सावधान : गले में खिचखिच और सर्दी जुकाम से कान को होता नुकसान

कान के बहने को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। सर्दी, खिचखिच या गले में खराब एक हफ्ते से अधिक समय से है तो कान को नुकसान हो सकता है। इसमें नाक के पिछले और गले के ऊपरी हिस्से में यूटेस्टियन ट्यूब होती है जिसमें संक्रमण की वजह से सूजन आ जाती है। ये सूजन लंबे समय तक रहती है तो संक्रमण कान के पर्दे तक पहुंच जाता और पर्दे में छेद हो जाता है। इसके बाद कान बहने लगता है।

By: Ramesh Singh

Updated: 25 Aug 2020, 07:36 PM IST

धूल मिट्टी, कॉस्मेटिक साजो सामान, डियोडरेंट या अन्य चीजों से एलर्जी होने पर इनके संपर्क में आने से बीमारी बढ़ जाती है। इसके अलावा सड़क हादसे या किसी अन्य तरह से कान पर या उसके आसपास चोट लगने से कान की सुनने वाली बोन में चोट लग जाती है जिससे सुनने की क्षमता कम होने के साथ मवाद आने लगता है। इसके अलावा अचानक बहुत तेज आवाज या दिवाली के पटाके से कान की हड्डियों को नुकसान होता है और कान बहने लगता है। ऐसे में कान में किसी तरह की तकलीफ का समय रहते सही इलाज कराया जाए तो बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है।

कान में भारीपन प्रमुख लक्षण

कान में एक्यूट इंफेक्शन की शिकायत होने पर उसमें असहनीय दर्द होता है। दर्द से कान के मध्य भाग में दबाव अधिक बनता है जिसकी वजह से कान से खून भी आ सकता है। कान में भारीपन आना इसका प्रमुख लक्षण है। ऐसे में जब कभी कान भारी लगे और हल्का दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें गंभीर परेशानी से बच सकते हैं।

सनसनाहट होती है
कई बार देखा गया है कि कुछ लोगों को कान से सनसनाहट या घंटी बजने की आवाज आती है जिसे मेडिकल की भाषा में रिंगिग और बजिंग कहा जाता है। ऐसा लंबे समय से हो रहा है तो कान के पर्दे में छोटा छेद हो जाता है जिसे स्मॉल सेंट्रल परफोरेशन कहा जाता है। ऐसे में इस तरह के लक्षण का समय रहते इलाज करवाना चाहिए। इसके अलावा नाक की हड्डी टेढ़ी होने से भी कान संबंधी परेशानी होती है।

Ramesh Singh
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