रंगभेद पर बनी ये फिल्म महीनेभर के लिए मुफ्त, आनलाइन देखें ये झकझोर देने वाली मूवी

By: पवन राणा
| Published: 06 Jun 2020, 08:03 PM IST
रंगभेद पर बनी ये फिल्म महीनेभर के लिए मुफ्त, आनलाइन देखें ये झकझोर देने वाली मूवी
रंगभेद पर बनी इस पॉपुलर फिल्म को पूरे महीने दिखाया जाएगा मुफ्त, आनलाइन देखें ये झकझोर देने वाली मूवी

गोरे रंग को गर्व का प्रतीक मानने वाली मानसिकता अगर सिनेमा में भी इस तरह का प्रदूषण फैला रही है तो यह तमाम दुनिया के लिए चिंता की बात है। याद आता है कि ऑड्रे हेपबर्न की 'ब्रेकफास्ट एट टिफनीज' (1961) में यूनिओशी नाम का एक किरदार रखा गया था।

-दिनेश ठाकुर
पुलिस के दमन से अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड ( George Floyd ) की मौत के बाद अमरीका में 11 दिन से जारी बवाल के बीच हॉलीवुड की कंपनी पैरामाउंट पिक्चर्स ( Paramount Pictures ) ने रंगभेद पर अपनी बहुचर्चित पीरियड फिल्म 'सेलमा' (2014) ( Selma ) सभी डिजिटल प्लेटफार्म्स पर पूरे महीने मुफ्त दिखाने का फैसला किया है। यह बड़े पैमाने पर भड़की हिंसा की आग पर कुछ ठंडे छींटे छिड़कने की कोशिश है।

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अवा दुवर्ने के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने छह साल पहले ऑस्कर अवॉर्ड ( Oscar Awards ) और गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड समारोह में खासी सुर्खियां बटोरी थीं। फिल्म 1965 में अश्वेत नागरिकों को वोट का अधिकार देने के लिए अमरीकी शहर सेलमा (अलबामा) से मोंटगोमेरी तक निकाले गए ऐतिहासिक मार्च पर आधारित है, जिसकी अगुवाई मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने की थी। इस मार्च के बाद अश्वेतों को वोट डालने का अधिकार तो मिल गया, लेकिन इक्कीसवीं सदी में भी अमरीकी समाज रंगभेद से मुक्त नहीं हो सका है। समय-समय पर वहां अश्वेतों की 13 फीसदी आबादी के प्रति नफरत के मामले सामने आते रहते हैं। जॉर्ज फ्लॉयड की मौत तथाकथित सभ्य और विकसित अमरीका के दामन पर नया धब्बा है।

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SINOPSE Selma: A Marcha da Liberdade, Uma Luta pela Igualdade é um filme estado-unidense de 2014, do género drama biográfico e histórico, realizado por Ava DuVernay e escrito por Paul Webb. Foi baseado nas marchas de Selma a Montgomery liderada por James Bevel,Hosea Williams, Martin Luther King Jr. e John Lewis, no ano de 1965. O filme protagonizou David Oyelowo como Martin, Tom Wilkinson como o presidente Lyndon B. Johnson, Tim Roth como George Wallace, Carmen Ejogo como Coretta King, e o rapper e ator Common como Bevel. Selma teve quatro indicações ao Globo de Ouro nas seguintes categorias: melhor filme dramático, melhor realização, e melhor ator em filme dramático, vencendo apenas o prémio de melhor canção original, O filme também foi indicado ao Oscar 2015 por melhor filme e venceu apenas o prémio de melhor canção original. O filme estreou no Festival do Instituto Americano do Cinema em 11 de novembro de 2014 e nos cinemas norte-americanos em 25 de dezembro do mesmo ano, tendo seu lançamento expandido nos cinemas no dia 9 de janeiro de 2015, dois meses antes do quinquagésimo aniversário da marcha. O filme foi relançado em 20 de março de 2015, em honra ao quinquagésimo aniversário da marcha histórica. Em Portugal, Brasil e Moçambique o filme foi exibido a 5 de fevereiro,em Angola a 6 de fevereiro e em Cabo Verde a 6 de março de 2015. #blackflixbrasil #martinlutherking #selma #movies #movie #filmes #gentepreta

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अश्वेतों के साथ-साथ एशियाई लोगों को लेकर अमरीका की दुर्भावना और पूर्वाग्रह की झलक हॉलीवुड की फिल्मों में भी देखी जाती रही है। विल स्मिथ, डेंजल वाशिंग्टन, हेली बेरी, रेजिना किंग, पीटर रामसे, स्टीव मैक्वीन, जेनिफर हडसन, जैमी फॉक्स और मॉर्गन फ्रीमैन जैसे कई अश्वेत सितारे हॉलीवुड के कमाऊ पूतों में गिने जाते हैं, फिर भी वहां के फिल्मकार अपनी फिल्मों में अश्वेतों और एशियाई लोगों को निशाना बनाने से नहीं चूकते। कई फिल्मों में ऐसे लोगों का या तो मजाक उड़ाया जाता है या उन्हें शातिर बदमाश के तौर पर पेश किया जाता है। गोरे रंग को गर्व का प्रतीक मानने वाली मानसिकता अगर सिनेमा में भी इस तरह का प्रदूषण फैला रही है तो यह तमाम दुनिया के लिए चिंता की बात है। याद आता है कि ऑड्रे हेपबर्न की 'ब्रेकफास्ट एट टिफनीज' (1961) में यूनिओशी नाम का एक किरदार रखा गया था। उसे शातिर दिखाकर और अजीब तरह से अंग्रेजी बुलवाकर जापानियों का मजाक उड़ाया गया था। 'इंडियाना जॉन्स एंड द टेम्पल ऑफ डूम' में अमरीश पुरी को दुष्ट तांत्रिक का किरदार सौंपकर स्टीवन स्पीलबर्ग दुनिया को भारत की कौन-सी तस्वीर दिखाना चाहते थे, समझा जा सकता है।

हॉलीवुड की 'ग्रीन बुक' (2019), '12 एंग्रीमैन' (1957), 'मिसीसिप्पी बर्निंग' (1988), 'ग्रेन टोरिनो' (2008), 'द बटलर' (2013), 'गेट आउट' (2017) तथा 'इन द हीट ऑफ द नाइट'(1967) जैसी दर्जनों और फिल्मों में अमरीका का रंगभेदी चेहरा सामने आया था। अफसोस की बात है कि दुनिया की सबसे बड़ी ताकत अब तक अतार्किक और अमानवीय सोच की गिरफ्त में है।