साल में एक बार इस दिन मध्यरात्रि में कम वस्त्रों में घूमने से मिलती है ऐसी शक्ति, की जानकर आप भी हो जाएगें हैरान

साल में एक बार इस दिन मध्यरात्रि में कम वस्त्रों में घूमने से मिलती है ऐसी शक्ति, की जानकर आप भी हो जाएगें हैरान
साल में एक बार इस दिन मध्यरात्रि में कम वस्त्रों में घूमने से मिलती है ऐसी शक्ति, की जानकर आप भी हो जाएगें हैरान

poonam soni | Updated: 12 Oct 2019, 08:18:53 PM (IST) Hoshangabad, Hoshangabad, Madhya Pradesh, India

30 साल बाद बनेगा चंद्र-मंगल का दृष्टि संबंध, जल्दी करें यह उपाय नहीं तो एक साल करना होगा इंतजार

होशंगाबाद। हिंदू पंचांग के अनुसार अश्विन माह की शुरुआत से कार्तिक महीने के अंत तक शरद ऋतु रहती है। शरद ऋतु में 2 पूर्णिमा पड़ती है। इनमें अश्विन माह की पूर्णिमा महत्वपूर्ण मानी गई हैं। इसी पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। आचार्य सोमेश परसाई के अनुसार आज सूर्य, चंद्र और गुरू का गज केशरी योग बन रहा है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार आज से शरद पूर्णिमा का पर्व शुरू हो रहा है। इस दिन चंद्रमा १६ कलाओं से युक्त होता है। इस पूर्णिमा पर चावल और दूध से बनी खीर को चांदनी रात में रखकर सुबह ४ बजे सेवन करने से दमा और अन्य रोगो से मुक्ति मिलती है। यह औषधिय के रूप में काम करती है। साथ ही रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। शरद पूर्णिमा पर 30 साल बाद दुर्लभ योग बन रहा है। ये शुभ योग चंद्रमा और मंगल के आपस में दृष्टि संबंध होने से बन रहा है। जिसे महालक्ष्मी योग कहा जाता है। शरद पूर्णिमा पर इस शुभ योग के बनने से ये पर्व और ज्यादा खास हो जाएगा।

कोजागरी पूर्णिमा भी कहते हैं
अश्विन माह की इस पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहते हैं। माना जाता है कि इस तिथि पर देवी लक्ष्मी पृथ्वी का भ्रमण करती हैं और जो जाग कर देवी की पूजा करता है उस पर माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। इस शरद पूर्णिमा पर महालक्ष्मी योग में देवी की पूजा करने का सौभाग्य 30 साल बाद मिल रहा है। जिससे इस साल शरद पूर्णिमा पर स्वास्थ्य के साथ आर्थिक स्थिति में भी सुधार होने के योग बन रहे हैं।

ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति
इस साल शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा मीन राशि और मंगल कन्या राशि में रहेगा। इस तरह दोनों ग्रह आमने-सामने रहेंगे। वहीं मंगल, हस्त नक्षत्र में रहेगा। जो कि चंद्रमा के स्वामित्व वाला नक्षत्र है। इससे पहले ग्रहों की ऐसी स्थिति 14 अक्टूबर 1989 में बनी थी। हालांकि 6 अक्टूबर 2006 और 20 अक्टूबर 2002 में भी चंद्रमा और मंगल का दृष्टि संबंध बना था, लेकिन मंगल, चंद्रमा के नक्षत्र में नहीं था। इनके अलावा चंद्रमा पर बृहस्पति की दृष्टि भी पडऩे से गजकेसरी नाम का एक और शुभ योग भी बन रहा है।

महत्वपूर्ण काम करने का दिन
पूर्णा तिथि और महालक्ष्मी योग बनने से शरद पूर्णिमा पर खरीदारी और नए काम शुरू करना शुभ रहेगा। इस शुभ संयोग में प्रॉपर्टी, निवेश और महत्वपूर्ण लेन-देन करने से धन लाभ होने की संभावना और बढ़ जाएगी। जॉब और बिजनेस करने वाले लोगों के लिए पूरा दिन फायदेमंद रहेगा। इसके साथ ही सेविंग भी बढ़ेगी। इस दिन पद ग्रहण करना या नया दायित्व लेना भी शुभ है। इस दिन किए गए काम लंबे समय तक फायदा देने वाले रहेंगे।

चंद्रमा से बढ़ जाता है औषधियों का प्रभाव
रद पूर्णिमा पर औषधियों की स्पंदन क्षमता अधिक होती है। यानी औषधियों का प्रभाव बढ़ जाता है रसाकर्षण के कारण जब अंदर का पदार्थ सांद्र होने लगता है, तब रिक्तिकाओं से विशेष प्रकार की ध्वनि उत्पन्न होती है। लंकाधिपति रावण शरद पूर्णिमा की रात किरणों को दर्पण के माध्यम से अपनी नाभि पर ग्रहण करता था। इस प्रक्रिया से उसे पुनर्योवन शक्ति प्राप्त होती थी। चांदनी रात में 10 से मध्यरात्रि 12 बजे के बीच कम वस्त्रों में घूमने वाले व्यक्ति को ऊर्जा प्राप्त होती है। सोमचक्र, नक्षत्रीय चक्र और आश्विन के त्रिकोण के कारण शरद ऋतु से ऊर्जा का संग्रह होता है और बसंत में निग्रह होता है।

क्यों बनाई जाती है खीर
वैज्ञानिकों के अनुसार दूध में लैक्टिक अम्ल और अमृत तत्व होता है। यह तत्व किरणों से अधिक मात्रा में शक्ति का शोषण करता है। चावल में स्टार्च होने के कारण यह प्रक्रिया और भी आसान हो जाती है। इसी कारण ऋषि-मुनियों ने शरद पूर्णिमा की रात्रि में खीर खुले आसमान में रखने का विधान किया है और इस खीर का सेवन सेहत के लिए महत्वपूर्ण बताया है। इससे पुनर्योवन शक्ति और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह परंपरा विज्ञान पर आधारित है।


क्या करें शरद पूर्णिमा पर
- इस रात में ग्रहण की गई औषधि बहुत जल्दी लाभ पहुंचाती है।
- शरद पूर्णिमा पर चंद्र की किरणें भी हमें लाभ पहुंचाती हैं। इसलिए इस रात में कुछ देर चांद की चांदनी में बैठना चाहिए। ऐसा करने पर मन को शांति मिलती है। तनाव दूर होता है।
शरद पूर्णिमा की रात घर के बाहर दीपक जलाना चाहिए। इससे घर में सकारात्मकता बढ़ती है।
- शरद पूर्णिमा की चांद को खुली आंखों से देखना चाहिए। क्योंकि इससे आंखों की समस्या नहीं होती।
- पूरे दिन व्रत रखें और पूर्णिमा की रात्रि में जागरण करें। व्रत करने वाले को चन्द्र को अघ्र्य देने के बाद ही अन्न ग्रहण करना चाहिए।

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