उपवास : सेहत के साथ बढ़ती है उम्र, लेकिन रोगियों को सावधानी जरूरी

कई शोध में पाया गया है कि माह में एक या दो दिन उपवास करने से न केवल पाचन क्रिया सही रहती है बल्कि शरीर को डिटॉक्सिफिकेशन के लिए भी समय मिलता है।

By: Hemant Pandey

Published: 29 Mar 2020, 07:48 PM IST

कई शोध में पाया गया है कि माह में एक या दो दिन उपवास करने से न केवल पाचन क्रिया सही रहती है बल्कि शरीर को डिटॉक्सिफिकेशन के लिए भी समय मिलता है। शरीर से विषैले तत्व व खराब कोशिकाएं नष्ट होती हैं और नई कोशिकाओं का निर्माण होता है। इससे बुढ़ापे का असर घटता और उम्र भी बढ़ती है लेकिन इसके कुछ नुकसान भी है। ऐसे में विशेष सावधानी की जरूरत होती है।
फायदे के साथ नुकसान भी
आयुर्वेद के अनुसार उपवास रखकर शरीर के विषैले तत्वों को बाहर निकाला जा सकता है। लेकिन जिनको कोई बीमारी है उनको नुकसान हो सकता है। डायबिटीज के रोगी उपवास करते हैं, तो उन्हें आम दिनों की तुलना में कई घंटों तक खाली पेट रहना पड़ता है। इससे उनका शुगर लेवल घट सकता है। इसलिए डॉक्टर बीच-बीच में चेक करने के लिए कहते हैं। जिनकी हाल ही सर्जरी हुई है। खून की कमी, किडनी, लिवर और फेफड़ों से जुड़ी बीमारी है तो उनको उपवास करने से बचना चाहिए। अगर व्रत रहते हैं तो सवाधनी बरतें
डायबिटिक फाइबर ज्यादा लें
व्रत में डायबिटीज के रोगी फाइबर युक्त आहार ज्यादा लें। यह ब्लड शुगर को कम नहीं होने देता है। इनमें सब्जियां, सूखे मेवे (बादाम, अखरोट, पिस्ता आदि), छाछ, मखाना, भरवां कुट्टू रोटी, कुट्टू चीला, खीरे का रायता, ताजा पनीर और फल आदि। इससे पेट भरा हुआ रहता है और खून में ग्लूकोज की मात्रा भी नियंत्रित रहती है। लंबे व्रत के बाद तुरंत कुछ ठोस खाने से पहले आपको नींबू पानी, नींबू शर्बत या रसदार फल लेना चाहिए। व्रत के दौरान आपको कैफीन वाले ड्रिंक्स से बचना चाहिए। इससे परेशानी बढ़ सकती है।
बीपी के मरीज बेक या ग्रिल खाएं : ब्लड प्रेशर के रोगी खााने को तल कर बनाने की बजाय बेक और गिल्र करके ही बनाएं। इससे ज्यादा फैट लेने से बचेंगे। व्रत के दौरान बाजार में मिलने वाली नमकीन और चिप्स न खाएं। इसमें सोडियम यानी नमक की मात्रा बहुत ज्यादा होती है इससे ब्लड प्रेशर लेवल बढ़ सकता है। कोशिश करें कि घर पर ही बना खाना खाएं।
इन बातों का रखें ध्यान
डायबिटीज व ब्लड प्रेशर नियंत्रित है तो व्रत कर सकते हैं लेकिन अपनी दवाइयां नियमित लेते रहें। बीच में कोई परेशानी हो तो व्रत तत्काल छोड़ दें। लिक्विड डाइट जैसे नींबू व नारियल पानी, छाछ और दूध ज्यादा लेना चाहिए। इससे शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलते हैं। बीपी के मरीज सेंधा नमक भी लेने से बचें। इससे भी बीपी बढ़ सकता है। चाय-कॉफी पीने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को आलू, खीर, साबुदाना, पकोड़े आदि का परहेज करना चाहिए, क्योंकि ये भोजन वजन बढ़ा सकते हैं।
इन्हें बचना चाहिए
ऐसे मरीज जो टाइप-2 डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन यानी इंजेक्श ले रहे हैं उनको बिना डॉक्टरी सलाह के व्रत नहीं करना चाहिए। जिन लोगों को डायबिटीज से संबंधित अन्य परेशानियां जैसे किडनी, लिवर या फिर हृदय रोग है, उनके लिए उपवास रखना सही नहीं है। टाइप 1 डायबिटीज के रोगियों का उपवास नहीं रखना चाहिए। बुजुर्गों को भी व्रत नहीं करना चाहिए। लंबे समय तक खाली पेट रहने से परेशानी बढ़ सकती है। अगर रहते हैं तो विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। इससे बचाव हो सकता है।
डॉ.अमित सागर, सीनियर फिजिशियन, एसएन, मेडिकल कॉलेज, जोधपुर

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