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बाजार की चटपटी चीजों को घर पर आयुर्वेदिक तरीके से बनाएं पौष्टिक

खराब दिनचर्या और गलत खानपान अधिकतर बीमारियों की वजह माने जाते हैं। तला-भुना, मिर्च-मसालेदार, डिब्बाबंद व मार्केट में मिलने वाले जंक व फास्ट फूड को बड़े चाव से खाते हैं, हालांकि इनमें चटपटे स्वाद के साथ पौष्टिकता न के बराबर होती है। घर के बुजुर्ग व आयुर्वेद विशेषज्ञ देसी खानपान की सलाह देते हैं। बाजार की कई चीजों को आयुर्वेदिक तरीके से घर पर ही स्वादिष्ट और पौष्टिक बना सकते हैं। इससे ये सुपाच्य, नियंत्रित कैलोरी के साथ पोषक तत्वों से भी भरपूर होंगी।

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Divya Sharma

Dec 23, 2019

बाजार की चटपटी चीजों को घर पर आयुर्वेदिक तरीके से बनाएं पौष्टिक

बाजार की चटपटी चीजों को घर पर आयुर्वेदिक तरीके से बनाएं पौष्टिक

18 से अधिक उम्र के लोग किसी भी प्रकार की चाय के बजाय खसखस की चाय पी सकते हैं।
10 से 12 गिलास पानी नियमित पीना चाहिए। इससे भोजन पचने में आसानी होती है।
32 बार चबाने से पाचन ग्रंथियां पाचक रस स्रावित करती हैं जिससे पोषक तत्व अवशोषित होते हैं।
पेय के अच्छे विकल्प
द्रव्यगुण विभाग के डॉ सुमित नत्थानी के अनुसार खसखस की चाय और शरबत फायदेमंद हैं।
खसखस की चाय : एक गिलास पानी में एक से डेढ़ चम्मच खसखस के दाने डालकर उबालें। इसमें चीनी की जगह किशमिश, खजूर, मुनक्का या गुड़ प्रयोग में ले सकते हैं।
खस शरबत भी : यह शरबत खसखस पौधे की जड़ से तैयार किया जाता है। एसिडिटी या शरीर की गर्मी को कम करने के अलावा चक्कर आना, बार-बार सिरदर्द, थकान या ब्लड प्रेशर लो महसूस होने पर भी इसे पी सकते हैं।
पौष्टिक लड्डू
द्रव्यगुण विभाग की डॉ कृतिका जितेन्द्र जोशी के अनुसार जोड़ों में दर्द व कमजोरी में उपयोगी लड्डू को बनाने के लिए दो लीटर दूध कड़ाही में गर्म कर बार-बार चलाएं। पिसे हुए सूखे मेवे, एक कटोरी खसखस दाने, गुड़ या मुनक्का डालें। मिश्रण को गाढ़ा होने तक चलाएं। ठंडा होने पर लड्डू बनाएं। हर उम्र के लोगों को रोजाना एक लड्डू खाना फायदेमंद होता है।
जिमीकंद के शूल एंड शॉट्स

रसशास्त्र विभाग के डॉ. के शंकर राव के अनुसार औषधि कम दवा के रूप में उपयोगी जिमीकंद की पकौड़ी सेहतमंद हैं। इसे बनाने के लिए पहले जिमीकंद को छीलकर उबाल लें। इसके बाद आयुर्वेदिक औषधियों और मसाले को मिलाकर बॉल्स बनाकर तल लें। ये पाइल्स के अलावा जोड़ों के दर्द में लाभकारी है। इसमें चाहें तो कुछ मसाले भी मिला सकते हैं।
डायबिटीज में खाएं रागी रोटी
कैल्शियम व फाइबर से युक्त रागी आटे से तैयार रोटी मधुमेह रोगी में शुगर लेवल नियंत्रित रखती है। आटे में कटी गाजर, चुकंदर व मसाले मिलाकर गोल आकार दें। फिर हल्के तेल या घी से सेक कर बच्चों के लिए कटलेट बनाएं। आटे में देसी घी मिलाकर बिस्किट भी बना सकते हैं। मीठे के लिए महुआ के फल से निकले जूस को मिलाएं। यह प्राकृतिक शर्करा है। रागी का उपयोग कई बीमारियों में भी किया जाता है।
रागी के फायदे
रा गी में विटामिन्स और काब्र्स और फाइबर जैसे कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं। इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर भी शुगर और वजन कम करने में भी यह सहायक है। इसे खाने से तनाव वाले मरीजों को भी राहत मिलती है। एमिनो एसिड होता है स्किन एजिंग से बचाता है।

स्वादिष्ट मधुलिका केक
ज्यादातर केक मैदा के आटे से बनते हैं। हैल्दी केक बनाना चाहते हैं तो रागी और गेहूं के आटे को मिक्स कर बना सकते हैं। मीठे के लिए किसी प्रकार के स्वीटनर की जगह मुनक्का और खजूर का प्रयोग कर सकते हैं।
काठी रोल्स
बच्चे सब्जियों को खाने में अक्सर मुंह बनाते हैं। स्प्रिंग रोल्स या काठी रोल्स उन्हें ज्यादा पसंद आते हैं। घर पर सेहतमंद तरीके से इन्हें बना सकते हैं। जौ और गेहूं के आटे की रोटी में सब्जियों को भरकर सेककर दें।
जौ से तैयार करें कचौरी
आमतौर पर कचौरी के लिए मैदे से बाहरी परत तैयार करते हैं। आयुर्वेदिक तरीके से बनाई गई कचौरी में जौ और गेहूं के आटे की बाहरी परत सेहतमंद होगी। इसकी फिलिंग के लिए जौ के सत्तू में घर पर पिसे मसालों को मिलाकर करें। सर्दी के मौसम के लिहाज से लहसुन की चटनी अच्छी रहेगी। पेट में एसिडिटी की समस्या को यह कचौरी दूर करेगी।