माइथोलॉजी से रिसर्च को सरल बनाने की सलाह, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पहुंचे देश-प्रदेश के शोधार्थी

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हनुमानगढ़. डबलीराठान-हनुमानगढ़ मार्ग पर स्थित श्री खुशालदास विश्वविद्यालय में शनिवार को आरएफआई इंडिया के तत्वावधान में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आगाज हुआ।

 

माइथोलॉजी से रिसर्च को सरल बनाने की सलाह, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पहुंचे देश-प्रदेश के शोधार्थी
हनुमानगढ़. डबलीराठान-हनुमानगढ़ मार्ग पर स्थित श्री खुशालदास विश्वविद्यालय में शनिवार को आरएफआई इंडिया के तत्वावधान में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आगाज हुआ। ‘विज्ञान, मानविकी, इंजीनियरिंग और प्रबंधन पर नवीन अनुसंधान’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में अपर सचिव गृह मंत्रालय डॉ. नेह श्रीवास्तव व एडीएम हनुमानगढ़ अशोक असीजा मुख्य अतिथि थे। चंद्रकांता राजपुरोहित, रजत शर्मा, संजीव वर्मा, डॉ. सौरभ जैन, गुरु गोविंद सिंह चेरिटेबल ट्रस्ट के वाइस प्रेसीडेंट कृष्णा यादव, पूर्व कुलपति डॉ. भागीरथ सिंह, एसकेडी कॉलेज के चैयरपर्सन दिनेश कुमार जुनेजा, वाइस चेयरपर्सन वरुण यादव, कुलपति प्रो. एमके घड़ोलिया, कुल सचिव डॉ. राजेश कस्वां सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि शोध हो या फिर और कोई क्षेत्र। सभी जगह मानवीय संवेदना का होना बेहद जरूरी होता है। साथ ही कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण के कारण ही मानवीय जीवन आज इतना सरल होता जा रहा है। बदलते वक्त में माइथोलॉजी से रिसर्च को और सरल बनाने की जरूरत बताई। सम्मेलन मेमं रिसर्च फाउंडेशन ऑफ इंडिया की ओर से शोधार्थियों को रिसर्च के नए आयाम एवं शोध से संबंधित अलग-अलग विषयों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। इसमें रिसर्च कार्य में लगे दो सौ से अधिक शोधार्थियों को शोधपत्र प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त होगा। कुलपति प्रो. एमके घड़ोलिया ने कहा कि इस तरह सम्मेलन से क्षेत्र में शिक्षा के नए आयाम स्थापित होंगे। चंद्रकाता राजपुरोहित ने शिक्षा और खेलों पर जोर देते हुए कहा कि युवा चेयरपर्सन दिनेश कुमार जुनेजा ने लगन एवं निष्ठा से इस संस्था को स्थापित किया। जो आज शिक्षा के क्षेत्र में वटवृक्ष का रूप ले रहा है।
इस मौके पर डॉ. डीएस धूपल ने पूर्व प्रधानमंत्री नेहरु के एक भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि ईमानदारी से काम करने पर दुनिया में खुद को साबित करने का अच्छा अवसर मिल ही जाता है। इसलिए सभी को चाहिए कि अच्छे लक्ष्य निर्धारित करके इसकी प्राप्ति के प्रयास में जुट जाएं। उन्होंने कहा कि काम के दौरान दिल्ली में मुझे अर्थशास्त्र के क्षेत्र में खुद को साबित करने का उचित अवसर मिला। साथ ही कहा कि मैं जब इस क्षेत्र में शिक्षा ग्रहण कर रहा था, उस वक्त आसपास सेकंडरी विद्यालय भी नहीं होते थे, लेकिन आज विश्वविद्यालय भी बन गए हैं। ऐसे में शिक्षा का अच्छा माहौल क्षेत्र में बन रहा है। नेह श्रीवास्तव ने कहा कि माइथोलॉजी के माध्यम से हम रिसर्च को बहुत सरल बना सकते हैं। इससे पूर्व श्री खुशालदास विश्वविद्यालय में नव निर्मित ऑडिटोरियम का अतिथियों ने उद्घाटन किया। सम्मेलन में डॉ. भागीरथ बिजारणियां, डॉ.राधेश्याम गोदारा, डॉ. आस्था, डॉ. पवन कुमार वर्मा, डॉ. मोनिका श्रीवास्तव, डॉ. सतीश कुमार, प्रो. आशारानी, डॉ. स्वाति जोशी, डॉ.संजय दीक्षित, पूजा जुनेजा, डॉ. विक्रम सिंह ओलख, डॉ. आस्था, डॉ. राजेंद्र कुमार, प्रो. वीना, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. गरिमा, डॉ. सुनील वर्मा सहित अन्य मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन भीष्म कौशिक ने किया।

Purushottam Jha Reporting
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