लोकसभा लडऩे के देख रहे सपने, सीएम के सामने ला पाए मुट्ठीभर कार्यकर्ता

लोकसभा लडऩे के देख रहे सपने, सीएम के सामने ला पाए मुट्ठीभर कार्यकर्ता

Hussain Ali | Updated: 27 Feb 2019, 04:38:20 PM (IST) Indore, Indore, Madhya Pradesh, India

लोकसभा लडऩे के देख रहे सपने, सीएम के सामने ला पाए मुट्ठीभर कार्यकर्ता

इंदौर. मुख्यमंत्री बनने के बाद कमल नाथ पहली बार नेताओं व कार्यकर्ताओं के बीच आए। पुराने एयरपोर्ट के बाहर शहर की 164 अवैध कॉलोनियों को वैध करने की घोषणा करने के लिए रखे गए कार्यक्रम में नाथ शामिल हुए। इस दौरान उनके साथ मंत्री तुलसी सिलावट, जीतू पटवारी, जयवर्धन सिंह, सचिन यादव, हनी बघेल, विधायक संजय शुक्ला और विशाल पटेल भी मौजूद थे। जिन कांग्रेस नेताओं को इंदौर से लोकसभा चुनाव लडऩे के सपने आ रहे हैं, वे भीड़ के नाम पर मुट्ठीभर कार्यकताओं यानी 15-20 से ज्यादा लोगों को लेकर नहीं आए। इसके साथ ही कई कांग्रेस नेता अपने कामों को लेकर नाथ को चिट्ठी पकड़ाते हुए भी नजर आए।

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नाथ के आने पर कई कांग्रेस नेताओं ने भीड़ जुटाकर शक्ति-प्रदर्शन किया, लेकिन पूर्व पार्षद चिंटू चौकसे की भीड़ के आगे दूसरे कांग्रेस नेता फेल हो गए। कार्यक्रम स्थल पर चौकसे और राजू सिंह भदौरिया अपने साथ डेढ़ से दो हजार लोगों को लेकर पहुंचे, जिसे देखकर मंच पर बैठे हुए कमल नाथ सहित अन्य नेता भी दंग रह गए और देखते ही देखते पूरा पंडाल भर गया। बसों और छोटी गाडिय़ों में भरकर यह भीड़ लाई गई।

नाथ ने खूब खाए धक्के

कांग्रेस की परंपरा रही है कि पार्टी का कोई भी बड़ा नेता आए, वह बिना धक्के खाए नहीं रह सकता। कल जब नाथ एयरपोर्ट पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मंच की तरफ बढऩे लगे, तो उनसे मिलने और फोटो खिंचवाने के लिए नेताओं के साथ कार्यकर्ताओं की भीड़ लग गई। इस कारण अव्यवस्था होने लगी और नाथ को खूब धक्के खाना पड़े। मुख्यमंत्री को धक्का खाता देख मौके पर मौजूद पुलिस ने व्यवस्था को संभाला और नेताओं को पीछे धकेला। इस पर विवाद की स्थिति बनी और कांग्रेसियों की पुलिस से बहस अलग हुई। पुलिस ने कांग्रेसियों को पीछे कर मोर्चा संभाला।

...चली समझौता एक्सप्रेस

कांग्रेसियों के अनुसार कार्यक्रम समाप्त होने के बाद अश्विन जोशी, शोभा ओझा, प्रमोद टंडन और विनय बाकलीवाल एयरपोर्ट रोड स्थित कांग्रेस नेता मंजीत टूटेजा के घर पहुंचे। यहां चारों के बीच बंद कमरे में बातचीत हुई। कांग्रेसियों की मानें तो टंडन-बाकलीवाल में चल रहे अलगाववाद को खत्म करने के लिए जोशी-ओझा ने समझौता कराने की कोशिश की। मालूम हो कि शहर कांग्रेस कमेटी में जब से बाकलीवाल को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है, तब से टंडन और उनके बीच राजनीतिक अहम् की दीवार खिंच गई है। इसे गिराने की कोशिश में नेता लगे हैं।

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