सब्जी मंडी में अपात्रों की होगी जांच, दुकान आवंटन निरस्त करेगी नगरपालिका

-सब्जी मंडी में अतिरिक्त दुकान आवंटन का मामला

-पीआईसी की अंतिम बैठक में प्रस्ताव किया पारित
-भगवान भरोसे रहेेंगे अब गलत तरीके से दुकान लेने वाले

इटारसी। इटारसी शहर की सब्जी मंडी में अतिरिक्त दुकानें बनाकर अपात्रों को देने के मामले में कई शिकायतें हुईं हैं। इन शिकायतों को नगरपालिका के जिम्मेदार समय-समय पर गलत बताते रहे और अपना बचाव करते रहे मगर नपा परिषद का कार्यकाल खत्म होने से पहले नपाध्यक्ष सुधा अग्रवाल की अध्यक्षीय परिषद ने सब्जी मंडी के अपात्रों की जांच कराने और अपात्रों को सूची से अलग करने का प्रस्ताव पारित करते हुए काजल की कोठरी से दूर रहने का पत्ता फेंककर खुद को पूरे मामले से अलग कर लिया है। इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद अब सब्जी मंडी में दुकान आवंटन मामले की जांच नए सिरे से होगी और अपात्रों के आवंटन निरस्त होने की कार्रवाई भी होगी।
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यह लिया पीआईसी ने निर्णय
पीआईसी की बैठक में प्रस्ताव क्रमांक 31 में यह निर्णय हुआ है कि सब्जी मंडी की दुकानों के आवंटन के सिलसिले में कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इसलिए सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया जाता है कि उक्त सूची में शामिल व्यवसायियों की पात्रता की जांच कराई जाएगी और उसमें शामिल अपात्र व्यवसायियों को सूची से बाहर किया जाएगा।
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यह है मामला
वर्ष 2015 से पहले शहर की सब्जी मंडी में कुल ९३ दुकानें थीं। इनमें कच्ची दुकानें ३९, खपरैल की दुकानें 16, फल दुकानें 20, आढ़त की दुकानें 18 शासकीय अभिलेख में दर्ज थीं। नपा ने कच्ची दुकानों को पक्की करने के नाम पर मंडी में १४२ दुकानें बना डालीं। इनमें ४९ दुकानें अनियमित/अवैधानिक तरीके से बनाई गईं और उन्हें शासन को करोड़ों रुपए की चपत लगाकर अपात्रों को भी आवंटित किया गया।
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पीएमओ से राज्य शासन तक शिकायत
सब्जी मंडी में बिना अनुमति अतिरिक्त दुकान बनाने और अपात्रों को उसका आवंटन करने की शिकायत भाजपा पार्षद यज्ञदत्त गौर ने पीएमओ कार्यालय से लेकर राज्य शासन के नगरीय प्रशासन विभाग तक वर्ष 2017 में की थी। शिकायकर्ता ने शिकायत में कहा था कि अतिरिक्त दुकानें बनाकर अपात्रों को आवंटन किया गया है जिससे शासन को आर्थिक नुकसान हुआ है इसलिए मामले में जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
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संभाग आयुक्त के आदेश की भी अनदेखी
सब्जी मंडी की दुकानों की शिकायत के मामले में ही
नगरीय प्रशासन आयुक्त नर्मदापुरम संभाग ने नपा कार्यालय को ४ जनवरी 2019 को आदेश दिया था कि चार बिंदुओं पर कार्रवाई कर पालन प्रतिवेदन भेजें मगर इटारसी नपा के जिम्मेदार अफसरों ने हवा में उड़ा दिया है।
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शिकायत के यह थे प्रमुख बिंदु
-वर्ष 2015-16 तक सब्जी मंडी की दुकान किराया संग्रहण पंजी में कुल ३९ दुकानदार दर्ज थे मगर पंजी में कांटछांट कर क्रमांक ४१ से क्रमांक ५२ तक नए नामों की जांच हो।
-गोपीचंद मामराज नामक व्यवसायी शहर में ही नहीं है इस नाम की दुकान का नामांतरण रतनचंद्र धीरेंद्र के नाम से होना।
-किराया संग्रहण पंजी में क्रमांक 40 पर दर्ज हमीद अब्दुल अजीज के बाद दर्ज की गई टीप और उसमें कांट-छांट कर अन्य नाम जोड़ा जाना।
-पंजी के क्रमांक 30 के क्रमांकों को ओवर राइटिंग कर बदला जाना।
-पूर्व से निश्चित २० फल दुकानों की जगह 22 दुकानें और आढ़त की 20 दुकानों की जगह 22 दुकानों का निर्माण होना।
-जोड़े गए नए नामों का वर्ष 2015 से पहले का किराया जमा नहीं होना और उन्हें कोई नोटिस जारी नहीं होना।
-किराया संग्रहण पंजी के 4-4 नाम से अधिक नाम वाले पृष्ठों पर हाथ से नाम लिखे जाना।
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सभापति रहते दी स्वीकृति, बाद में बने शिकायतकर्ता
सब्जी मंडी की कच्ची दुकानों के व्यवस्थापन का प्रस्ताव सबसे पहले जिस अध्यक्षीय परिषद में आया था उस परिषद में स्वास्थ्य सभापति के तौर पर रहते शिकायतकर्ता पार्षद ने इस प्रस्ताव पर सहमति दी थी मगर बाद में तालमेल नहीं बैठने से उन्होंने सब्जी मंडी मामले की शिकायत कर दी थी जिससे उनका सभापति पद चला गया था। इसके बाद भाजपाशासित नपा के खिलाफ मोर्चा खोलने पर उन्हें भाजपा के जिलाध्यक्ष ने नोटिस भी जारी किया था।
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इनका कहना है
हम शुरू से ही कहते आ रहे थे कि सब्जी मंडी में अपात्रों को दुकानें आवंटित हुई हैं मगर उसे दबाने का प्रयास हो रहा था। अब पीआईसी का अपात्रों की जांच करने का पास किया प्रस्ताव साबित करता है कि हमारी शिकायत सही थी। इसमें निष्पक्ष जांच होगी तो अपात्रों के नाम सामने आ जाएंगे।
यज्ञदत्त गौर, शिकायतकर्ता पार्षद

दिसंबर माह में जो अंतिम पीआईसी हुई है उसमें सब्जी मंडी की दुकानों के मामले में व्यवयासियों की सूची की जांच कराने का निर्णय लिया गया है। जांच टीम का गठन वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा ही किया जाएगा।
बीएल सिंगवाने, आरआई इटारसी नपा

Rahul Saran Reporting
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