एक बेटी पहले से थी, एक और गोद लेकर समाज में पेश की मिसाल

उन्होंने यह प्रण किया था कि वे सिर्फ दो बच्चों का पालन पोषण करके उनके जीवन को बेहतर बनाएंगे। पहला बच्चा उनका होगा और दूसरा बच्चा...

ग्वालियर. उन्होंने यह प्रण किया था कि वे सिर्फ दो बच्चों का पालन पोषण करके उनके जीवन को बेहतर बनाएंगे। पहला बच्चा उनका होगा और दूसरा बच्चा वे गोद लेंगे। करीब 9 वर्ष पहले दंपती को एक बेटी हुई और फिर उन्होंने उसे बड़ा किया। जब बच्ची बड़ी हो गई तो उन्होंने अपने प्रण को पूरा करने के लिए कारा की बेवसाइट पर एक बेटी को गोद लेने के लिए आवेदन दिया था।
पौने तीन वर्ष पहले किए गए आवेदन के बाद कारा से अप्रूवल मिलने के बाद इस दंपती ने ग्वालियर आकर तीन वर्षीय बच्ची को गोद लेने की कानूनी औपचारिकताएं पूरी की हैं। यह मिसाल पेश की है, महाराष्ट्र के एक इंजीनियर दंपती ने। दंपती का वार्षिक पैकेज करीब 50 लाख रुपए है। इंजीनियरिंग के पेशे में अच्छी खासी इनकम वाले इस दंपनी ने विवाह के समय ही यह शपथ ली थी, पहली संतान चाहे बेटा हो या बेटी लेकिन दूसरी संतार वे बेटी को ही गोद लेंगे। सहायक संचालक शालीन शर्मा ने बताया कि कारा की बेवसाइट पर आवेदन के बाद दंपती को अप्रूवल मिला था। इसके बाद सभी वैधानिक औपचारिकताएं पूरी करके मातृछाया बाल ग्रह में बच्ची के दत्तकग्रहण की प्रक्रिया पूरी की गई है।

तय समय सीमा के बाद हुआ दत्तकग्रहण
सीडब्ल्यूसी द्वारा लीगल फ्री करने के बाद विभागीय अधिकारियों ने नियमानुसार 60 से 120 दिन के इंतजार के नियम को पूरा किया। इसके साथ ही मातापिता की खोज के लिए विज्ञापन भी दिया गया था। इसी दौरान कारा से भी अप्रूवल आ गया। अप्रूवल मिलने के बाद इंजीनियर दंपती ने बच्ची को गोद लेने के लिए प्रक्रिया पूरी की। सोमवार को यह बच्ची अपने भावी माता पिता के साथ चली गई।

पिछले वर्ष मिली थी बच्ची
अक्टूबर 2020 में चाइल्ड लाइन के सदस्यों को शहर के एक चौराहे पर अकेली बच्ची मिली थी। 3 वर्ष से भी कम उम्र की इस बच्ची को चाइल्डलाइन ने महिला बाल विकास को सौंपा था। विभाग ने बच्ची के माता-पिता को खोजने के लिए भरपूर प्रयास किया था। इसके बाद सीडब्ल्यूसी ने जनवरी में बच्ची को बाल गृह में रखने का आदेश दिया था।

रिज़वान खान Desk
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