रिजर्व बैंक की नई घोषणा, फंड ट्रांसफर करने वालों को होगा फायदा, जानें क्या है खास

एक जुलाई से एनएफटी और आरटीजीएस पर नहीं लगेगा पैसा

By: sandeep nayak

Published: 16 Jun 2019, 05:29 PM IST

इटारसी। रिजर्व बैंक ने उपभोक्ताओं को राहत देते हुए फंड ट्रांसफर को शुल्क मुक्त करने की घोषणा की है। अब एनएफटी और आरटीजीएस से फंड ट्रांसफर पर शुल्क नहीं लगेगा। वर्तमान में इस पर शुल्क लगता है, जोकि 5 रुपए से लेकर 50 रुपए तक लगता है। रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों से कहा कि एक जुलाई से ग्राहकों को इसका लाभ देना शुरू करें। रिजर्व बैंक के इस फैसले का शहर के व्यापारियों ने स्वागत किया है।
नए नियमों के तहत एक जुलाई से ग्राहकों को आरटीजीएस और एनईएफटी के जरिए से पैसा ट्रांसफर करने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। बैंके, रीयल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट सिस्टम (आरटीजीएस) से बड़ी राशियों को एक खाते से दूसरे खाते में तत्काल ट्रांसफर करने की सुविधा देती है। एनईएफटी से दो लाख रुपये तक की राशि भी तुरंत ट्रांसफर हो जाती है। वर्तमान में एसबीआई एनईएफटी से ट्रांसफर पर एक से पांच और आरटीजीएस से राशि ट्रांसफर पर पांच से 50 रुपए का शुल्क लेता है।

डिजीटल इंडिया की ओर बढ़ता कदम
रिजर्व बैंक के इस फैसले का शहर के व्यापारियों व आम लोगों ने स्वागत किया। व्यापारियों ने कहा कि यह डिजीटल इंडिया को बढ़ावा देने के लिए अच्छा कदम है। भविष्य में स्वेप मशीन से डेबिट व क्रेडिट कार्ड से पैसे ग्राहकों से लेने पर व्यापारियों पर लगने वाला शुल्क और हटा दें। इससे कैशलेस व्यवस्था और मजबूत होगी।

एक जुलाई से आरटीजीएस व एनईएफटी से पैसे ट्रांसफर करने का शुल्क हटाने का रिजर्व बैंक का फैसला बहुत अच्छा है। इससे डिजीटिल इंडिया को बढ़ावा मिलेगा। आने वले समय में स्वेप मशीन से भी पैसे लेने का शुल्क हटाना चाहिए।
- रजत मिश्रा, बिजनेसमेन, इटारसी
मैं हमेशा आरटीजीएस व एनईएफटी से ही पैसे ट्रांसफर करता हूं। एक जुलाई से शुल्क हटने से काफी लाभ मिलेगा। इससे जहां ऑनलाइन पैमेंट को बढ़ावा मिलेगा। वही कैशलेस व्यवस्था और मजबूत होगी।
- आलोक चौधरी, ट्रैक्टर व्यवसायी, इटारसी।
डिजीटल का पहले समय 4 बजे तक ही था, लेकिन अब आरबीआई लेन -देन करने को शुल्क मुक्त कर रहा है। इससे व्यापारियों को निश्चित तौर पर फायदा होगा। इसके साथ ही डिजीटल पैमेंट कर सकते हैं। इससे चैक बाउंस की संभावना भी खत्म हो जाएगी।
- विवेक साहू, प्रदेश प्रवक्ता, कैट

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sandeep nayak Desk/Reporting
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