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हजारीबाग

कुवैत में हुई भारतीय युवक की मौत,एक सप्ताह बाद भी पार्थिव शरीर के मातृ भूमि आने का इंतजार

अनवर ने कुवैत से बाहर आने की काफी कोशिश की थी। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से लेकर कई मीडिया कर्मियों से भी सहयोग मांगा…

हजारीबागJul 09, 2018 / 01:46 pm

Prateek

anwar file photo

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रवि सिन्हा की रिपोर्ट…

(रांची): झारखंड में हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड अंतर्गत बलिया पंचायत के रहने वाले अनवर मलिक की मौत 2 जुलाई को कुवैत में हो गयी, लेकिन अब तक उनका पार्थिव शरीर मातृ भूमि नहीं पहुंचा है और परिजन अब भी अपने लाड़ले के अंतिम दर्शन के इंतजार में है।

काम के सिलसिले में गया था

प्राप्त जानकारी के अनुसार रोजी-रोटी की जुगाड़ में अनवर अरबी कंपनी में काम करने के लिए सरहद पार गया था। अनवर के परिजनों एवं उसके भाई कामिल ने बताया कि उसके भाई अनवर को माइग्रेन की बीमारी थी ,जिसके बादसे अनवर वतन वापसी के लिए लंबे समय से कोशिश कर रहा था। इससे पहले कि उसकी कोई मदद कर पाता और वह वतन वापस लौट पाता उसके पहले हीं उसकी मौत कुवैत में की खबर आ गई। उसे काम पर रखने वाली कंपनी का कहना है कि अनवर ने आत्महत्या कर ली है। अनवर के परिजन मामले की जांच की गुहार लगा रहे हैं।

 

एक सप्ताह बाद भी घर नहीं आया शव

वहीं दूसरी ओर मौत के बाद लगभग एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी अनवर का शव बड़कागांव प्रखंड के बलिया पंचायत नहीं पहुंचने परिजनों व स्थानीय लोगों में मायूसी है। गत सोमवार को उसकी मौत की सूचना घर परिवार के परिजनों को दी गई थी। कंपनी की ओर से यह जानकारी दी गयी कि अनवर ने फांसी लगाकर जान दे दी है। जबकि परिजनों ने आशंका व्यक्त की है कि कंपनी की ओर से जबरन रोकने का प्रयास किया गया और प्रताड़ित किया गया। उन्होंने पूरी घटना की जांच की मांग की है।


भारत आने को मांगा था सहयोग

अनवर ने कुवैत से बाहर आने की काफी कोशिश की थी। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से लेकर कई मीडिया कर्मियों से भी सहयोग मांगा। परिजनों ने आशंका व्यक्त की थी कि वह कुवैत में जिस अरबी कंपनी में काम कर रहा है और वहां वह काफी मुसीबत में है और भारत लौटना चाहता है, लेकिन अरबी कंपनी भारत आने नहीं दे रही है।


अनवर ने एक अन्य साथी मोहब्बत अमजद का जिक्र करते हुए बताया था कि कंपनी के द्वारा उसे कचरा फेंकने का काम दिया गया है जबकि वह एसी एयर कंडीशनर की रिपेयरिंग के काम के लिए कुवैत आया था। साथ हीं उसे खाना भी नहीं दिया जा रहा था। इस तरह की समस्याओं से परेशान होकर विदेश मंत्री से भारत आने के लिए मदद की गुहार लगायी थी। कंपनी से भी उसने अपनी तबीयत खराब होने की बात बता कर एक बार भारत भेजने की गुहार लगायी थी। हालांकि मदद मिलती उससे पूर्व उसकी मौत की सूचना परिजनों को आ पहुंची।

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