रूस में बनी कोरोना वैक्सीन स्पुतनिक-वी 92 प्रतिशत प्रभावी

कोरोनावायरस के खिलाफ दुनिया की पहली पंजीकृत वैक्सीन स्पुतनिक-वी ने अध्ययन में काफी प्रभावकारी प्रदर्शन किया है।

By: विकास गुप्ता

Published: 11 Nov 2020, 11:05 PM IST

नई दिल्ली । कोरोनावायरस की वैक्सीन का परीक्षण अब अंतिम दौर में है। सभी देशों के वैज्ञानिक अपनी-अपनी वैक्सीन को लेकर अलग-अलग दावे कर रहे हैं। इस बीच रूस ने कहा है कि अंतरिम परीक्षण परिणामों के अनुसार, कोरोना से लोगों की रक्षा करने में उसकी स्पुतनिक-वी वैक्सीन 92 प्रतिशत प्रभावी है। रूस के नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी और रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (आरडीआईएफ) ने बुधवार को यह घोषणा की और बताया कि कोरोनावायरस के खिलाफ दुनिया की पहली पंजीकृत वैक्सीन स्पुतनिक-वी ने अध्ययन में काफी प्रभावकारी प्रदर्शन किया है।

वर्तमान में स्पुतनिक वी के तीसरे चरण (फेज-3) के क्लिनिकल परीक्षण को मंजूरी दे दी गई है और यह बेलारूस, यूएई, वेनेजुएला और अन्य देशों के साथ-साथ भारत में भी दूसरे और तीसरे चरण में चल रहा है। बुजुर्ग लोगों के लिए वैक्सीन की सुरक्षा और इसके प्रभावों को लेकर एक अलग विस्तृत अध्ययन भी किया जा रहा है।

यह पुष्टि रूस में सबसे बड़े डबल-ब्लाइंड, रैंडमाइज्ड, प्लेसबो-नियंत्रित फेज-3 क्लिनिकल परीक्षणों में से 40,000 स्वयंसेवकों के पहले अंतरिम आंकड़ों पर आधारित है। कुल 16 हजार स्वयंसेवकों (वॉलंटिअर्स) पर किए गए ट्रायल में वैक्सीन की डोज दी गई थी, जिसके आधार पर यह मूल्यांकन किया गया।

कोरोनावायरस के 20 पुष्ट मामलों के सांख्यिकीय विश्लेषण के परिणामस्वरूप, टीकाकरण किए गए व्यक्तियों और प्लेसबो प्राप्त करने वालों के बीच का मामला अलग-अलग इंगित करता है कि स्पुतनिक वी वैक्सीन की दूसरी खुराक के बाद प्रभाव दर 92 प्रतिशत रही।

सितंबर में पहली बार वैक्सीन को रूसी अस्पतालों के रेड जोन के स्वयंसेवकों के एक समूह को दिया गया था। इसमें शामिल 10,000 लोगों के टीकाकरण के बाद भी इसकी प्रभावकारिता दर 90 प्रतिशत से अधिक होने की पुष्टि हुई है।
प्राप्त आंकड़ों को गामालेया सेंटर के शोधकर्ताओं की ओर से दुनिया के प्रमुख पीयर रिव्यूड मेडिकल एकेडमिक जर्नलों में से एक में प्रकाशित किया जाएगा, जिसमें प्रमुख महामारी विज्ञान विशेषज्ञों द्वारा डेटा का स्वतंत्र मूल्यांकन किया जाएगा।

रूस के 29 चिकित्सा केंद्रों में चल रहे क्लीनिकल परीक्षणों के हिस्से के रूप में 11 नवंबर तक 20,000 से अधिक स्वयंसेवकों को वैक्सीन की पहली खुराक और 16,000 से अधिक स्वयंसेवकों को पहली और दूसरी खुराक दी गई है।
इसके अलावा, 11 नवंबर तक अनुसंधान में किसी भी अप्रत्याशित प्रतिकूल घटनाओं की पहचान नहीं की गई है, जो कि एक अच्छा संकेत है। जिन लोगों को वैक्सीन दी गई उनमें से कुछ लोगों को मामूली शिकायतें, जैसे इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द, फ्लू जैसे सिंड्रोम, जिसमें बुखार, कमजोरी, थकान और सिरदर्द आदि ही देखने को मिले हैं।

क्लीनिकल परीक्षणों के दौरान वैक्सीन की सुरक्षा की लगातार निगरानी की जा रही है। जानकारी का विश्लेषण स्वतंत्र निगरानी समिति द्वारा किया जाता है, जिसमें प्रमुख रूसी वैज्ञानिक शामिल होते हैं। छह महीने तक अध्ययन प्रतिभागियों का अवलोकन जारी रहेगा, जिसके बाद अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। पंजीकरण प्रक्रिया को कारगर बनाने के लिए रूसी वैक्सीन खरीदने के इच्छुक देशों के राष्ट्रीय नियामकों को आरडीआईएफ द्वारा अनुसंधान डेटा प्रदान किया जाएगा। रूसी संघ के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराशको ने कहा कि वैक्सीन के उपयोग और क्लीनिकल परीक्षणों के परिणामों से पता चलता है कि यह कोरोनावायरस संक्रमण को रोकने के लिए एक कुशल समाधान है और यह महामारी को हराने का सबसे सफल रास्ता है।

विकास गुप्ता
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