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बाजरा में फाइबर, आयरन और कार्बोहाइड्रेट जैसे पोषक तत्व, स्नैक्स व मिठाइयों में हो रहा उपयोग

कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक ने दी जानकारी

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Karnataka millet farmers

Karnataka millet farmers

अन्य खाद्यान्नों की तुलना में बाजरा में फाइबर, आयरन और कार्बोहाइड्रेट जैसे पोषक तत्व के साथ-साथ एंटी-ऑक्सीडेंट और प्रतिरक्षा बूस्टर भी अधिक होते हैं। बाजरा उन लोगों के लिए पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करता है जिन्हें अन्य खाद्य पदार्थों से आवश्यक पोषण नहीं मिल पाता है। शहरी लोगों को भी बाजरा पसंद आ रहा है। बाजरा का उपयोग करके तैयार की गई मिठाइयों और स्नैक्स की मांग बढ़ गई है। राज्य सरकार बाजरा की खेती को प्रोत्साहित कर रही है, वहीं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत भी बाजरा उगाने को बढ़ावा दिया जा रहा है। किसानों, उद्यमियों और ग्राहकों के बीच बेहतर जागरुकता पैदा करने के लिए जिला, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाजरा मेलों का आयोजन किया जा रहा है। जनवरी में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय बाजरा मेले से पहले बाजरा उत्सव, बाजरा रोड शो और अन्य जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
जिले में एक हजार हेक्टेयर पर बाजरा उगा रहे
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक किरणकुमार एम ने कहा, जिले में 800 से 1,000 हेक्टेयर भूमि पर बाजरा उगाया जा रहा है और बाजरा उगाने वाले किसानों को सहायता दी जा रही है। जिले में किसानों को बाजरा उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसका कृषि इतिहास लगभग 5,000 वर्षों का है। रायथासिरी योजना के तहत उदालु, नवाने, हरका, कोराले, सामे और बारागु जैसे बाजरा उगाने वाले किसानों को 10,000 रुपए प्रति हेक्टेयर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण पद्धति से दी जा रही है और यह लाभ प्रति किसान दो हेक्टेयर तक सीमित है। बाजरा प्राथमिक प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए पात्र किसानों, उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों और अन्य फर्मों को दो किश्तों में 50 फीसदी या अधिकतम 10 लाख रुपए की सब्सिडी दी जा रही है।
कम वर्षा की जरूरत
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों का औपचारिकीकरण योजना के तहत बाजरा आधारित खाद्य उत्पाद प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए 50 फीसदी या अधिकतम 15 लाख रुपए की सब्सिडी उपलब्ध है। यह देखते हुए कि बाजरा वर्तमान में प्रमुख खाद्य फसल बन रहा है। बाजरा कम वर्षा और कम मिट्टी की उर्वरता वाले क्षेत्रों में भी उगता है, जबकि इसे उगाने के लिए न्यूनतम उपकरणों की आवश्यकता होती है। किरणकुमार ने कहा कि ये कार्यक्रम युवा पीढ़ी को बाजरा के महत्व के बारे में शिक्षित करने, किसानों को उत्पादकता बढ़ाने वाली तकनीकों के बारे में जागरूक करने और उत्पादकों, विक्रेताओं और अन्य हितधारकों को जोडऩे में मदद करेंगे।