अल्कलाइन डाइट से कम करें ‘पेट की चर्बी’, जानें इसके बारे में

अल्कलाइन डाइट का सिद्धांत खाने के तरीके को ठीक कर पीएच संतुलन का करना है।

By: विकास गुप्ता

Published: 25 Oct 2020, 09:19 PM IST

अल्कलाइन डाइट Alkaline Diet में भोजन में उन खाद्य पदार्थों को शामिल किया जाता है जो बॉडी में एसिड (अम्ल) का निर्माण करने की जगह क्षार की निर्माण करते हैं। अल्कलाइन खाद्य पदार्थों (क्षारीय खाद्य पदार्थों) का सेवन करने से शरीर का pH लेवल संतुलन में रहता है। अल्कलाइन डाइट के पीछे सिद्धांत खाने के तरीके को ठीक कर पीएच संतुलन का करना है।

कैसे काम करती है ये डायट-

अल्कलाइन डाइट में वेट लॉस और शरीर की चब्री घटाने के लिए मुख्य रुप से क्षारीय प्रकृति के भोजन का सेवन करने पर जोर दिया जाता है। इससे बॉडी का पीएच(क्षारीय और अम्लता की माप) बैंलेंस 7.35 से 7.45 के बीच बरकरार रखकर मोटापा घटाने में सहायता मिलती है।

ऐसे समझे – हमारे शरीर का खून कुछ हद तक क्षारीय प्रकृति का होता है, जिसका पीएच लेवल 7.35 से 7.45 के बीच होता है। हमारी डाइट भी इसी पीएच लेवल को मेंटेन करने वाली होनी चाहिए, इसलिए 70 फीसदी अल्कलाइन फूड और 30 फीसदी एसिड फूड खाना चाहिए। शरीर में Ph स्तर असामान्य होने पर थकान, कमजोर पाचन क्रिया और खराब इम्‍यून सिस्‍टम में खराबी आने लगती है जिससे शरीर बीमारियों की चपेट में आने लगता है।

pH की रेंज 0–14 के बीच होती है:
एसिडिक: 0.0–6.9
न्यूट्रल : 7.0
अल्कलाइन या बेसिक: 7.1–14.0

इसके फायदे : इस डायट को फॉलो करने से वजन घटता है शरीर की चब्री कम होती है, आर्थराइटिस, डायबिटीज और कैंसर आदि बामारियों में फायदा होता है। इससे अवसाद की समस्या भी खत्म होती है। यह डाइट बुढापे बुढ़ाने की रफ़्तार को भी कम करती है।

अल्कलाइन चीजें : इसमें मांस, डेयरी प्रोडक्ट, मिठाई, कैफीन, एल्कोहॉल, कृत्रिम और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ से परहेज तथा अधिक ताजा फल और सब्जियों तथा नट्स और बीजों का सेवन आता है। गाजर, पत्तागोभी, फूलगोभी, पालक, शिमला मिर्च, नींबू और लहसुन।

विकास गुप्ता
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