Raksha bandhan special: रक्षाबंधन पर लेंगे यह संकल्प तभी सफल होगा काम

Raksha bandhan special: रक्षाबंधन पर लेंगे यह संकल्प तभी सफल होगा काम

poonam soni | Updated: 14 Aug 2019, 08:06:57 PM (IST) Hoshangabad, Hoshangabad, Madhya Pradesh, India

भ्रूण हत्या पर रोक, गौ रक्षा, कन्या की रक्षा का पहली जिम्मेदारी

होशंगाबाद। शिवार्चन समिति द्वारा आचार्य सोमेश परसाई के सानिध्य में श्रावण मास आयोजित रुद्राभिषेक का बुधवार को समापन हुआ। समापन पर रुद्राभिषेक व हवन के पश्चात पूर्ण आहूति व भंडारा हुआ। आचार्य परसाई ने कहा कि रक्षाबंधन पर वृक्ष, कन्या, गौ की रक्षा का संकल्प ले साथ कन्या भू्रण हत्या रोकने का संकल्प भी दिलाया। साथ ही साथ गुरुदेव ने सभी को कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए प्रयास का भी सभी को संकल्प दिलाया। गुरुदेव ने बताया कि इस वर्ष रक्षाबंधन पर पुरे दिन बहने अपने भाई की कलाई पर राखी बाँध सकेंगी। इस वर्ष रक्षा बंधन गुरूवार को है जो कि स्वत: ही शुभ दिन है। मान्यता है कि गुरु बृहस्पति ने देवराज इंद्र को असुरों पर विजय प्राप्त करने के लिए रक्षाबंधन का सुझाव दिया था। इसके बाद से ही इस त्यौहार को मनाने का चलन प्रारम्भ हुआ। आचार्य परसाई ने कहा भद्रा सूर्य की पुत्री और शनि की बहन है शनि के समान वह भी उग्र स्वभाव की हैं। इस उग्र स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए ही ब्रह्मा जी ने उन्हें कालगणना में प्रमुख स्थान दिया है।भद्रा में कुछ शुभ कार्यों का निषेध है किन्तु इस वर्ष सूर्योदय के पूर्व ही भद्रा का साया समाप्त हो जायेगा ।इसलिए पुरे दिन राखी बांधना शुभ रहेगा।

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रक्षाबंधन पर रहेगी राखी बांधने की आजादी, ये रहेंगे मुहूर्त

 

रक्षाबंधन के शुभ मुहूर्त
प्रात: 5.55 से 2.15
दोपहर 3.25 से सूर्यास्त तक

 

यज्ञोपवीतधारी करेंगे श्रावणी उपाकर्म आज
धर्म परंपरा अनुसार श्रावणी उपाकर्म आज से माँ रेवा तट पर सुबह 9.30 बजे से आयोजित होगा। जिसमें दोषों की निवृत्ति के लिए पूज्य गुरुदेव आचार्य सोमेश परसाई के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के द्वारा हेमाद्री संकल्प, दिव्य दस विधी स्नान, देव ऋषि पितृ तर्पण होगा। इसके बाद विध्याचल सेड पर सप्तऋषि पूजन, यज्ञोपवित पूजन व हवन होगा। आचार्य परसाई ने बताया कि श्रावणी उपाकर्म श्रावण पूर्णिमा के दिन को रक्षाबंधन संस्कृति दिवस व श्रावणी कर्म के रूप में मनाया जाता है। आज के दिन भगवान शिव ने संस्कृत व संस्कृति के विस्तार के लिए डमरू का ९ व ५ बार नाद किया था। जिससे संसार की समस्त भाषाओ की उत्पत्ति हुई।

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