दिव्यांग है पर हजारों युवाओं को दे रहे है नए ख्वाब

Arjun Richhariya

Publish: Sep, 17 2017 07:28:51 PM (IST)

Indore, Madhya Pradesh, India
दिव्यांग है पर हजारों युवाओं को दे रहे है नए ख्वाब

ब्रेल लीपि में कंटेट की कमी है। बुक शेयर इंडिया पर हजारों किताबे उन लोगों के लिए अवेलेबल है जो प्रिंटेड मेैथ्ड पढ़ नई करियर से रूबरू करवाना लक्ष्य 

एनेबल इंडिया के स्पेशल ट्रेनर संदेश एच और बुक शेयर इंडिया के चीफ डॉ.होमियार से पत्रिका की खास बातचीत

इंदौर. ख्वाब देखना का साहस हर किसी के पास नही होता। मेरा ख्वाब है कि मैं उन हजारों लोगों की आंखों को नए ख्वाब दे सकूं जो विजुअली चैलेंजड। इसकी वजह मैं खुद भी देख नही सकता। मैने भी कई तकलीफें झेली है इसीलिए देश के ४६.८ मिलियन दृष्टि बाधित लोगों को इकॉनोमिक इंडिपेंडेंस देने का सपना देख रहा हूं। ये बात बैंगलुरू के संदेश एच ने पत्रिका से साथ खास बातचीत में कही। वे और उनके साथी बुक शेयर के इंडिया चीफ डॉ. होमियार मोबेडजी रविवार को नेशनल ब्लाइंड एसोसिएशन में दृष्टि बाधित स्टुडेंटस को टेक्नॉलोजी से जुड़ी जानकरी देने के लिए वर्कशॉप करने आये है।

नई करियर से रूबरू करवाना लक्ष्य
संदेश बताते है कि मैने जब मेरे जैसे लोगों से पूछा कि वे क्या करना चाहते है तो जवाब होता रिसेप्शनिस्ट, टेलिफोन ऑपरेटर या गर्वमेंट जॉब्स। कोई कुछ नया नहीं करना चाह रहा था। मेरी ख्वाहिश सबको कुछ नया सिखाने की थी। जब में सात साल का था तो ग्लोकोमा की वजह से मेरी आंखे चली गई। उसके बाद मैने एक साल सामान्य स्कूल में पढ़ाई कि लेकिन समस्याएं बहुत होती थी इस वजह से ब्लाइंड स्कूल में एडमिशन लिया छठी कक्षा के बाद फिर से सामान्य स्कूल में पढ़ाई की और मैथ्स साइंस सब्जेक्ट लिया। साल २००५ में हच कंपनी में टेली मार्केट सेल्स एग्जीक्यूटिव के रूप में काम किया और फिर इच्छा हुई कि बीपीओं में काम करू उसके लिए अच्छी इंग्लिश और कम्प्युटर का नॉलेज चाहिए था। मुझे २००६ में किसी से एनेबल इंडिया के बारें पता चला। ये संस्था विजुअली इंपेयर्ड लोगों को ट्रेनिंग देती है। वहां से सीखने के बाद महसूस किया कि देश में कई ऐसे दृष्टि बाधित लोग है जिन्हे टेक्नोलॉजी के अभाव में सही करियर की राह नही मिलती। देश में २२ सेक्टर्स में इनके लिए कई तरह क ी जॉब्स और ट्रेनिंग होती है जिसकी जानकारी देना का काम में करता हूं। मैं कोई दूसरा करियर भी चुन सकता था लेकिन मुझे महसुस की लोगों में ज्ञान की कमी नही हैं। मै उन्हे इकोनोमिक इंडीपेंडेंस दे रहा हूं। अब तक १७ स्टेटस में ट्रेनिंग सेशन दे चुका हूं और हजारों लोगों को ट्रेनिंग दे रहा हूं ताकि वे आई टी, मीडिया, बिजनेस जैसे सेक्टर्स में एंट्री ले सके।

टेक्रॉलॉजी से मिलाना होगा कदम

वे बताते है कि आपका स्र्माटफोन आपको बहुत कुछ सिखा सकता है। हम बताते है कि किस तरह तकनीक की मदद से आप नई-नई चीजे सीख सकते है। इसके अलावा टच एंड फीलिंग मैथ्ड, एक्सपोजर टू आउटसाइड, फ्लिप मॉडल जिसमें स्टुडेंट टीचर की तरह पढ़ते या प्रेक्टिल करते है और गलती होने पर टीचर इसमें सुधार करता है। इसके अलावा हम उन्हे टेक्रॉफ्रेंडली बनाते है। बताते है कि कम्प्युटर में स्क्रीन रीडर की मदद से किस तरह एक सामान्य व्यक्ति की तरह कम्प्युटर पर काम कर सकते है। इसके अलावा एनेबल इंडिया स्पेलिंग टूल, नॉन विजुअल डेस्कटॉप एक्सेस, एआई पालॉविजन जैसी एप्लीकेशन की जानकारी देते है जिससे वे पढ़ सकते है, इंग्लिश सीख सकते है। उन्होने बताया कि सिग्नल पर कब रूकना है, कौनसा वाहन आपके सामने है और रंगों की जानकारी भी एप्लीकेशन के साथ कैसे सीखी जा सकती है इसकी ट्रेनिंग दी जाती है। जो उन्हे हर काम करने में समर्थ बनाता है।

ऑनलाइन पढ़ सकते है किताबें
डॉ. होमियार बताते है कि मुझे बचपन से ही कम दिखता था और अब दिखना बिल्कुल बंद हो गया है। मैं लोगों के इस नजरियें का बदलना चाहता हूं जो लोगों की कमियों पर ज्यादा ध्यान देते है खूबियों पर नहीं। वे बताते है कि हम आउटर वल्र्ड एक्सपोजर देते है जिसमें दिव्यांग लोग ट्रेनर की मदद से ट्रेकिंग तक के अनुभव लेते है। ब्रेल लीपि में कंटेट की कमी है और इसी वजह से लोग पढ़ नही पाते है। बुक शेयर इंडिया पर हजारों किताबे उन लोगों के लिए अवेलेबल है जो प्रिंटेड मेैथ्ड पढ़ नही पाते। इसके लिए रिफ्रेशबल ब्रेल डिस्प्ले डिवाइस का होना जरूरी है। इसमें ऑडियों बुक्स भी अवेलेबल है। वे बताते है कि जो लोग टेक्रीकल डिवाइस नही खरीद सकते है उनके लिए एडीआईपी के स्कीम के तहत दृष्टि बाधित लोगों को मदद दी जाती है। अगर कोई किसी तरह की सहायता या जानकारी हमसे चाहते है तो हमे डॉ. होमियार एट द रेट जी मेल डॉट कॉम या ७८७५४६६३४४ पर कॉन्टेक्ट कर सकते है।

 

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