मप्र में कलेक्टर को ‘बाहुबली’ की तलाश, अफसरों ने निकाला अजब-गजब टेंडर

मप्र में कलेक्टर को ‘बाहुबली’ की तलाश, अफसरों ने निकाला अजब-गजब टेंडर

amit mandloi | Publish: Jan, 13 2018 05:28:43 PM (IST) Indore, Madhya Pradesh, India

ऐसा ठेकेदार चाहिए, जो भवन रखरखाव, सफाई के साथ अफसरों व आम जनता के खाने-पीने का इंतजाम कर सके।

 

एक ही ठेकेदार से मांगा सफाई, भवन रखरखाव और खान-पान का लाइसेंस, काम देखने आने वालों की फूलीं सांसें
मोहित पांचाल. इंदौर
प्रशासनिक संकुल का भव्य भवन अब सफेद हाथी साबित हो गया है, जिसके लिए जिला प्रशासन को ‘बाहुबली’ की तलाश है। ऐसा ठेकेदार चाहिए, जो भवन रखरखाव, सफाई के साथ अफसरों व आम जनता के खाने-पीने का इंतजाम कर सके। इसके लिए टेंडर जारी किया गया है, जिसे देखकर ठेकेदारों की सांसें फुल रही हैं।


हाल ही में जिला प्रशासन ने संकुल के रखरखाव, सफाई और पेंट्री के लिए टेंडर जारी किया है। तीन साल के लिए ठेका दिया जाएगा, जिसके लिए डेढ़ करोड़ रुपए का अनुमानित मूल्य लगाया गया है। इसमें भाग लेने वाले ठेकेदार को पांच हजार रुपए का टेंडर लेना पड़ेगा। तीन लाख रुपए की राशि भी जमा कराना होगी। टेंडर देखकर ठेकेदार कंपनियों की सांसें फुल गई हैं। सवाल ये है कि कौन सी कंपनी है, जो सारे कामों के लिए लाइसेंसधारी व पारंगत होगी। ऐसा होना संभव नहीं है, क्योंकि सभी के विभाग अलग-अलग हैं। कोई टेंडर भरता भी है तो वह गलत साबित होगा, क्योंकि प्रशासन ने अपेक्षा की है कि ये सारे लाइसेंस उसके पास होना चाहिए।


आखिरी तारीख 15 जनवरी
इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करना होंगे, जिसकी आखिरी तारीख १५ जनवरी है। १६ जनवरी को डीडी चेक करने के साथ आवेदन की तकनीकी तौर पर जांच की जाएगी। १७ जनवरी को देखा जाएगा कि सबसे कम कीमत में काम करने वाला ठेकेदार कौन है, जो दस्तावेजी खानापूर्ति में मजबूत है।

इनके मांगे लाइसेंस

पीडब्ल्यूडी

विद्युत मंडल का क्लास वन

एफएसएसआई (फूड)

सफाई में अनुभव प्रमाण पत्र ठ्ठ इनके अलावा जीएसटी व पेन नंबर भी मांगा गया है, साथ में आईटी रिटर्न कीकॉप मांगी है।

आ रही है घोटाले की बू

एक साथ सारे लाइसेंस किसी एक ठेकेदार के पास नहीं हो सकते। पिछली बार सफाई के लिए सवा लाख रुपए महीने में ठेका गया था। इस हिसाब से देखा जाए तो साल के १५ लाख रुपए में काम दिया गया था। अब डेढ़ करोड़ रुपए दिए जा रहे हैं। लाइसेंस भी ठेकेदार कंपनियों से मांगे जा रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में घोटाले की बू आ रही है। सवाल उठ रहे हैं कि किसी एक कंपनी को उपकृत करने के लिए तो ये नहीं किया गया है। अन्य ठेकेदारों के लाइसेंस मान्य कर काम देने का खेल है, ताकि छोटे ठेकेदार पेचिदगियां देखकर टेंडर जमा नहीं करे।

सफेद हाथी की संज्ञा दीथी
पांच साल पहले होलकरकालीन भवन तोडक़र प्रशासनिक संकुल का निर्माण किया गया था। भव्यता देखकर मुख्यमंत्रीशिवराजसिंह चौहान ने तारीफ कर मेंटेन रखने की बात कही थी। लोकार्पण में आए कुछ अफसरों ने इसे सफेद हाथी की संज्ञा दी थी, जो सच साबित हो रही है। भवन का रखरखाव तो ठीक,सफाई भी ठीक से नहीं हो पा रही है

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