सारस पक्षियों ने मुंडिगे तालाब पर डेरा डाला

सारस का आगमन मानसून के आने का संकेत भी होता है। माना जाता है कि तालाब पर सारस आने के पश्चात 5-6 दिनों में बारिश होती है। वर्ष 1995 से यह सिलसिला जारी है।

By: MAGAN DARMOLA

Updated: 16 Jun 2021, 06:50 PM IST

सिरसी -कारवार. वंश बढ़ाने के लिए हर साल सारस (सीगल) सिरसी तालुक के सोंदा गांव के मुंडिगे तालाब पर आते हैं। सारस का आगमन मानसून के आने का संकेत भी होता है। तालाब पर सारस आने के पश्चात 5-6 दिनों में बारिश अवश्य होती है। बीते 26 सालों के निरंतर अध्ययन से यह सुनिश्चित हुआ है। इसी प्रकार इस बार भी मुंडिगे तालाब पर रविवार सुबह सारस का आगमन हुआ। सुबह 6 बजे से समूह में आए 80 से 90 सारस तालाब के बगल में स्थित ऊंचे पेड़ पर बैठ गए वहीं कुछ पंछी तालाब पर उड़ते दिखे। आठ से 30 घंटे तक सभी सारस अचानक तालाब में उतरे। शाम को कुछ पछियों ने तालाब क्षेत्र में ही डेरा जमा दिया।

सोंदा जागरूकता मंच से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 1995 से यह सिलसिला जारी है। मई माह में तौकते तूफान के प्रभाव से बारिश हुई। पंछी बीते साल 16 मई को तालाब क्षेत्र पर डेरा डालने के बाद 24 मई को बारिश के आगमन की प्रतीक्षा में तालाब पर उतर कर शाम 7 बजे वापस लौटे थे। यह प्रकिया जून माह की दो तारीख तक चलती रही। 3 जून को तालाब पर एक भी सारस नहीं था। बाद में सारस तालाब की समीक्षा करने आए सारस समीक्षा करने के उपरांत वापस लौट गए। दस दिनों के पश्चात रविवार को पुन: सारस तालाब पर लौटे। सारस का इस प्रकार का उलझन दूसरी बार हुआ है। वर्ष 2005 के दौरान मई माह में तालाब पर उतरे पंछी मौसम में बदलाव होने की वजह से वापस लौट गए थे।

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