संबल योजना को पलीता लगा रहे निगम के अफसर

संबल योजना को पलीता लगा रहे निगम के अफसर

Mohit Panchal | Updated: 30 Sep 2018, 11:10:26 AM (IST) Indore, Madhya Pradesh, India

अंत्येष्टि के लिए नहीं की मदद, अफसर पर भड़के भामामला संबल योजना में मिलने वाली सहायता का, बवाल होता देख तुरंत पीडि़त के घर पहुंची निगम की टीम

इंदौर। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की महत्वाकांक्षी संबल योजना पर नगर निगम के अफसर पलीता लगा रहे हैं। पांच दिन पहले एक असंगठित मजदूर की मौत हो गई, लेकिन आवेदन के बाद भी परिवार को अंत्येष्टि सहायता नहीं दी। ये बात जब भाजपा नेता को लगी तो उन्होंने जमकर बखेड़ा खड़ा कर दिया। बवाल देखते हुए अफसर तुरत-फुरत पहुंचे और पांच हजार की राशि सौंपी।

असंगठित मजदूर और उनके परिवार के लिए प्रदेश सरकार ने संबल योजना घोषित की थी। इसमें रजिस्टर्ड सदस्यों को कई प्रकार की सुविधाएं सरकार दे रही है। इसमें मृत्यु पर अंत्येष्टि के लिए पांच हजार रुपए की सहायता भी है। सामान्य मौत पर २ लाख और दुर्घटना में ४ लाख रुपए सरकार देगी। विद्युत मंडल ने योजना के हिसाब से करोड़ों रुपए का बिजली का बिल माफ कर दो सौ रुपए वाले कनेक्शन बांट दिए, लेकिन रजिस्ट्रेशन करने वाली संस्था निगम ही उस पर अमल नहीं कर रही है।

ऐसा ही एक मामला नगर निगम के जोन १८ का सामने आया, जिसमें मजदूर की मौत पर सहायता करने में निगम अफसर आनाकानी कर रहे थे। पांच दिन पहले राजेश पिता हीरालाल बौरासी की मौत हो गई थी। राजेश के परिवार के सदस्य व भाजपा नेता राजू बौरासी, नागेश और पप्पू जोशी ने जोन पर जाकर सूचना दी, ताकि परिवार को अंत्येष्टि के लिए मिलने वाली पांच हजार रुपए की सहायता मिल जाए।

लगातार संपर्क करने के बावजूद अफसर टालते रहे। बौरासी ने कहानी नगर उपाध्यक्ष सुमित मिश्रा को बताई। कल मिश्रा जोन पर पहुंच गए। चर्चा में एसओ का कहना था कि मृत्यु प्रमाण पत्र आने के बाद अंत्येष्टि सहायता और आर्थिक सहायता हो पाएगी। इस पर मिश्रा का कहना था कि २१ दिन में प्रमाण पत्र आएगा। एसओ का कहना था कि ये निर्देश हमें जोनल अधिकारी शांतिलाल यादव ने दिए।

इस पर जब यादव से बात की तो उन्होंने नई कहानी बता दी। पहले तो कहना था कि पोर्टल पर एंट्री नहीं हो रही है। इस पर मिश्रा का कहना था कि गरीब का पैसा कैसे रोक सकते हो, मुख्यमंत्री ने तुरंत सहायता करने के निर्देश दे रखे हैं। इस पर यादव का कहना था कि ठीक है तो मुतक की पत्नी को ले आओ।

इस पर भड़के मिश्रा ने बोल दिया कि आपको मालूम नहीं है कि जब परिवार में गमी हो जाती है तो १३ दिन घर से नहीं निकलते हैं। किसी का पति मर गया और आप उसकी पत्नी को बुलाओगे....मैं ये बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाऊंगा। ये सुनकर यादव ने तुरंत यू टर्न लिया। उसके बाद निगम की टीम को सहायता लेकर बौरासी के घर पहुंचा दिया गया।

कार्रवाई से बच रहे अफसर
गौरतलब है कि संबल योजना में अंत्येष्टि सहायता देने के लिए नगर निगम अफसरों को मशक्कत करना पड़ेगी। असंगठित मजदूर की मौत की सूचना मिलने के बाद निगम के कर्मचारियों को मौके पर पहुंचकर पंचनामा बनाना होगा। इसके तुरंत बाद ही सहायता दी जा सकेगी। चौंकाने वाली बात ये है कि चितावद क्षेत्र में ही करीब पांच पीडि़त परिवारों ने सहायता के लिए आवेदन लगा रखा है।

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