गांधीनगर व भट्टा बस्ती की 183 बीघा भूमि पर हाइकोर्ट में नहीं हुई सुनवाई

गांधीनगर व भट्टा बस्ती की 183 बीघा भूमि पर हाइकोर्ट में नहीं हुई सुनवाई
- 685 में से 317 के पास मकानों के पट्टे, नगर परिषद के रिकार्ड में 157 की ही है पत्रावली

हनुमानगढ़. गांधीनगर व भट्टा बस्ती के सैंकड़ों नागरिक अपने आशियाने के लिए चिंतित है।

गांधीनगर व भट्टा बस्ती की 183 बीघा भूमि पर हाइकोर्ट में नहीं हुई सुनवाई
- 685 में से 317 के पास मकानों के पट्टे, नगर परिषद के रिकार्ड में 157 की ही है पत्रावली

हनुमानगढ़. गांधीनगर व भट्टा बस्ती के सैंकड़ों नागरिक अपने आशियाने के लिए चिंतित है। करीब 183 बीघा भूमि को लेकर रेलवे व नगर परिषद के बीच मामले में सोमवार को हाइकोर्ट में सुनवाई होनी थी। किसी कारणवश नहीं हो सकी। अग्रिस सुनवाई कब होगी, इसका अभी तक निर्णय नहीं हो पाया है। गांधीनगर व भट्टा बस्ती में 685 मकान हैं, इनमें से 370 के पास मकानों के पट्टे हैं। इस संबंध में नगर परिषद को रिकार्ड रूम से 157 पट्टों की ही पत्रावली ही मिली है। यह पट्टे वर्ष 1997 के राज्य सरकार की ओर से गजट नोटिफिकेशन में गांधीनगर व भट्टा बस्ती की भूमि नगर पालिका को हस्तांतरित होने के बाद जारी किए गए थे। कुछ पट्टे रियासतकालीन समय में तत्कालीन राजा-महाराजा की ओर से जारी किए हुए व 1981 के सर्वे में मतदाता सूची के आधार पर पट्टे जारी किए हुए मिले हैं। इसकी तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार कर नगर परिषद की ओर से हाइकोर्ट के समक्ष सुनवाई के दौरान रखी जानी थी। गांधीनगर व भट्टा बस्ती में कुल 685 घरों में से गांधीनगर क्षेत्र में 374 व भट्टा बस्ती क्षेत्र में 311 परिवार निवास कर रहे हैं। इसके अलावा 62 में से करीब 12 भूखंडों का आवंटन नगर परिषद की ओर से किया जा चुका है। मामला कोर्ट में होने के कारण इन भूखंडों से संबंधित नगर परिषद ने आज तक लीडज डीड जारी नहीं की। इसके अलावा कई भूखंड रिक्त है और कई भूखडों में पशु रखने के लिए कच्चे मकान बना हुए हैं।

राजस्व विभाग बता चुका है रेलवे की भूमि
विधानसभा चुनाव से पहले मई 2018 में राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ रेलवे व नगर परिषद के अधिकारियों ने गांधीनगर व भट्टा बस्ती इलाके का संयुक्त सर्वे किया था। संयुक्त रिपोर्ट में राजस्व विभाग ने रिकार्ड के मुताबिक 183 बीघा भूमि रेलवे की बताई थी। इस रिपोर्ट में नगर परिषद अधिकारियों के हस्ताक्षर होने की भी बात कही जा रही है। इसी के आधार पर रेलवे ने हाइकोर्ट की सुनवाई में अपना पक्ष रख चुका है। इधर, नगर परिषद का दावा है कि 1997 में मंडी समिति से यह भूमि हैंडओवर की गई थी। इसका नियमिन कर व गेजेट नोटिफिकेशन होने के पश्चात 157 लोगों को मकानों के पट्टे दिए जा चुके हैं।

Anurag thareja Reporting
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