जहां कोई बेटी खाली पैर दिखी वहां रुककर पहनाते हैं चप्पल

एक परिवार 16 साल से कर रहा बच्चियों की सेवा

इंदौर. सिद्धिपुरम कॉलोनी निवासी एक परिवार पिछले 16 साल से एक विशेष मुहिम के तहत बच्चियों की सेवा कर रहा है। परिवार के घर बेटी का जन्म हुआ तो बच्चियों का महत्व समझ में आया। इसके बाद से परिवार कन्याओं की विशेष देखभाल करता है। परिवार के मुखिया व महिलाएं हमेशा बैग में नई चप्पलें रखते हैं, जहां बच्ची खाली पैर (बिना चप्पल-जूते) के दिखी, तुरंत रुककर उसे नई चप्पल पहनाते और आगे चल देते हैं।

नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्व है, लेकिन एक परिवार ऐसा है जो पूरे साल कन्या पूजन के अवसर ढूंढता रहता है। इस परिवार के लोगों को खाली पैर घूमती बच्चियां जहां दिखती हैं, उन्हें वहां चप्पल पहना देते हैं। इस परिवार के दीपक विभाकर नाइक छोटे व्यापार का संचालन करते हैं। उनके परिवार में मां निर्मला, पत्नी अनन्या और बेटी अनावि है। वे बताते हैं, करीब 16 साल पहले उनके घर बेटी का जन्म हुआ। घर में बेटी रूपी लक्ष्मी आने के बाद बेटियों के प्रति सम्मान बढ़ गया। तब से तय किया कि किसी भी बेटी को बिना चप्पल के चलने नहीं देंगे। इसके बाद पूरे परिवार ने यह अभियान अपने हाथ में लिया।
पूरा परिवार हर दिन करता है विशेष कन्या पूजन

दीपक की मां व पत्नी भी हमेशा बैग में नई चप्पले रखती हैं। किसी काम से बाहर जा रहे हैं या फिर घूमने या फिर किसी मंदिर अथवा पिकनिक मनाने। इनकी विशेष कन्या पूजन हमेशा जारी रहती है। आमतौर पर गरीब घरों की बच्चियां इन्हें बिना चप्पल की दिखती हैं और उसे तेज धूप, मौसम के प्रकोप से बचाने के लिए चप्पल पहना देते हैं। 16 साल में करीब 6500 बच्चियों की इस तरह से कन्या पूजन कर चुके हैं।
नवरात्रि में बस्तियों की बच्चियों का करते हैं सम्मान

नवरात्रि में परिवार बस्तियों की बच्चियों के अपने घर पूरे सम्मान के साथ लाता है। भोजन कराने के बाद उपयोगी सामग्री उन्हें भेंटकर पूरे सम्मान के साथ घर छोड़कर आते हैं। हर साल यह क्रम चलता जा रहा है।

प्रमोद मिश्रा Reporting
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