वो भूखे नंगों को क्या देंगे, जिनके तन पर कपड़े भी सरकारी होते हैं....

वो भूखे नंगों को क्या देंगे, जिनके तन पर कपड़े भी सरकारी होते हैं....

Purushotam Jha | Publish: Apr, 15 2019 12:22:19 PM (IST) Hanumangarh, Hanumangarh, Rajasthan, India


-नामचीन शायरों ने पेश किए कलाम तो लोग हुए मंत्रमुग्ध
-हनुमानगढ़ में डिस्ट्रिक प्रेस समिति (प्रेस क्लब) के तत्वावधान में आयोजन
हनुमानगढ़. भटनेर की फिजा रविवार शाम को शायरी और गजलों से गुलजार हो गई। नामचीन शायरों की शायरी ने लोगों को देर तक बांधे रखा। शेर-ओ-शायरी की शाम में हर मतले ने दर्शकों की वाहवाही बटोरी। डिस्ट्रिक प्रेस समिति (प्रेस क्लब) के तत्वावधान में टाउन-जंक्शन रोड स्थित ग्रीन वल्र्ड रिसोर्ट में गीत-गजल की महफिल देर रात तक सजी। शायर शारिक कैफी, शकील जमाली, अलीना इतरत, मुकेश आलम व असलम राशिद ने अपने गीत-गजलों से शहर के साहित्य प्रेमियों को आनंदित किया। इस मौके पर प्रेस क्लब अध्यक्ष देवेन्द्र शर्मा बिट्टू महासचिव गोपाल झा, उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह, कोषाध्यक्ष गुलाम नबी, सचिव राकेश सहारण, सह सचिव बलजीत सिंह, आयोजन समिति के डॉ. प्रेम भटनेरी, राजेश अग्रवाल आदि ने व्यवस्थाएं संभाली। कारवाने गजल के संस्थापक अशलम राशिद ने संस्था के उद्देश्यों से अवगत करवाया। कार्यक्रम में हर वर्ग के लोग शामिल हुए। शायरी और गजल की महफिल देर रात तक गुलजार हुई।

अंग्रेजी कारोबारी जुबान
कारवाने गजल से जुड़े नामचीन शायर पहली बार रविवार को हनुमानगढ़ पहुंचे। इस दौरान जंक्शन में होटल ग्रांड इन में हुई प्रेसवार्ता में शायर शकील जमाली ने अंग्रेजी को कारोबारी जुबान बताया। साथ ही उर्दू और हिंदी को मोहब्बत की भाषा बताई। क्या उर्दू मुसलमानों की भाषा है, इस सवाल पर जमाली ने कहा कि किसी भाषा पर किसी व्यक्ति या धर्म का अधिकार नहीं होता है। जबान की मिठास ही उसे पहचान दिलाती है। इसलिए चाहे जबान कोई भी हो मरती है तो शायरों का दिल सबसे ज्यादा दुखता है।

मोहब्बत का शहर है हनुमानगढ़
कारवाने गजल से जुड़े देश के ख्यातनाम शायर रविवार सुबह हनुमानगढ़ पहुंचे। इस दौरान सभी भटनेर किले पर भी गए। मीडिया से बातचीत में शायरों ने बताया कि हनुमानगढ़ मोहब्बत का शहर है। यहां के लोगों ने जितना स्नेह दिया है, उससे लगता है कि इस शहर में आगे बारबार आना पड़ेगा।

सलीका आना चाहिए
शायर शारिक कैफी ने कहा कि कोई जगह हो सलीका जरूरी होता है। उन्होंने ‘सलीका आ जाए तो...’ पंक्ति सुनाकर कहा कि बिना सलीके से काम करने पर उसका परिणाम अच्छा नहीं आता है। देश के मौजूदा दौर में कहा कि शायरी का माहौल बन रहा है। शायर शकील जमाली तथा अलीना इतरत ने कहा कि युवा भी अब शायरी को पसंद कर रहे हैं। जो सकारात्मक पसंद है।

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