27 अक्टूबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

दुर्गा मां की प्रतिमा बनाने के लिए क्यों की जाती है ‘कोठे की मिट्टी’ इस्तेमाल? हिलाकर रख देगी ये सच्चाई

इसके आलावा एक मान्यता भी है कि, प्राचीन काल में एक वेश्‍या मां दुर्गा की अन्‍नय भक्‍त थी उसे तिरस्कार से बचाने के लिए मां ने खुद आदेश दिया था।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

नई दिल्ली

•

image

Priya Singh

•

Updated: 4 Oct 2018, 5:58 PM IST

why soil from outside harlot home used to make durga idol

दुर्गा मां की प्रतिमा बनाने के लिए क्यों की जाती है 'कोठे की मिट्टी' इस्तेमाल? हिलाकर रख देगी ये सच्चाई

नई दिल्ली। जहां शरदीय नवरात्र और दुर्गोत्सव को लेकर मूर्तिकार देवी प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। वहीं कोलकाता के मूर्तिकार पिछले 25 साल से इस काम में लगे हुए हैं। वे परंपरा अनुसार, तवायफ के कोठे की मिट्टी मिलाकर यह प्रतिमा तैयार करते हैं। इसी दिशा में दुर्गा मूर्ति स्थापना के लिए समितियों की ओर से मूर्तियों की बुकिंग भी प्रारंभ हो गई है। इस बीच हालांकि महंगाई की मार भी इन पर पड़ रही है। इस वर्ष शारदीय नवरात्र 10 अक्टूबर से प्रारंभ हो रही है। लोगों में काफी उत्साह है। दुर्गा की मूतियों को मूर्त रूप देने के लिए इन दिनों बंगाल से आए मूर्तिकार दिन-रात काम में जुटे हुए हैं। बंगाल के कृष्णा नगर कोलकाता से आए मूर्तिकार शंकर पाल ने बताया कि, उनकी तीन पीढ़ियां इस काम को करती आ रही हैं। वे स्वयं 13 साल की उम्र से मूर्ति बनाने का काम कर रहे हैं। पिछले 25 वर्षो से वे जिले में मूर्ति बनाने का काम करते आ रहे हैं। साल में 7-8 माह गणेश, विश्वकर्मा व दूर्गा की मूर्तियां बनाने के बाद बंगाल लौट जाते हैं।

उन्होंने बताया कि मूर्ति निर्माण में हसदेव नदी के किनारे की मिट्टी का उपयोग किया जा रहा है। मूर्ति में विशेष आभा के साथ चमक बढ़ाने के लिए बंगाल से विशेष प्रकार की दूध मिट्टी का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा परम्परानुरूप तवायफ के कोठे की मिट्टी भी वे साथ लेकर आते हैं। इस मिट्टी को प्रतिमा बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली मिट्टी में मिलाया जाता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि, क्यों कोठे की ही मिट्टी का इस्तेमाल देवी मान की मूर्ति बनाने में किया जाता है। मान्यता ये भी है कि जब एक महिला या कोई अन्‍य व्‍यक्‍ति वेश्‍यालय के द्वार पर खड़ा होता है तो अंदर जाने से पहले अपनी सारी पवित्रता और अच्‍छाई को वहीं छोड़कर प्रवेश करता है, इसी कारण यहां की मिट्टी पवित्र मानी जाती है। इसके आलावा यह मान्यता है कि, प्राचीन काल में एक वेश्‍या मां दुर्गा की अन्‍नय भक्‍त थी उसे तिरस्कार से बचाने के लिए मां ने स्‍वंय आदेश देकर उसके आंगन की मिट्टी से अपनी मूर्ति स्थापित करवाने की परंपरा शुरू करवाई।