कार लूट कर गला घोंट कर शव को यमुना में फेंका

कार लूट कर गला घोंट कर शव को यमुना में फेंका
कार लूट कर गला घोंट कर शव को यमुना में फेंका

poonam soni | Updated: 06 Oct 2019, 12:26:29 PM (IST) Hoshangabad, Hoshangabad, Madhya Pradesh, India

अपहरण व हत्या के आरोपियों को आजीवन कारावास

पिपरिया/ शनिवार को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश आदेश कुमार जैन की अदालत ने सात साल पुराने युवक के अपहरण हत्या के सनसनीखेज मामले में आरोपियों के खिलाफ आजीवन करावास की सजा सुनाई है। आरोपियों को तीन तीन साल का सश्रम कारावास और जुर्माने से दंडित किया है।

यह था मामला
सुभाष वार्ड पिपरिया निवासी रंजीत सिंह पिता गणेश सिंह २० साल २६ जून २०१२ को अपनी निजी कार से घर से सुबह निकला तो फिर वापस घर नही लौटा। बेटे के नही लौटने पर पिता ने मंगलवारा थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस ने पड़ताल शुरु की तो कॉल डिटेल से यह मामला अपहरण और हत्या का निकला। अपर लोक अभियोजक सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि मंगलवारा पुलिस ने जांच के बाद चालान न्यायालय में पेश किया। अपर लोक अभियोजक ने बताया कि आरोपी मुकेश प्रजापति पिता रामबहादुर ३६ साल स्थााई निवासी अंतियनपुरा जिला भिण्ड एवं नरेन्द्र पिता रामबाबू प्रजापति २९ साल स्थाई निवासी ग्राम गोहन जिला जालौन उप्र एवं रामशरण उर्फ चंदू पिता हीरेलाल ४० साल स्थाई निवासी बाड़ी जिला रह्वायसेन ये तीनो पिपरिया स्थित सुभाष वार्ड में रहते थे।

तीनों फुल्की का ठेला लगाते थे
यह तीनों यहां फुल्की का ठेला लगाते थे तीनों की मृतक रंजीत से पहचान वार्ड में रहने की वजह से हो गई थी। २६ जून२०१२ को कार से यह लोग निकले और बरेली के पास कार में बैठे रंजीत का पीछे से गले में गमछा डालकर गला घोंट दिया जिससे उसकी मौत हो गई। लाश को आरोपियों ने डिक्की में रख दिया और कार लेकर जालौन उप्र औरया शेर घाट पुल यमुना नदी पहुंचे और शव को नदी में फैंक दिया था। पुलिस ने पड़ताल के बाद पूरे तथ्य एकत्र कर आरोपियों के खिलाफ चालान न्यायाल पेश किया था।

इन्हे मिली आजीवन कारावास

न्यायालय ने आरोपी मुकेश और नरेन्द्र प्रजापति के खिलाफ दोष सिद्ध होने पर दोनों को आजीवन करावास एवं तीन तीन साल का सश्रम कारावास दिया है। दोनो पर जुर्माना भी किया है। तीसरे आरोपी रामशरण को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त किया गया है।

काल डिटेल से पकड़ाए
पुलिस ने गुमशुदगी के बाद जांच शुरु की तो आरोपियों के साथ कार से रंजीत का जाने की जानकारी मिली। पुलिस ने कॉल डिटेल से आरोपियों को धर दबोचा कार में मिले खून का डीएनए कराया तो मृतक से मेल खा गया। लेकिन पुलिस को मृतक का शव आज तक बरामद नही हो पाया। सुनियोजित साजिश उजागर होने पर पुलिस ने आरोपियो के खिलाफ हत्या,अपहरण का मामल दर्ज कर कोर्ट पेश किया था।

बेटे के गम में पिता ने की आत्म हत्या
मृतक रंजीत छात्र था पिता ने कार दिला दी थी उसे किराए पर चलाकर खर्च चलाता था। पिता गणेश सिंह वन विभाग की झिरिया बीट में वनरक्षक के पद पर कार्यरत थे। बेटे का शव तक नही मिलने से वह डिप्रेशन में रहने लगे। बेटे के विछोह में कुछ दिन बाद ही ट्रेन से कटकर गणेश सिंह ने आत्महत्या कर ली। पूरा परिवार हादसे से छिन्न भिन्न हो गया।

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