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लक्ष्य तक नहीं पहुंच रहा राजस्व संग्रह

locationहुबलीPublished: Feb 13, 2024 09:57:24 am

Submitted by:

Zakir Pattankudi

उत्तर कन्नड़ जिले में संपत्ति पंजीकरण की मात्रा पिछले वर्ष की तुलना में कम हुई है, जिसके कारण उप-पंजीयक कार्यालयों के जरिए एकत्र किया जाने वाला राजस्व विशिष्ट लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाया है।
सरकार हर साल पंजीकरण एवं मुद्रांक विभाग को राजस्व वसूली का एक विशेष लक्ष्य देती है।

लक्ष्य तक नहीं पहुंच रहा राजस्व संग्रह
लक्ष्य तक नहीं पहुंच रहा राजस्व संग्रह
सुविधाओं की कमी, संपत्ति पंजीकरण घटा
77.4 करोड़ रुपए लक्ष्य, मात्र 58.05 करोड़ रुपए ही संग्रह
हुब्बल्ली. उत्तर कन्नड़ जिले में संपत्ति पंजीकरण की मात्रा पिछले वर्ष की तुलना में कम हुई है, जिसके कारण उप-पंजीयक कार्यालयों के जरिए एकत्र किया जाने वाला राजस्व विशिष्ट लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाया है।
सरकार हर साल पंजीकरण एवं मुद्रांक विभाग को राजस्व वसूली का एक विशेष लक्ष्य देती है।
77.4 करोड़ रुपए लक्ष्य
वित्तीय वर्ष के दौरान इस लक्ष्य को हासिल करने का दबाव है। पिछले वित्तीय वर्ष में जिले के दस उप पंजीयन कार्यालयों एवं जिला पंजीयन कार्यालय समेत कुल 62 करोड़ रुपए राजस्व वसूली का लक्ष्य दिया गया था। 69.67 करोड़ रुपए राजस्व जुटाने के जरिए लक्ष्य से अधिक राजस्व संग्रह किया गया था। परन्तु इस बार पंजीकरण एवं मुद्रांक विभाग को अप्रेल से जनवरी तक दिए गए 77.4 करोड़ रुपए के लक्ष्य तक पहुंचने में मशक्कत करनी पड़ रही है। जनवरी के अंत तक मात्र 58.05 करोड़ रुपए ही संग्रह हुए हैं।
तकनीकी समस्याएं
एक रियल एस्टेट कारोबारी ने बताया कि संपत्ति पंजीकरण की कावेरी प्रणाली में अक्सर तकनीकी समस्याएं आती रहती हैं। इससे संपत्ति पंजीकरण कराने में दिक्कत आना स्वाभाविक है। साथ ही, अधिकांश कार्यालयों में उप-पंजीकरण अधिकारियों की उपलब्धता भी कम है। एक ही व्यक्ति को दो जगहों की जिम्मेदारी देने से समस्या उत्पन्न हो रही है।
जमीन और फ्लैटों की बिक्री में भी कमी
संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया धीमी होने के कारण संपत्ति पंजीकरण, स्टांप और स्कैनिंग शुल्क संग्रह उम्मीद से कम हुआ है। कोविड के बाद आर्थिक गतिविधियों में मुश्किल से ही तेजी आई है। आर्थिक मंदी के कारण जिले में प्रॉपर्टी लेनदेन का कारोबार पहले की तरह नहीं है। जमीन और फ्लैटों की बिक्री में भी कमी आई है, जिसके कारण राजस्व संग्रह पिछड़ा है।
पांच तालुकों में नहीं है उप-रजिस्ट्रार
सरकार को अधिक राजस्व दिलवाने वाले विभागों में अग्रणी पंजीकरण और स्टांप विभाग भी कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। पहले जिले में पांच सब रजिस्ट्रार (उपपंजीयकरण अधिकारी) कार्यालय थे, उस दौरान मंजूर 34 पद दस कार्यालयों के शुरू होने के बावजूद ऐसे ही हैं। इन पदों में से मात्र 11 लोग ही कार्यरत हैं, 23 पद रिक्त हैं। विभाग की जानकारी के अनुसार यल्लापुर, भटकल, होन्नावर, अंकोला और सिद्दापुर में सब-रजिस्ट्रार ही नहीं है। प्रथम श्रेणी सहायक को प्रभार पद देने की स्थिति बनी हुई है।
बुजुर्गों और विकलांगों को हो रही मुश्किल
कारवार और अंकोला के उप रजिस्ट्रार कार्यालय जाने में बुजुर्गों और विकलांगों को मुश्किल उठानी पड़ रही है। दोनों ओर पहली मंजिल पर स्थित तंग जगह में कार्यालय हैं। कुछ तालुकों में कार्यालय पहली मंजिल पर होने पर भी लिफ्ट की सुविधा है।
नई इमारत के निर्माण पर विचार
वर्तमान वर्ष 98 करोड़ रुपए राजस्व संग्रह का लक्ष्य दिया गया है और लक्ष्य तक पहुंचने का विश्वास है। अंकोला में किराए के भवन में कार्यालय चलाया जा रहा है। प्रशासनिक भवन में जगह मिलने की उम्मीद है। भवन निर्माण तक लोगों को परेशानी न हो इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। कारवार में मौजूदा स्थल पर ही नई इमारत के निर्माण पर विचार किया जाएगा।
-श्रीधर, जिला रजिस्ट्रार, उत्तर कन्नड़
राजस्व संग्रह का लक्ष्य, उपलब्धि की जानकारी
(2023-24 जनवरी तक)
उप-पंजीयन कार्यालय -- लक्ष्य -- उपलब्धि (करोड़ों में)
कारवार -- 11.27 -- 10.17
अंकोला -- 6.53 -- 4.34
कुमटा -- 9.75 -- 6.71
होन्नावर -- 6.06 -- 4.26
भटकल -- 7.05 -- 6.69
सिरसी -- 18.77 -- 11.33
सिद्दापुर -- 2.81 -- 1.95
यल्लापुर -- 4.81 -- 3.25
मुंडगोड -- 3.14 -- 1.66
हलियाल -- 7.16 -- 7.48
कुल -- 77.40 -- 58.05

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