रोजगार के लिए गांवों में कर रहे मनुहार, नए नियमों से मनरेगा रोजगार पर आया संकट

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हनुमानगढ़. गत वर्ष कोरोना काल में लगे लॉकडाउन के दौरान बेरोजगार होकर गांवों में लौटे लोगों को मनरेगा में बड़े पैमाने पर काम देकर उन्हें आर्थिक संबल दिया गया था। मगर इस बार लॉकडाउन में ऐसा नहीं हुआ। दूसरी लहर काफी खतरनाक होने के कारण सोशल डिस्टेसिंग के नियम की सख्ती से पालना करवाई गई।

 

By: Purushottam Jha

Published: 10 Jun 2021, 11:35 AM IST

रोजगार के लिए गांवों में कर रहे मनुहार, नए नियमों से मनरेगा रोजगार पर आया संकट
-हजारों मजदूर मांग रहे काम, पंचायतीराज विभाग के अफसर नहीं दे रहे काम

हनुमानगढ़. गत वर्ष कोरोना काल में लगे लॉकडाउन के दौरान बेरोजगार होकर गांवों में लौटे लोगों को मनरेगा में बड़े पैमाने पर काम देकर उन्हें आर्थिक संबल दिया गया था। मगर इस बार लॉकडाउन में ऐसा नहीं हुआ। दूसरी लहर काफी खतरनाक होने के कारण सोशल डिस्टेसिंग के नियम की सख्ती से पालना करवाई गई। यही कारण है कि गत वर्ष की तुलना में चालू वर्ष में मनरेगा में पंजीकृत मजदूरों को नामात्र का रोजगार ही मिल पाया। हालात ऐसे रहे कि राज्य सरकार की ओर से पिछले माह लॉकडाउन के दौरान मनरेगा कामों पर श्रमिक लगाने की छूट मिलने पर ग्राम पंचायत कार्यालयों में रोजगार की मांग दर्ज करवाने वालों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई है। पहले लोगों ने रोजगार के लिए मनुहार लगाई। अफसर नहीं माने तो धरना प्रदर्शन भी किया। लेकिन अधिकारियों ने नियमों की बाध्यता बताते हुए समझाइश की तो मामला शांत हो गया। बीते दिनों गाइड लाइन जारी कर राज्य सरकार ने एक कार्यस्थल पर अधिकतम 20 श्रमिक लगाने की छूट दी थी। परन्तु ग्राम पंचायतों में एक साथ सैंकड़ों लोग काम मांगने के लिए दबाव बना रहे।
ग्राम पंचायतों के लिए संभव नहीं है कि एक साथ सैकड़ों लोगों को काम दे सकें। जिला परिषद अधिकारियों के अनुसार चालू पखवाड़े में जिले की कुल 269 ग्राम पंचायतों में से 152 ग्राम पंचायतों में 758 काम शुरू हो पाए हैं। इन पर 3100 श्रमिक नियोजित किए गए हैं। मनरेगा के तहत चालू वर्ष में ग्राम पंचायतों में गांव की गलियों में कीचड़ निस्तारण, नालियों की डिसिल्टिंग, पौधरोपण आदि उपयोगी कामों को प्राथमिकता देकर मस्टररोल जारी किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष मई-जून के महीनों में जिले में प्रतिदिन 80 हजार से अधिक तक श्रमिकों का नियोजन किया गया था तथा काम के लिए जगह सीमित होने के कारण एक ही काम को प्रति वर्ष दोहराया गया था। इस वर्ष अनुसूचित जाति के काश्तकारों के खेतों में समतलीकरण, पौधरोपण, कैटलशेड आदि व्यक्तिगत लाभ के काम ज्यादा स्वीकृत किए गए हैं। ताकि क्षेत्र को हराभरा किया जा सके। सभी ग्राम पंचायतों में सड़क किनारे पौधरोपण कार्य आवश्यक रूप से करवाने को लेकर पाबंद किया गया है।

इनमें नहीं दिलचस्पी
जिला परिषद अधिकारियों के अनुसार लोग गांवों में जोहड़ खुदाई, पटड़ा व रास्ता दुरुस्तीकरण के काम चाहते हैं। जहां काम आसानी से हो जाता है। जबकि नालियों की सफाई आदि के कार्य करने में मजदूर आनाकानी करते हैं। सभी ग्राम पंचायतों को जिला परिषद कार्यालय स्तर से निर्देश दिए गए हैं कि सफाई के कामों पर काम करने के लिए आनाकानी करने वालों की अगले तीन माह तक मांग दर्ज नहीं करे।

......वर्जन......
नियमों में दे रहे रोजगार
मनरेगा में काम मांगने वालों की संख्या बढ़ रही है। हम निर्धारित नियमों के तहत मजदूरों को काम पर लगा रहे हैं। सफाई संबंधी कार्य में आनाकानी करने वालों मजदूरों की अगले तीन माह तक मांग दर्ज नहीं कर रहे।
-रामनिवास जाट, सीईओ, जिला परिषद हनुमानगढ़

Purushottam Jha Reporting
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