कुंभ मेले के बाद भी संगम की रेती से नहीं लौटेगा कोई भूखा, इस शख्स ने लिया अनोखा संकल्प

दाल और भात दोनों को पकाने में पानी का इस्तेमाल किया जाता है ऐसे में वह पानी गंगा मैया का हो तो पवित्रता और बढ़ जाती है।

Priya Singh

18 Feb 2019, 10:11 AM IST

नई दिल्ली। 'वेदना में असीम शक्ति होती है न कोई जात-पात, भईया जी का दाल-भात।' ऐसा कहना है 'भईया जी का दाल-भात' के आयोजक संत गुड्डू भइया का। भारतीय संस्कृति में दाल-भात रिश्तों की मजबूत संवेदना का संबल माना जाता है। दाल और भात दोनों को पकाने में पानी का इस्तेमाल किया जाता है ऐसे में वह पानी गंगा मैया का हो तो पवित्रता और बढ़ जाती है। कुंभ क्षेत्र से कोई भूखा ना जाए इसके लिए काली मां के भक्त ने 'भईया जी का दाल-भात' नाम से अन्न सेवा शुरू की है। यह अन्न क्षेत्र वर्ष के पूरे 12 माह तक चलेगा। मां काली शक्ति साधना की ओर से संचालित इस संस्था ने इस अभियान को पूरे एक वर्ष तक चालाने का संकल्प लिया है।

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इस केंद्र के संत गुड्डू भइया ने कहा कि कुम्भ मेला में आने वाले हर एक व्यक्ति को भोजन मिले, कोई भी इंसान यहां से भूखा ना जाए, ऐसा हमारी संस्था ने संकल्प किया है। उन्होंने कहा, "संगम तट पर पहुंचने वाला कोई भी शख्स भूखा नहीं जाए। कुंभ के बाद भी हर भूखे को भोजन मिले। संगम तट पर पूरे वर्ष भर अन्न क्षेत्र चलना चाहिए। इसकी जरूरत कुंभ मेले की तैयारी शुरू होने के साथ ही महसूस की गई। फिर हम लोगों ने यह अभियान शुरू किया।" संस्था के सदस्य गुड्डू ने बताया, "जब तक मेला चल रहा है, तब तक कहीं न कहीं भंडरा या संत के यहां लोग भोजन कर लेते हैं। उसके बाद यहां से लोग भूखे लौट जाते हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। क्योंकि अब यहां पूरे समय दाल-भात का अन्न क्षेत्र चलेगा।"

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