पेट की जलन दूर करता है मटके का पानी, जानिए और फायदे

आयुर्वेद के मुताबिक मटके की मिट्टी कीटाणुनाशक होती है जो पानी में से दूषित पदार्थो को साफ करती है

By: दिव्या सिंघल

Published: 28 May 2015, 12:03 PM IST

आयुर्वेद में मटके के पानी को शीतल, हल्का, स्वच्छ और अमृत के समान माना गया है। यह प्राकृतिक जल का स्रोत है जो ऊष्मा से भरपूर होता है और शरीर की गतिशीलता को बनाए रखता है।

1. मटके की मिट्टी कीटाणुनाशक होती है जो पानी में से दूषित पदार्थो को साफ करने का काम करती है।
2. इस पानी को पीने से थकान दूर होती है। इसे पीने से पेट में भारीपन की समस्या भी नहीं होती।
3. रक्तबहने की स्थिति में मटके के पानी को चोट या घाव पर डालने से खून बहना बंद हो जाता है।
4. सुबह के समय इस पानी के प्रयोग से दिल और आंखों की सेहत दुरूस्त रहती है।
5. गला, भोजननली और पेट की जलन को दूर करने में मटके का पानी काफी उपयोगी होता है।
6. जिन लोगों को अस्थमा की समस्या हो वे इस पानी का प्रयोग न करें क्योंकि इसकी तासीर काफी ठंडी होती है जिससे कफ या खांसी बढ़ती है। जुकाम, पसलियों में दर्द, पेट में आफरा बनने की स्थिति व शुरूआती बुखार के लक्षण होेने पर मटके का पानी न पिएं।
7. तली-भुनी चीजें खाने के बाद यह पानी न पिएं वर्ना खांसी हो सकती है।
8. मटके का पानी रोजाना बदलें। लेकिन इसे साफ करने के लिए अंदर हाथ डालकर घिसे नहीं वर्ना इसके बारीक छिद्र बंद हो जाते हैं और पानी ठंडा नहीं हो पाता।

वैद्य पदम जैन, आयुर्वेद विशेषज्ञ
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दिव्या सिंघल
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