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Water harvesting पांच साल से नहीं हुई हार्वेस्टिंग; जलसंकट के हालात बने तो सरकारी और निजी भवनों का शुरू किया सर्वे

पानी का मोल पहचानो, जल है तो कल है, जल ही जीवन, जैसे संदेश देकर लोगों को जागरूक करने वाले नगर निगम अफसरों की मनमानी से पांच साल से शहर...

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water harvesting पानी का मोल पहचानो, जल है तो कल है, जल ही जीवन, जैसे संदेश देकर लोगों को जागरूक करने वाले नगर निगम अफसरों की मनमानी से पांच साल से शहर

water harvesting

water harvesting . पानी का मोल पहचानो, जल है तो कल है, जल ही जीवन, जैसे संदेश देकर लोगों को जागरूक करने वाले नगर निगम अफसरों की मनमानी से पांच साल से शहर में कहीं भी वाटर हार्वेस्टिंग नहीं हुई है। इससे शहर का वाटर लेवल नीचे चला गया है और ग्वालियर सेमी क्रिटिकल जोन में पहुंच गया है। इससे शहर में जलसंकट के हालत बन गए तब निगम ने शहर के सभी शासकीय व प्राइवेट इमारतों में वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य कर दी। इसके लिए क्षेत्रीय अधिकारी व भवन अधिकारियों ने भौतिक सत्यापन गुरुवार से शुरू कर दिया है।

बारिश के सीजन में वाटर हार्वेस्टिंग से करोडों लीटर पानी बर्बाद होने से बचाया जा सकेगा। निगम के जिम्मेदार अफसर यदि पहले जाग गए होते तो अब तक करोड़ों लीटर पानी बर्बाद नहीं होता। नगर निगम द्वारा कराया जा रहा सर्वे 20 दिन तक चलेगा। गुरुवार को करीब 25 स्थानों पर सत्यापन किया गया, इस दौरान अधिकतर वाटर हार्वेस्टिंग बंद मिली, जो चालू थीं उनमें काफी गंदगी जमा थी। निगम द्वारा इनकी सफाई कराकर बारिश से पूर्व इन्हें चालू कराया जाएगा।

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अभी भी निगम के पास कोई ठोस प्लान नहीं

15 लाख की आबादी वाले शहर में 3 लाख 19 हजार संपत्तियां हैं। लेकिन बारिश के पानी को सहेजने के लिए नगर निगम कोई ठोस प्लान नहीं बना पाया है। पांच साल में कहीं भी वाटर हार्वेस्टिंग नहीं कराई गई है। जबकि पूर्व में 1000 ही वाटर हार्वेस्टिंग शहर में हुई हैं। इससे बारिश का करोड़ों लीटर पानी व्यर्थ बहकर नदी-नालों में चला गया। जबकि इसे बचाकर हम जल स्तर बढ़ा सकते थे और आने वाले समय में पानी के संकट को कम कर सकते थे। हालांकि अभी भी समय है कि वाटर हार्वेस्टिंग में तेजी लाई जाए और उन्हें जल्द चालू कराया जाए।

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चार करोड़ जमा फिर भी सिस्टम नहीं लगाया

भवन अनुज्ञा के साथ सिस्टम लगाना अनिवार्य किया गया है। भवन अनुज्ञा शुल्क में वाटर हार्वेस्टिंग का शुल्क भी लिया जाता है। यह राशि रिफंडेबल होती है, यानी सिस्टम लगवाने के बाद निगम को सर्टिफिकेट देने पर शुल्क मिल सकता है। लेकिन अनुमति लेने के बाद न लोगों ने रुचि दिखाई और न ही भवन शाखा के जिम्मेदार अफसरों ने। इससे चलते बीते पांच साल से शहर में कहीं भी वाटर हार्वेस्टिंग नहीं हुई। इसके करीब चार करोड़ रुपए निगम के पास जमा हैं।

वाटर हार्वेस्टिंग नहीं होने के लिए ये जिम्मेदार

वाटर हार्वेस्टिंग नहीं होने के लिए सिटी प्लानर पवन ङ्क्षसघल, सहायक सिटी प्लानर प्रदीप जादौन, भवन अधिकारी राजीव सोनी, यशवंत मैकले, पवन शर्मा, वीरेंद्र शाक्य सहित सभी 25 क्षेत्रीय अधिकारी जिम्मेदार हैं। यह लोग तत्परता दिखाते तो शहर में वाटर हार्वेस्टिंग हो सकती थी।

यहां किया गया सर्वे

नगर निगम द्वारा वर्षा के जल को सहेजने एवं जल संरक्षण के उद्देश्य को लेकर शहर के भवनों में रैन वाटर हार्वेस्टिंग का सर्वेक्षण भवन अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है। गुरुवार को गजरा राजा स्कूल, सिरोल रोड, गोकुल धाम कॉलोनी, नेचर पार्क कॉलोनी, रेशम तारा, बिजली कंपनी कार्यालय मोतीझील, गिरगांव-बेहटा शासकीय स्कूल सहित करीब 25 स्थानों पर वाटर हार्वेस्टिंग का निरीक्षण किया गया। अधिकतर स्थानों पर वाटर हार्वेस्टिंग नहीं मिली, जहां मिली उनमें गंदगी भरी थी। अब इन भवनों व संस्थानों को चिह्नित कर बारिश से पूर्व यहां वाटर हार्वेस्टिंग को चालू कराया जाएगा, जिससे बारिश का पानी सीधे छतों से हार्वेस्टिंग में जा सके।

एक्सपर्ट व्यू : हार्वेस्टिंग के जरिए पानी के संकट से बचा जा सकता है

वर्षा जल को संरक्षित करने का सबसे आसान तरीका वाटर हार्वेङ्क्षस्टग और रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम हैं। इसकी मदद से बारिश के पानी को जमीन में और मकान की छत के पानी को छत से जमीन के अंदर उतारा जा सकता है। आमजन में इस बात को लेकर जागरूकता की कमी है। ग्वालियर में अभी भी समय रहते कुएं-बावड़ी को रिचार्ज कर लिया जाए व उन पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा दिया जाए तो पानी के संकट से आसानी से निपटा जा सकता है। वाटर हार्वेस्टिंग नहीं होने से पांच साल में करोड़ों लीटर पानी बर्बाद हो गया है। हमें जल के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
प्रो. सुयश कुमार, विभागाध्यक्ष भू विज्ञान विभाग एवं भूजल विशेषज्ञ, साइंस कॉलेज ग्वालियर

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