Rakshabandhan 2019: श्रीनगर में तैनात भाई को न राखी भेज पा रही और न हो रही बात, सूनी रहेगी कलाई

रक्षाबंधन पर सैनिकों की बहनों का दर्द

By: poonam soni

Updated: 15 Aug 2019, 10:15 AM IST

पूनम सोनी/होशंगाबाद. यह है पतलई गांव। इस गांव के 18 बेटे सेना में अलग-अलग जगह पर तैनात हैं। 5 जवान रिटायर्ड हो चुके हैं। इनके परिजनों के साथ पूरे गांव को इन पर गर्व है। लेकिन निराशा इस बात की है कि इस बार इनमें से अधिकांश जवान जम्मू-कश्मीर में तैनात हैं, इस कारण इस बार श्रीनगर में तैनात जवानो की बहनों की राखी उन तक नहीं पहुंच पा रही हैं। धारा 370 हटाने के बाद श्रीनगर में डाक जाने तक पर रोक लगी हुई है। जो जम्मू में तैनात हैं, उनकी राखियां ही डॉक विभाग भेज रहा है।

 

इस गांव का हर घर का बेटा आर्मी जवान
होशंगाबाद शहर से 28 कि.मी दूर पतलई गांव है। यहां के 23 लोग सेना में हैं। इनमें से 18 अभी विभिन्न स्थानों पर तैनात हैं। गांव के रिटायर्ड आर्मी जवान कौशल सिंह राजपूत के अनुसार गांव के यह जवान जम्मू-कश्मीर, पुलवामा, किश्तवाड, अनंतनम, श्रीनगर, कारगिल, गुहाटी, हिमाचल प्रदेश, विदेश यात्रा, पंजाब में तैनात हैं। डाक श्रीनगर नहीं जाने के कारण यहां के ज्यादातर जवानोंं को राखी नहीं भेजी जा सकी। आर्मी जवान छत्रपाल सिंह राजपूत ने बताया कि पिछले सप्ताह तक जम्मू में डाक भेजी जा सकती थी।

 

17 साल बाद आज बंधवाएंगे राखी
रिटायर्ड सैनिक कैशल सिंह राजपूत की कलाई पर इस बार 17 साल बाद उनकी बहन अपने हाथों से राखी बांधेगी। उनकी सभी बहन इस बार पहले से ही जोर-शोर से तैयारियों में लगी हुई हैं। कौशल 17 साल की उम्र में ही सेना में भर्ती हो गए थे। 17 साल की देश सेवा में सिर्फ दो बार ही उनकी कलाई पर राखी बंध पाई थी। वह अप्रैल में सियाचिन ग्लोरियर से रिटायर्ड हुए हैं। बहन हर साल डॉक से राखी भेजती थीं, जो साथी जवान उनकी कलाई पर बांधते थे।

 

न राखी गई और न बात हो पा रही
जम्मू और कश्मीर में तैनात सैनिकों के लिए पतलई गांव की बहनों ने डाक से राखी भेजी है। धामनी की सीमा राजपूत ने बताया कि उनके भाई श्रीनगर कब्बाड़ा में हैं। डाक नहीं जाने के कारण राखी नहीं जा सकी। कई दिनों से नेटवर्क नहीं मिलने से भाई से बात नहीं हो पाई।

Show More
poonam soni
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned