रक्तदान से डोनर का मोटापा नियंत्रित होता और भी फायदे

रक्तदान से डोनर का मोटापा नियंत्रित होता और भी फायदे

Hemant Pandey | Updated: 14 Jun 2019, 04:18:01 PM (IST) स्वास्थ्य

भारत में हर वर्ष करीब 4 करोड़ यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है। लेकिन देश में करीब एक करोड़ यूनिट ही खून की व्यवस्था हो पाती है। हमारे एक यूनिट खून से बचती है तीन लोगों की जिंदगी।

भारत में हर वर्ष करीब 4 करोड़ यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है। लेकिन देश में करीब एक करोड़ यूनिट ही खून की व्यवस्था हो पाती है। हमारे एक यूनिट खून से बचती है तीन लोगों की जिंदगी। इसलिए रक्तदान को महादान कहते हैं, क्योंकि खून का कोई विकल्प नहीं है। देश ब्लड की पूर्ति के लिए रोजाना करीब 38 हजार डोनर चाहिए। हर साल कुल 3 करोड़ ब्लड कम्पोनेंट लोगों को चढ़ाया जाता है। हर साल 10 लाख कैंसर रोगी की पहचान होती है, इनमें कई को ब्लड की जरूरत होती है। अगर देश की एक फीसदी आबादी ब्लड डोनेट करे तो कमी न होगी। लोगों में जागरूकता के लिए 14 जून को ब्लड डोनर डे मनाते हैं। इस वर्ष की थीम 'सेफ ब्लड फॉर ऑल' यानी सबके लिए सुरक्षित ब्लड है। ब्लड डोनर को लगता है कि रक्तदान से केवल रोगी को लाभ मिलता है लेकिन ऐसा नहीं इससे डोनर को भी लाभ मिलता है।

ब्लड डोनेशन से जुड़े फैक्ट्स
ब्लड डोनेशन में 350-450 ML लेते है जो 24 घंटे में ही पूर्ति हो जाती है। ब्लड शरीर में करीब 400 किमी प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ता है। करीब 9600 किमी दुरी जितना ब्लड शरीर में दौड़ता है। यह दूरी करीब भारत-कनाडा जितनी है। ब्लड में 70% हीमोग्लोबिन की मात्रा होती है। वयस्क व्यक्ति के शरीर में करीब पांच लीटर तक ब्लड होता है। हर व्यक्ति के शरीर का करीब 7 फीसदी हिस्सा ब्लड का होता है। शरीर की रक्त नलिकाओं से पृथ्वी को दो चक्कर में लपेट सकते हैं।

कब पड़ती है खून की जरूरत
बड़े हादसों के बाद या सर्जरी के समय खून की अधिक जरूरत होती है। प्रसव या गर्भपात के बाद मां या नवजात को ब्लड चढ़ाना पड़ता है। ब्लड कैंसर, हीमोफीलिया, थैलीसीमिया के रोगियों को अत्यंत जरूरी होता है। औसतन हर ओपन हार्ट सर्जरी में 4-5 यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है। भयंकर दुर्घटना में घायल को 100 यूनिट तक ब्लड की जरूरत होती है। एक यूनिट ब्लड से करीब तीन लोगों की जान बचाई जा सकती है।

कौन कर सकता है ब्लड डोनेट
18 से 65 साल के बीच का स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। जिसका वजन 45 किलो से ज्यादा, हीमोग्लोबिन 12.5 ग्राम से अधिक है। एक बार रक्तदान के 3 महीने के बाद दोबारा रक्तदान कर सकते हैं। ब्लड डोनेट करते समय पेट भरा (नाश्ते या भोजन किया हो) होना चाहिए।

रक्तदान से डोनर के भी कई फायदे
इससे हार्ट अटैक की आशंका कम होती, खून का थक्का कम बनता है। अगर साल में दो बार ब्लड डोनेट करने से वजन नियंत्रित रहता है। रक्तदान से नए सेल्स बनने से शरीर में एनर्जी आती है, उत्साह बढ़ता है। ब्लड डोनेट करने से लिवर से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है। शरीर में ज़्यादा आयरन की मात्रा है तो लिवर पर दवाब पड़ता है। नियमित ब्लड डोनेशन से शरीर में आयरन का बैलेंस सही रहता है। रक्तदान से करीब 650 कैलोरी खर्च होती है। इसके और भी फायदे होते हैं।

किन्हें नहीं करना चाहिए रक्तदान
माहवारी के समय, गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाएं न करें। नशे के आदि, पीलिया, मलेरिया, मिर्गी और टी.बी के रोगी न करें। अस्थमा, एलर्जी, हाई बीपी, डायबिटीज, किडनी रोग है तो बचें । खून संबंधी रोग, सर्जरी हुई हो और 48 घंटे पहले दवा ली हो तो भी रक्तदान महिम करना चाहिए। दांतों डॉक्टर को दिखाने के 72 घंटे बाद ही ब्लड डोनेट करें। एंटीरैबीज या हैपेटाइटिस-सी के इलाज के सालभर बाद ही करें। ब्लड डोनेट करते समय कोई बीमारी या उसका इलाज लिया है तो डॉक्टर को जरूर बताएं।

डॉ. सुनीता बुंदस और डॉ. राम मोहन जायसवाल, ब्लड बैंक प्रभारी

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