
जूम फटीग सिंड्रोम : मीटिंग में मल्टीटास्किंग से बचें, बीच-बीच में ब्रेक लें,जूम फटीग सिंड्रोम : मीटिंग में मल्टीटास्किंग से बचें, बीच-बीच में ब्रेक लें,जूम फटीग सिंड्रोम : मीटिंग में मल्टीटास्किंग से बचें, बीच-बीच में ब्रेक लें
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के मनोवैज्ञानिकों ने एक अध्ययन में पाया है कि लंबे समय तक वीडियो कॉल या कॉन्फ्रेंस में बैठने से जूम फटीग (थकान) सिंड्रोम हो रहा है। इसका असर तन-मन पर पड़ रहा है। इसमें मानवीय स्पर्श और आत्मीय संवाद की कमी के चलते अकेलापन व बेचैनी का अहसास होता है।
क्या है यह सिंड्रोम
वीडियो कॉल में अक्सर व्यक्ति असहज महसूस करता है। एक-दूसरे को देखने के बावजूद भी सामने वाले की व्यक्तिगत अनुपस्थिति और उनसे वास्तविक जुड़ाव महसूस न कर पाने के चलते मन में अजीब सी बेचैनी और तनाव होने लगता है। इसे ही जूम फटीग सिंड्रोम कहते हैं।
इसके संभावित कारण
नेटवर्क की बार-बार दिक्कत, ऑडियो और वीडियो के बीच अंतर, घर की आवाजें व बैकग्राउंड आदि से भटकाव के चलते भी मानसिक तनाव होता है। आजकल मीटिंग के साथ आर्थिक कमी, बीमारियों का डर और लोगों से न मिलना-जुलना भी फटीग का कारण हो सकते हंै। हमारी आंखें एक साथ कई चेहरों को देखने की आदी नहीं है। ऐसे में वीडियो कॉल में एक साथ ज्यादा चेहरे देखने से कुछ लोगों को परेशानी होती है। रूम मीटिंग में लोगों के चेहरों को देखकर मूड को भाप लिया जाता है जबकि वीडियो कॉलिंग में ऐसा संभव नहीं है।
इनका ध्यान रखें
वीडियो की जगह ऑडियो कॉल को प्राथमिकता दें। इससे ध्यान नहीं भटकेगा। मीटिंग का समय कम रखें। जरूरी होने पर ही मीटिंग रखें। मीटिंग में कोई बोल रहा है तो अपना सवाल या सुझाव टेक्स्ट मैसेज से करें न कि बोलकर। वीडियो कॉल के समय दूसरे काम करने से बचें। वीडियो क्रॉन्फ्रेंस के नियम होते हैं, केवल बोलने वाले का ही माइक ऑन होना चाहिए।
ऐसे कर सकते हैं बचाव
रोज सुबह टहलें और हरियाली में बैठें। इससे मस्तिष्क को सुकून का अहसास होगा। साइक्लिंग करें, रक्तप्रवाह सुचारु होने से चिड़चिड़ाहट घटेगी। संगीत सुनें। बातचीत कर पुरानी यादों को ताजा करें। मीठा और फास्ट फूड्स कम खाएं।
डॉ. सुनील शर्मा, वरिष्ठ मनोचिकित्सक, एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर
Updated on:
06 Feb 2021 12:01 am
Published on:
06 Feb 2021 12:01 am
