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जिले की जीडीपी का बड़ा आधार,बिजाई के साथ ही बचाव की कवायद

locationहनुमानगढ़Published: Feb 13, 2024 10:36:23 am

Submitted by:

Purushottam Jha

हनुमानगढ़. आगामी खरीफ सीजन में कपास की फसल को गुलाबी सुंडी से बचाने की चुनौती रहेगी। इसलिए कृषि विभाग इस बार बिजाई के साथ ही बचाव की तैयारियों में जुट गया है। इसके लिए किसानों को गांवों में जागरूक किया जा रहा है। ताकि लक्ष्य के अनुसार उत्पादन लिया जा सके।

 

जिले की जीडीपी का बड़ा आधार,बिजाई के साथ ही बचाव की कवायद
जिले की जीडीपी का बड़ा आधार,बिजाई के साथ ही बचाव की कवायद
जिले की जीडीपी का बड़ा आधार,बिजाई के साथ ही बचाव की कवायद
-जिले में कपास की फसल को रोग मुक्त करने की चुनौती
-खरीफ की मुख्य फसल कपास में गुलाबी सुंडी के प्रकोप से गत वर्ष हुआ था बड़ा नुकसान
हनुमानगढ़. आगामी खरीफ सीजन में कपास की फसल को गुलाबी सुंडी से बचाने की चुनौती रहेगी। इसलिए कृषि विभाग इस बार बिजाई के साथ ही बचाव की तैयारियों में जुट गया है। इसके लिए किसानों को गांवों में जागरूक किया जा रहा है। ताकि लक्ष्य के अनुसार उत्पादन लिया जा सके। गत वर्ष जिले में गुलाबी सुंडी के प्रकोप के चलते उक्त फसल में बड़ा नुकसान हुआ था। इससे किसानों को आर्थिक संकट झेलना पड़ा था। विभागीय अधिकारियों की मानें तो जिले की जीडीपी में कपास की फसल का अहम योगदान रहा है। करोड़ों रुपए का कपास उत्पादन जिले में होता है। नकदी फसल की सुरक्षा को लेकर किसानों को जानकारी दी जा रही है। इसी क्रम में जिनिंग मिलों में भंडारित बिनौलों को मार्च माह में खुला नहीं छोडऩे की सलाह दी गई है। हनुमानगढ़ जिले में वर्ष 2005-06 से बीटी कपास की बिजाई शुरू हुई। शुरुआती दिनों में अच्छा उत्पादन होने से इसका रकबा बढ़ा। परंतु गत वर्ष बीटी कपास में गुलाबी सुंडी का प्रकोप आने से आर्थिक हानि स्तर से काफी अधिक हो गया। सुंडी फैलने के प्रमुख कारणों में बीटी कपास की अगेती बिजाई ज्यादा होने तथा बिजाई अवधि अधिक समय तक चलने को बताया गया है। इसके अलावा कपास की फसल पर सुंडी का प्रकोप बनस्टियों एवं भूमि पर पड़े अधखिले टिंडों तथा जिनिंग उपरांत अवशेष सामग्री में जीवित लार्वा से निकलने वाले व्यस्क नर एवं मादा से भी होता है। इस स्थिति में खरीफ की प्रमुख नकदी फसल कपास को बचाने की कवायद शुरू कर दी गई है।
सफेद सोने से मंडी में चमक
जिले में कपास की फसल को सफेद सोने के नाम से जाना जाता है। जिले में औसतन करीब दो लाख हैक्टेयर में इसकी खेती हो रही है। गत बरसों में इसके रेट भी दस हजार रुपए प्रति क्विंटल रहे हैं। इस स्थिति में किसानों को अच्छी आमदनी हुई। लेकिन अब बीटी कपास में कुछ कीट का प्रकोप आने से किसानों में बेचैनी बढ़ रही है। सफेद सोने की आवक से मंडी में खूब चमक रहती है। इसके उत्पादन से सरकार को लाखों रुपए का टैक्स भी प्राप्त हो रहा है।
मंडियों में यह चल रहे भाव
जिले में इन दिनों कपास की आवक हो रही है। हनुमानगढ़ जंक्ïशन में नरमा के भाव 6500, डबलीराठान मंडी में 5697, हनुमानगढ़ टाउन मंडी में 6300, रावतसर मंडी में 6550 रुपए प्रति क्ंिवटल बिक रहा है। आगे अप्रेल-मई में फिर से इसकी बिजाई शुरू होगी। इसके तहत विभागीय अधिकारी किसानों को कीट प्रकोप आदि से बचाव की जानकारी दे रहे हैं।
.......वर्जन.....
सावचेती बरतने की सलाह
जिले में खरीफ सीजन की प्रमुख फसल कपास है। इससे किसानों की जेब में अच्छी खासी नकदी आती है। गत वर्ष गुलाबी सुंडी के प्रकोप से कपास में नुकसान हुआ था। अबकी बार बिजाई के समय ही बचाव संबंधी कुछ सावचेती बरतने की सलाह किसानों को दी जा रही है। ताकि इस फसल में कीट प्रकोप का नियंत्रण किया जा सके।
-बीआर बाकोलिया, सहायक निदेशक, कृषि विभाग हनुमानगढ़

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