अनुबंधों का निराकरण भी कराया जाएगा। शिविर में जीडीए, नगर निगम और टीएंडसीपी से संबंधित शिकायतों और प्रकरणों का निराकरण भी किया जाएगा। जो लोग गृह निर्माण समिति, प्राइवेट बिल्डर से परेशान हैं वे भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।


जल्द होगी बड़ी कार्रवाई
कुछ दिन में जमीनों को खुर्द बुर्द करने वालों की जांच पूरी होने के साथ ही कुछ बड़ी कार्रवाई की जाएंगी।
अनुराग चौधरी, कलेक्टर

कहीं छात्र नहीं थे, कहीं संसाधनों की खानापूर्ति, आज जारी होंगे नोटिस

ग्वालियर. शिक्षा में डिप्लोमा देने वाले जिले के 81 निजी कॉलेजों की जांच में कई कमियां सामने आई हैं। तीन-तीन अधिकारियों के दलों द्वारा किए गए निरीक्षण में सामने आया है कि किसी कॉलेज में छात्र ही नहीं थे, और किसी में संसाधनों के नाम पर खानापूर्ति की जा रही थी। इन कॉलेजों को बुधवार को कारण बताओ नोटिस जारी होंगे।
दरअसल, सीएम ने शिक्षा माफिया पर अंकुश लगाने के लिए कलेक्टर को निर्देश दिए थे। इसके बाद कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी विकास जोशी ने जांच की जिम्मेदारी डाइट की प्राचार्य साधना द्विवेदी को सौंपी थी। कॉलेजों की जांच के लिए कार्यपालिक मजिस्ट्रेट सहित शिक्षा विभाग के दो अन्य अधिकारियों को शामिल कर अलग-अलग दल बनाए थे। प्रत्येक दल को सात से आठ कॉलेजों की जांच करनी थी। जांच के लिए अधिकारियों का दल पहुंचा तो लगभग हर कॉलेज में कमियां सामने आईं। इसकी जानकारी कलेक्टर तक पहुंची तो उन्होंने सभी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश डीईओ को दिए हैं।

इस तरह हुई जांच
- जांच दल में तहसीलदार या नायब तहसीलदार स्तर के अधिकारी को अगुवाई का जिम्मा दिया गया था। इनके साथ एक प्राचार्य और एक बीएसी या बीआरसी को शामिल किया गया था।
- डीईओ ने सभी दलों को 82 कॉलेजों की लिस्ट दी थी, इसमें से एक कॉलेज सरकारी होने से जांच से हटा दिया गया।
- प्रत्येक दल ने कॉलेज में संसाधन, छात्र संख्या, क्लासरूम, पेयजल, बिजली व्यवस्था, प्रैक्टिकल सुविधा सहित अन्य बिंदुओं के आधार पर जांच की थी।


यह मिला दलों को
- निरीक्षण करने गए दलों को कई कॉलेज बंद मिले।
- रिकॉर्ड परीक्षण करने पर पाया गया कि सिर्फ दस्तावेजों में ही छात्रों की संख्या दर्ज है।
- अधिकतर कॉलेजों में छात्र नहीं मिले।
- कॉलेज संचालकों से पूछताछ हुई तो अधिकतर संचालकों ने विंटर वेकेशन और लोहड़ी अवकाश की वजह से संख्या कम होना बताया है।

रिज़वान खान Desk
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