डंपर ने बाइक को मारी टक्कर, मां के हाथ से छूटी तीन माह की बच्ची, दोनों की मौत

डंपर ने बाइक को मारी टक्कर, मां के हाथ से छूटी तीन माह की बच्ची, दोनों की मौत

Hussain Ali | Publish: May, 01 2019 01:59:24 PM (IST) | Updated: May, 01 2019 01:59:25 PM (IST) Indore, Indore, Madhya Pradesh, India

डंपर ने बाइक को मारी टक्कर, मां के हाथ से छूटी तीन माह की बच्ची, दोनों की मौत

इंदौर. शादी समारोह में शामिल होकर खुशी-खुशी बाइक पर लौट रहा एक परिवार डंपर की टक्कर से बिखर गया। बाइक पर पति के साथ आ रही महिला और उसकी तीन माह की दुधमुंही बच्ची डंपर की चपेट में आ गए। महिला के हाथ से बच्ची छूट गई और उसकी मौके पर ही जान चली गई। पत्नी को गंभीर चोट आने पर पति एमवाय अस्पताल लेकर गया। यहां इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजन ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा किया। परिजन का आरोप है, स्ट्रेचर के अलावा न तो वेंटिलेटर मिला और न ही समय पर डिस्चार्ज किया गया।

सिमरोल टीआई आरके नैन के मुताबिक, दोपहर में चोरल मार्ग पर दुर्घटना में रानी (23) पति शिवशंकर, तीन माह की प्रियल की मौत हुई है। अज्ञात चालक पर केस दर्ज किया गया। मंगलवार को रानी का पीएम एमवाय हॉस्पिटल और बच्ची का जिला हॉस्पिटल में कराया। एमवाय पहुंचे रविशंकर ने बताया, वे खंडवा स्थित पैतृक गांव में शादी में शामिल होने गए थे। लौटते वक्त उनके साथ बाइक पर पत्नी व दो बेटी बैठी थीं। चोरल के समीप सामने से आ रहे तेज रफ्तार डंपर ने बाइक को टक्कर मार दी। रविशंकर व एक बेटी मार्ग पर एक तरफ तो पत्नी व बेटी प्रियल डंपर की दिशा में गिर गईं।

तीन घंटे तक वेंटिलेटर नहीं दिया, डिस्चार्ज का बोला तो एक घंटे तक साइन नहीं कर पाए

देर शाम पत्नी की मौत पर शिवशंकर व अन्य परिजन ने एमवाय में हंगामा किया। पति का आरोप है, हॉस्पिटल में इलाज के नाम पर धोखा हुआ है। तीन घंटे तक पत्नी को वेंटिलेटर नहीं मिला। स्ट्रेचर पर ही उसका उपचार चलता रहा। डॉक्टर बोले- खून चढ़ाना होगा, फिर एंटीबॉयोटिक देने की बात कही। उसकी हालत बिगड़ते देख वे उसे अन्य हॉस्पिटल ले जाना चाहते थे पर स्टाफ ने डिस्चार्ज के लिए साइन कराने की बात कही। आरोप है, जिम्मेदार एक घंटे तक पेपर पर साइन नहीं कर पाए। इस बीच स्ट्रेचर पर ही रानी ने दम तोड़ दिया। परिजन का कहना था, प्रबंधन घायल को समय पर रैफर कर देता तो उसकी जान बच जाती।

- लापरवाही का आरोप गलत है। घायल को बचाने के हरसंभव प्रयास किए गए। मरीज पॉली ट्रामा की स्थिति में पहुंचा था। कई गंभीर फ्रैक्चर भी थे।
डॉ. पीएस ठाकुर, एमवाय अधीक्षक

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