सौ साल में पहली बार नवरात्र के दिनों में श्रद्धालु मां भद्रकाली के नहीं कर पाएंगे दर्शन

सौ साल में पहली बार नवरात्र के दिनों में श्रद्धालु मां भद्रकाली के नहीं कर पाए दर्शन
- मेले के लिए आ गए थे झूले, अब लॉक डाउन के खत्म होने का इंतजार कर रहे झूला संचालक

हनुमानगढ़. नवरात्र के दिनों में भद्रकाली मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगता था। वहीं अब मंदिर परिसर में सुबह सवा छह बजे आरती के समय ही कपाट खुलते हैं। आरती में पुजारी समेत केवल पांच व्यक्ति ही मंदिर के मुख्य द्वार में प्रवेश कर सकते हैं। इसके पश्चात कपाट को बंद कर मंदिर के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया जाता है।

सौ साल में पहली बार नवरात्र के दिनों में श्रद्धालु मां भद्रकाली के नहीं कर पाए दर्शन
- मेले के लिए आ गए थे झूले, अब लॉक डाउन के खत्म होने का इंतजार कर रहे झूला संचालक

हनुमानगढ़. नवरात्र के दिनों में भद्रकाली मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगता था। वहीं अब मंदिर परिसर में सुबह सवा छह बजे आरती के समय ही कपाट खुलते हैं। आरती में पुजारी समेत केवल पांच व्यक्ति ही मंदिर के मुख्य द्वार में प्रवेश कर सकते हैं। इसके पश्चात कपाट को बंद कर मंदिर के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया जाता है। देवस्थान विभाग के आदेशानुसार 19 मार्च को ही मंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था। कोरोना वायरस के बचाव के चलते सौ साल में ऐसा पहली बार हुआ जब नवरात्र के दिनों मंदिर परिसर में सन्नाटा रहा हो। प्रसाद वितरण की दुकानें सुनसान हैं और मंदिर परिसर के मुख्य द्वार पर देवस्थान विभाग का नोटिस चस्पा हुआ है।

यह है नजारा
आमतौर पर नवरात्र के दौरान जंक्शन व टाउन के भद्रकाली मार्ग पर काफी चहल पहल रहती है। श्रद्धालु ऑटो से, दोपहिया, चौपहिया या फिर पैदल जाते हुए दिखाई देते थे। लेकिन इस बार पूरा मार्ग ही सुनसान है। मुख्य मेले के दिन एक लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन करते हैं और नौ दिन के मेले के दौरान अनुमानित ढाई लाख श्रद्धालु मंदिर में माथा टेकने आते हैं। इस बार भद्रकाली में मेला 25 मार्च से दो अप्रेल तक लगना था।

Anurag thareja Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned