हास्य व्यंग्य से भरपूर ‘शोभायात्रा’ में गंभीर मुद्दों की पड़ताल

INDORE NEWS : विद्युत मंडल पेंशनर्स एसोसिएशन द्वारा डॉ. मनोहर लाल मोतीवाले की स्मृति में नाटक का किया मंचन

इंदौर. स्वतंत्रताकाली सामाजिक और राजनीति से जुड़े गंभीर मुद्दों को दर्शकों तक पहुंचाता है नाटक ‘शोभायात्रा’। विद्युत मंडल पेंशनर्स एसोसिएशन द्वारा डॉ. मनोहर लाल मोतीवाले की स्मृति में रविवार को रवींद्र नाट्यगृह में पथिक ग्रुप द्वारा शफाअत खान लिखित इस नाटक का मंचन किया गया। हास्य व्यंग्य के रंग में रंगा यह नाटक दर्शकों को तत्कालीन परिस्थितियों से परिचित करवाता और कुछ बेहद आवश्यक सवाल भी खड़े करता है। इसमें स्वतंत्रता के आसपास के सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों की पड़ताल है, जहां भारतीय ऐतिहासिक नायकों के रूप में महात्मा गांधी, नेहरू, सुभाषचंद्र बोस, लोकमान्य तिलक , झांसी की रानी और शहीद बाबू गेनू अपनी ऐतिहासिक वेषभूषा में इन महान पात्रों की भूमिका निभाने के लिए तैयार होकर चल समारोह के प्रतिभागी के रूप में समारोह प्रारंभ होने की प्रतीक्षा कर रहे होते हैं।

नाटक में जब अमरीकन मीडिया से पत्रकार फोटोग्राफर बार्बी शोभायात्रा को कवर करने आती हैं और उन महान पात्रों के छायाचित्र लेने लगती हैं, इस समय हर पात्र चाहता है कि उसे अधिक से अधिक कवरेज मिले, लेकिन वह सिर्फ गांधी में अधिक रुचि दिखाती है। जब अभिनेताओं को यह पता चलता है कि चल समारोह अंडरवल्र्ड डॉन भाई द्वारा प्रायोजित है और इसका पूरा जिम्मा अपने साथी कृष्णा पावलस को सौप रखा है, तब झांसी की रानी नाटक का हिस्सा बनने से इनकार कर देती है। तब उसे पावलस द्वारा जान से मारने की धमकी और रिवॉल्वर से मारने के प्रयास के बीच एक चाय वाला छोटू वर्तमान परिदृश्य में गांधी बनकर उभरता है और झांसी की रानी बनी मैडम के सामने खड़ा हो कर उसके प्रेग्नेंट होने की बात बताता है। भाई का साथी उसकी बात सुनकर अपनी रिवॉल्वर नीचे कर लेता है। इस तरह छोटू सभी अभिनेताओं की जान बचा लेता है और सभी को शोभायात्रा में शामिल होने के लिए राजी कर लेता है।
नाटक दिखाता है, किस तरह हमेशा से ही दोहरी तलवार रूपी इतिहास का इस्तेमाल राजनीति के अहंकार और भावनाओं को दबाने के लिए किया जा रहा है, जो स्पष्ट रूप से समाजवादियों की हार को दर्शाता है। मंच पर महात्मा गांधी की भूमिका में अनुराग मिश्रा, नेहरू के रूप में मिलिंद शर्मा, सुभाषचंद्र बोस के रूप में नंदकिशोर बर्वे, लोकमान्य तिलक के रूप में अभिजित निमगावकर, झांसी की रानी के रूप में शुभदा केकरे और शहीद बाबू गेनू के किरदार में डॉ. पंकज उपाध्याय और छोटू की भूमिका में अद्वैत केकरे थे। रंगमंच व्यवस्था सागर शेंडे और प्रकाश अग्निहोत्री का था। संगीत रोशनी दीपके का था। निर्देशक सतीश श्रोत्री इतिहास और राजनीति के संबंध में संतुलन दिखाने में सफल रहे।

हास्य व्यंग्य से भरपूर ‘शोभायात्रा’ में गंभीर मुद्दों की पड़ताल
राजेश मिश्रा
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