
बढ़े तापमान ने बिगाड़ा कपास की खेती का गणित, जिला प्रशासन अब तैयार कर रहा खराबे की रिपोर्ट
इस बार उत्पादन में काफी गिरावट आने की आशंका
हनुमानगढ़. चालू खरीफ सीजन में इस समय बढ़े तापमान ने कपास की खेती का गणित बिगाड़ कर रख दिया है। वर्तमान में स्थिति यह है कि गत वर्षों की तुलना में इस बार दस से बीस प्रतिशत कम उत्पादन होने की बात कृषि अधिकारी कह रहे हैं। हालांकि खरीफ २०२० में फसल खराबे को लेकर अब जिला प्रशासन ने गिरदावरी रिपोर्ट तैयार करने का काम शुरू कर दिया है।
यह रिपोर्ट १५ अक्टूबर तक तैयार होने की उम्मीद है। हनुमानगढ़ एसडीएम कपिल यादव की ओर से जारी निर्देश में बताया गया है कि विभिन्न कारणों से क्षेत्र में फसल को नुकसान हुआ है। इसलिए उन्होंने संबंधित विभाग के कार्मिकों और किसानों से गिरदावरी के निर्धारित समय में खराबे की सूचना दर्ज करवाने का आग्रह किया है। ताकि समय पर फसल खराबे की रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भिजवाया जा सके।
गौरतलब है कि कपास उत्पादन के लिहाज से हनुमानगढ़ जिला प्रदेश में हमेशा से अव्वल रहा है। औसत उत्पादन काफी अच्छा रहने से किसान इसकी खेती के प्रति लगातार रुझान दिखा रहे हैं। लेकिन इस बार सितम्बर के महीने में भी तेज गर्मी पडऩे के कारण कपास की फसल में टिंड्डे बनने व उनके पकने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इसके कारण इस बार औसत उत्पादन का ग्राफ नीचे गिर सकता है। कृषि विभाग के उप निदेशक दानाराम गोदारा के अनुसार कपास की खेती के मामले में इस बार मौसम ने साथ नहीं दिया है।
इससे इसकी खेती प्रभावित हो सकती है। लेकिन हम अपने स्तर पर किसानों को विपरीत मौसम में फसलों को कैसे बचाया जा सकता है, इसके बारे में जागरूक कर रहे हैं। तकनीकी जानकारी को किसान अपना भी रहे हैं। उन्होंने बताया कि खराबे का मूल्यांकन करने के लिए जिला प्रशासन की टीम जुट गई है। समय पर वस्तुस्थिति की रिपोर्ट बनाकर हम भी सरकार को अवगत करवाएंगे।
टीम ने दी सलाह
कृषि अधिकारियों के अनुसार इस बार कपास की फसल को शॉट मारने की सूचनाएं आ रही है। इससे किसानों को काफी नुकसान होने का डर है। शॉट मारने के दो प्रमुख कारण होते हैं। एक तो सफेद मक्खी का प्रकोप और दूसरा पोषक तत्वों की कमी। कृषि अधिकारियों के अनुसार सितम्बर तक पौधों में टिंडे बनकर तैयार होने के बाद इनमें पोषक तत्वों की मांग बढ़ जाती है। इससे पत्ते नीचे गिरने लगते हैं। इस तरह कपास की फसल को बचाने के लिए १.५ किलो यूरिया, १.५ किलो डीएपी १०० लीटर पानी में मिलाकर दस दिन के अंतराल में दो बार छिड़काव करने की सलाह किसानों को दी गई थी। कृषि विभाग हनुमानगढ़ में आत्मा परियोजना के उप निदेशक जयनारायण बेनीवाल के नेतृत्व में बचाव संबंधी फोल्डर भी किसानों में वितरित करवाए गए।
बिजाई पर नजर
हनुमानगढ़ जिले में इस बार करीब दो लाख हेक्टेयर में कपास की बिजाई की गई है। यहां प्रति हैक्टेयर २५ क्विंटल तक कपास उत्पादन किसानों ने लिया है। कृषि अधिकारी बलकरण सिंह के अनुसार जिले में कुल बिजाई रकबे की तुलना में पांच से आठ प्रतिशत क्षेत्र में शॉट मारने की सूचनाएं आई है। सोमवार तक अंतिम नुकसान रिपोर्ट आने के बाद सही स्थिति सामने आएगी। इसके लिए कृषि विभाग का फील्ड स्टॉफ नुकसान का मूल्यांकन करने में जुटा हुआ है।
ज्यादा नुकसान यहां
कपास की फसल में शॉट मारने या विल्ट की समस्या ज्यादातर संगरिया क्षेत्र में रही है। इसमें बोलांवाली, नुकेरा, ढाबा, भगतपुरा, हरिपुरा, चक हीर सिंहवाला सहित अन्य गांव शामिल है। इसमें कुछ जगह बीस से तीस प्रतिशत तक नुकसान की आशंका है। अंतिम खराबा रिपोर्ट आने के बाद नुकसान की सही स्थिति सामने आएगी।
.....फैक्ट फाइल.....
-जिले में चालू खरीफ सीजन में ०२ लाख हेक्टेयर में हुई कपास की बिजाई।
-जिले के किसानों ने प्रति हैक्टेयर २५ क्विंटल तक कपास उत्पादन लिया है।
-शॉट मारने या विल्ट के कारण कपास की फसल को १० से ३० प्रतिशत तक नुकसान होने की सूचना।
-फसल खराबे को लेकर गिरदावरी रिपोर्ट १५ अक्टूबर तक तैयार होने की उम्मीद।
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Published on:
20 Sep 2020, 9:10 AM IST
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