कम वोट मिलने पर क्षेत्र का विकास रोकने का आरोप

कम वोट मिलने पर क्षेत्र का विकास रोकने का आरोप

Sandeep Nayak | Publish: Sep, 16 2018 12:28:07 PM (IST) Hoshangabad, Madhya Pradesh, India

मैं देखता चला गया..

 

विधानसभा क्षेत्र- सोहागपुर(138)

बीकोर- सबसे अधिक वोट वाले केंद्र पर बही विकास की गंगा

मतदान केंद्र क्रमांक- 10
2013 में मतदान- 1160

भाजपा को मिले वोट- 911
सोहागपुर। विधानसभा क्षेत्र में दो तरह की तस्वीर देखने को मिली। जहां भाजपा विधायक विजयपाल सिंह को सर्वाधिक वोट मिले थे, वहां दो बड़ी सौगातें दी, फिर भी यहां नल जल योजना शुरू नहीं होने से लेकर खराब सड़कों की समस्या बनी हुई है। दूसरी तरफ जहां विधायक को सर्वाधिक कम वोट मिले थे और कांग्रेस को सबसे ज्यादा वह क्षेत्र उपेक्षा का शिकार है। ग्रामीणों का आरोप है कि कम वोट मिलने के कारण विधायक ने विकास कार्य रोक दिए गए। वरना यह पंचायत सबसे पहले खुले में शौच मुक्त हुई थी।

गंदगी और खराब सड़कों से परेशान

विधानसभा क्षेत्र का बूथ क्रमांक दस। ग्राम बीकोर के इस बूथ पर पिछले चुनाव में भाजपा को सर्वाधिक वोट मिले थे। गांव की आबादी तीन हजार है। यहां बिजली सब स्टेशन बना और रसोई गैस एजेंसी भी डेवलप हुई है। मंगल भवन भी बना है। ग्रामीण बताते हैं यह तीन काम हुए है लेकिन अब तक नल-जल योजना का शुभारंभ नहीं हो सका है।गांव की सड़कों के भी बुरे हाल हैं। बारिश में यह कीचड़ में तब्दील हो जाती हैं। पंचायत भवन भी पांच साल में नहीं बन सका। यहां खेतीहर किसान और छुट-पुट व्यापारी रहते हैं। यही इनकी आजीविका का साधन है। वे कहते हैं, मोहल्ले में गंदगी और नाली से परेशान हैं। ठाकुर व ब्राम्हण बाहुल्य क्षेत्र में इस बार भी भाजपा अपने काम की बदौलत अच्छे वोट मिलने का दावा कर रही है।

 

गलचा- कम वोट मिले तो थम गया विकास
मतदान केंद्र क्रमांक- 180

2013 में मतदान- 724
कांगे्रेस को मिले वोट- 694

सोहागपुर विधानसभा के गलचा गांव का बूथ क्रमांक 180। यहां गांव पिछले चुनाव में कांगे्रसी प्रत्याशी रहे रणवीर सिंह पटेल का गृह ग्राम। इस कारण उन्हें सर्वाधिक वोट मिले थे। लेकिन कांग्रेस को वोट ज्यादा देना ही ग्रामीणों को भारी पड़ गया। भाजपा विधायक ने गांव के विकास की तरफ ध्यान नहीं दिया। पूरे पांच साल ग्रामीण गांव के विकास की राह ताकते रहे। जबकि यह वही ग्राम पंचायत है जो वर्ष 2017 में जिले में सबसे पहले ओडीएफ (खुले से शौच मुक्त) घोषित हुई थी। चर्चा है कि घर-घर में शौचालय बनाने में ग्राम पंचायत की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके अलावा गांव में पांच सालों में कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं किया गया है। गांव में प्रवेश करने वाली मुख्य सड़क खस्ताहाल है। जगह-जगह कीचड़ हो रही है। स्कूल भवन पुराना और जर्जर हालत में है। बावजूद बच्चे इसी भवन में पढ़ाई कर रहे हैं। खेतों में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। बिजली भी समय पर नहीं मिल रही है। लगभग 1200 आबादी वाले गलचा गांव में दलित, आदिवासी, माझी समाज और गूर्जर समाज सर्वाधिक है।

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