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दिव्यांग बच्चों ने दिखाई प्रतिभा

locationहुबलीPublished: Jan 15, 2024 07:41:44 pm

गीत, नाटक व नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति

Otaramji Fan Club
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दिव्यांग बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुति देकर सबको अचंभित कर दिया। इन्होंने जता दिया कि पंखों से कुछ नहीं होता हौसलो से उड़ान होती है। दिव्यांग विद्यार्थियों ने नृत्य की बेहतरीन प्रस्तुति दी। अयोध्या में 22 जनवरी को श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा होने वाली है और इस मौके पर दिव्यांग विद्यार्थियों ने भी राम, लक्ष्मण, सीता व हनुमान की भूमिका में बेहतरीन प्रस्तुति दी। इसके साथ ही गीत, नाटक व नृत्य की विविध प्रस्तुतियों के जरिए दिव्यांगों ने अपनी प्रतिभा दिखाई। ओटारामजी फैन क्लब (सिरोही) हुब्बल्ली के तत्वावधान में यहां न्यू गबुर रोड जैन दादावाड़ी के पास स्थित विश्वकर्मा महिला एवं मक्कल हैंडिकैप्ड स्कूल के दिव्यांग बच्चों की प्रतिभाओं को निखारने एवं उन्हें रचनात्मक गतिविधियों से जोडऩे के मकसद से सांस्कृतिक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। दिव्यांग बच्चों ने एक से बढ़कर एक कार्यक्रम प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। गुजरात बनासकांठा के डेढा से आए सधी माता के उपासक वीनू भोपाजी (भुआजी) समारोह के मुख्य अतिथि थे। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को आकर्षक पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही अन्य सभी विद्यार्थियों को भी कलर, पेन, बिस्किट एवं चॉकलेट का वितरण किया गया। सभी को मिष्ठान का वितरण करने के साथ ही भोजन करवाया गया।
हौसले से मिलती है सफलता
ओटारामजी फैन क्लब के सदस्य रतन देवासी सिलदर ने कहा कि ओटारामजी फैन क्लब का यह पहला कार्यक्रम आयोजित किया गया है। समय-समय पर इस तरह के आयोजन भविष्य में भी किए जाएंगे। ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन से दिव्यांगजनों का उत्साहवद्र्धन होता है। अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलती है। अगर मन में कुछ करने का जुनून एवं हौसला हो तो सफलता जरूर मिलती है। दिव्यांग बच्चों की प्रतिभाओं को निखारने की जरूरत है। समारोह में देवासी समाज के मालाराम देवासी बिठूजा ने कहा कि विशेष रूप से अक्षम बच्चों में कई प्रतिभाएं छिपी होती हैं। इन प्रतिभाओं की पहचान करके ऐसे बच्चों को स्वावलंबी बनाया जा सकता है। विशेष बच्चों और उनके अभिभावकों को मायूस होने के बजाय अपनी शक्तियों को पहचानना चाहिए तथा इन्हीं के आधार पर प्रशिक्षण प्राप्त करके समाज की मुख्य धारा में शामिल होना चाहिए। इस तरह की दिव्यांगता के शिकार लोगों को विशेष रूप से प्रशिक्षित करके भी स्वावलंबी बनाया जा सकता है।
कई गणमान्य लोग थे मौजूद
इस अवसर पर मालाराम बिठुजा, कोलाराम पादरा, निर्मल सनपुर, भावाराम सियाकरा, किरण पोसिन्द्रा, त्रिलोक बग, रतन सिलदर, प्रकाश आमलारी, तेजाराम जेला, दिनेश मडिय़ा, नवीन मेर-मंडवाडा, हीराराम आमलारी, पिराराम मडिय़ा, नवाराम फलवदी, ओबाराम बग, सांवलराम थापन, मोहन थापन, वीराराम काकेन्द्रा समेत राजस्थान व गुजरात से आए कई देवासी बन्धु मौजूद थे।

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